- जलसंसाधन विभाग का कमजोर वाटर मैनेजमेंट
- अब यदि कैचमेंट में भारी बारिश हुई तो बन सकती विकट स्थिति
- 1973, 2006, 2022 और 2024 में क्षमता से ज्यादा भर गया था, कई गांवों में बने थे विकट हालात
देवेंद्र शर्मा, उदयपुर(एआर लाइव न्यूज)। उदयसागर के दोनों गेट 5-5 फीट खोलने के बावजूद 24 फीट पूर्ण भराव स्तर वाले उदयसागर का जलस्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा। यह स्थिति तब है जब मानसून के दौर बाकी है और आगामी दिनों में भी उदयपुर संभाग में भारी बारिश की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में मौसम विभाग के पूर्वानुमान अनुसार अब यदि कैचमेंट में तेज बारिश होती है तो उदयसागर के बैक वाटर से प्रभावित मटून और खरबड़िया क्षेत्र में विकट हालात बन सकते है। इसके लिए कहीं न कहीं जलसंसाधन विभाग का कमजोर वाटर मैनेजमेंट जिम्मेदार माना जा सकता है। वीडियो पर क्लिक कर देखें उदयसागर:-
उदयसागर वर्ष 1973 के बाद 2006, 2022 और 2024 में क्षमता से ज्यादा भर गया था और बैक वाटर से प्रभावित गांवों में विकट हालात बने थे। उदयसागर की स्थिति देखते हुए प्रभावित गांवों के लोगों की चिंता इस बार भी बढ़ी हुई है। उसके बावजूद जलसंसाधन विभाग पुराने अनुभव को देखते हुए वाटर मैनेजमेंट नहीं कर पा रहा है।
मदार, फतहसागर, स्वरूपसागर का पानी आयड़ होते हुए उदयसागर में ही जा रहा
उदयसागर का पूर्ण भराव स्तर 24 फीट है और इसके दोनों गेट 5-5 फीट खोल रखे है। इसके बावजूद जलस्तर कम होने बजाय बढ़ ही रहा है। आज बुधवार को भी उदयसागर का जलस्तर 23 फीट है और गेट खुले होने के बावजूद रात भर में 3 इंच पानी बढ़ गया। फतहसागर और स्वरूपसागर के चारों गेट खुले होने के साथ ही मदार के दोनों तालाबों से भी आवक बनी रहने से आयड़ नदी में तेज बहाव जारी है। यह पानी सीधा उदयसागर में जा रहा है। दूसरी तरफ उदयसागर की निकासी क्षमता बहुत कम है। मौसम विभाग ने फिर से भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया हुआ है और मानसून विदा होने में अभी काफी समय बाकी है।

शुरू से ही पर्याप्त निकासी पर नहीं दिया ध्यान
वर्ष 2006, वर्ष 2022 और 2024 के हालातों को ध्यान में रखकर जलसंसाधन विभाग के स्थानीय अधिकारी उदयसागर से पर्याप्त मात्रा में और समय समय पर पानी की निकासी पर ध्यान देते तो आज चिंता की स्थिति नहीं बनती। बड़े अधिकारी अधिनस्थ के भरोसे वाटर मैनेजमेंट में विश्वास कर रहे, जबकि फील्ड में स्थिति अलग होती है। मोहता पार्क के समीप स्थित जलसंसाधन विभाग परिसर में ही नियमित रूप से इसी विभाग के 10-20 सेवानिवृत इंजीनियर बैठते है। जिन्होंने वर्षों तक उदयपुर की झीलों में पानी की आवक और निकासी पर सफलतापूर्वक निगरानी रखी। मौजूदा अफसर इनके अनुभव का भी लाभ लेने की कोशिश कर ले तो कभी भी संकट की स्थिति पैदा नहीं हो।
इस सीजन में जलसंसाधन विभाग ने 27 जुलाई को पहली बार उदयसागर के गेट खोले थे, तब जलस्तर 22 फीट हो चुका था। तब दोनों गेट 3-3 इंच खोले। चार दिन बाद गेट बंद कर दिए गए। तब जलस्तर 21 फीट 3 इंच था। इसके बाद फिर से जलस्तर में बढ़ोतरी होने लगी और उदयसागर का जलस्तर 9 अगस्त को 22 और 10 अगस्त को 23 फीट हो गया तब जाकर फिर से गेट खोले, लेकिन इस बार भी निकासी बहुत कम रखी।
मदार तालाब और पिछोला के कैचमेंट में तेज बारिश हुई तो स्थिति संभाल नहीं पाएंगे
मदार के दोनों तालाब के कैचमेंट और पिछोला के कैचमेंट में दो तीन घंटे भी तेज बारिश हो जाती है तो आयड़ नदी में बहाव और तेज होना तय है। इस स्थिति में जलसंसाधन विभाग के अधिकारी चाहकर भी जरूरत अनुसार उदयसागर से पर्याप्त मात्रा में पानी की निकासी नहीं कर पाएंगे। ऐसे में उदयसागर के बैक वाटर से प्रभावित गांव मटून ,खरबड़िया और पनवाड़ी क्षेत्र में विकट स्थिति बन सकती है। सीसारमा नदी में अभी भी पानी का 5 फीट बहाव बना हुआ है। मदार बड़ा तालाब पर 8 इंच और मदार छोटा पर 3 इंच की चादर चल रही है। दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में 29-30 अगस्त से बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। उदयपुर व कोटा संभाग में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती।


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