सुप्रीम कोर्ट ने छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच के दिए संकेत
नई दिल्ली | एआर लाइव न्यूज। NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है और यह नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। कोर्ट ने संकेत दिया कि मामले में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जा सकती है ताकि प्रदर्शनकारियों और पुलिस—दोनों पक्षों के आरोपों की वस्तुनिष्ठ जांच हो सके। | Supreme Court cjp student protest hearing
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि मामले की स्वतंत्र जांच आवश्यक है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी पक्ष ने जरूरत से अधिक बल प्रयोग किया है या कानून अपने हाथ में लिया है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, ऐसे नाबालिग प्रदर्शनकारियों की रिहाई के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि 18 वर्ष से कम आयु के ऐसे प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा किया जाए जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। अदालत ने कहा कि कानून का पालन करने वाले छात्रों के अधिकारों की रक्षा करना न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
गंभीर आरोपों पर कोर्ट की नजर
याचिकाओं में पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें शामिल हैं—
- पैलेट गन के इस्तेमाल से छात्रों के घायल होने के आरोप।
- रबर बुलेट, इलेक्ट्रिक बैटन और कीलों वाली लाठियों के इस्तेमाल के दावे।
- महिलाओं, वकीलों और मीडिया कर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार।
- सिविल ड्रेस में पुलिसकर्मियों की तैनाती के आरोप।
अदालत ने कहा कि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच जरूरी है ताकि तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला जा सके।
पुलिस कार्रवाई के प्रोटोकॉल की होगी समीक्षा
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि 2018 में बनाए गए पुलिस कार्रवाई संबंधी दिशा-निर्देशों की 2026 की परिस्थितियों में समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है। कोर्ट ने संकेत दिया कि प्रदर्शन और भीड़ नियंत्रण के लिए एक ऑल इंडिया स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल तैयार या अद्यतन किया जाना चाहिए, जिससे सभी राज्यों में एक समान प्रक्रिया अपनाई जा सके।
हाई-पावर्ड कमेटी के गठन के संकेत
पीठ ने संकेत दिया कि दिल्ली सहित अन्य राज्यों में हुई कथित पुलिस कार्रवाई और हिंसा की जांच के लिए हाई-पावर्ड कमेटी गठित की जा सकती है। अदालत ने कहा कि जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी होनी चाहिए तथा सभी संबंधित पक्षों को सहयोग करना चाहिए।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों दोनों के आरोपों की होगी जांच
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने अदालत को बताया कि 250 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
इस पर कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र जांच से यह स्पष्ट होगा कि प्रदर्शन के दौरान किस पक्ष की ओर से कानून का उल्लंघन हुआ और किस स्तर पर बल प्रयोग उचित या अनुचित था।
CCTV और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और संबंधित राज्यों को निर्देश दिया कि प्रदर्शन से जुड़े सभी CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं।
साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों का कोई भी व्यक्तिगत डिजिटल डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाएगा और उनकी निजता का संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।
अगली सुनवाई 3 अगस्त को
मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की गई है। अदालत ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और अन्य राज्यों से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही संकेत दिए हैं कि अगली सुनवाई में जांच समिति के गठन और आगे की प्रक्रिया पर निर्णय लिया जा सकता है।
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