कोटा में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के दीक्षांत समारोह में बोले उपराष्ट्रपति धनखड़
कोटा,(एआर लाइव न्यूज)। कोटा में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के शनिवार को हुए चौथे दीक्षांत समारोह में मुख्यअतिथि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कोचिंग सेंटर्स को लेकर चिंता व्यक्त की। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कोचिंग सेंटर अब “पोचिंग सेंटर” बन गए हैं। ये सुदृढ़ सांचों में प्रतिभा को जकड़ने वाले ब्लैक होल बन गए हैं। कोचिंग सेंटर अनियंत्रित रूप से फैल रहे हैं, जो हमारे युवाओं के लिए एक गंभीर संकट बनते जा रहे हैं। हमें इस चिंताजनक बुराई से निपटना ही होगा। हम अपनी शिक्षा को इस तरह कलंकित और दूषित नहीं होने दे सकते। Coaching Centres Turned Out to be Poaching Centres, Become Black Holes For Talent : Vice President of india वीडियो पर क्लिक कर सुनें कोचिंग सेंटर्स को लेकर क्या बोले उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़:-
धनखड़ ने कहा मैं नागरिक, समाज और जनप्रतिनिधियों से आग्रह करता हूं कि इस समस्या की गंभीरता को समझें और शिक्षा में पुनर्संयम लाने हेतु एकजुट हों। हमें कौशल आधारित कोचिंग की आवश्यकता है। धनखड़ ने अंकों की होड़ के दुष्परिणामों पर चेताते हुए कहा, पूर्णांक और मानकीकरण के प्रति जुनून ने जिज्ञासा को खत्म कर दिया है, सीटें सीमित हैं, लेकिन कोचिंग सेंटर हर जगह फैले हुए हैं। वे वर्षों तक छात्रों के मन को एक ही ढर्रे में ढालते हैं, जिससे उनकी सोचने की शक्ति अवरुद्ध हो जाती है। इससे कई मनोवैज्ञानिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
छात्रों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति बोले, आपकी मार्कशीट और अंक आपको परिभाषित नहीं करेंगे। प्रतिस्पर्धी दुनिया में प्रवेश करते समय, आपका ज्ञान और सोचने की क्षमता ही आपको परिभाषित करेगी। कोचिंग सेंटर राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के विपरीत हैं। यह विकास और प्रगति में बाधाएं उत्पन्न करता है।
पेरेन्ट्स कर्ज लेकर बच्चे की फीस भरते और कोचिंग सेंटर उस पैसे को विज्ञापनों में बहाते हैं
उन्होंने कोचिंग सेंटरों द्वारा विज्ञापनों पर भारी खर्च की आलोचना करते हुए कहा अखबारों में विज्ञापनों और होर्डिंग्स पर भारी पैसा बहाया जाता है। यह पैसा उन छात्रों से आता है, जो या तो कर्ज लेकर या बड़ी कठिनाई से अपनी पढ़ाई का खर्च उठाते हैं। ये विज्ञापन हमारी सभ्यतागत आत्मा के लिए आंखों की किरकिरी बन गए हैं।
रट्टा मारने की संस्कृति के संकट से जूझ रहे हैं
उपराष्ट्रपति ने रटंत शिक्षा की संस्कृति की तीव्र आलोचना की और कहा हम आज रट्टा मारने की संस्कृति के संकट से जूझ रहे हैं। जिसने जीवंत मस्तिष्कों को केवल अस्थायी जानकारी के यंत्रवत भंडारों में बदल दिया है। इसमें न तो कोई आत्मसात है, न कोई समझ। यह रचनात्मक विचारकों की बजाय बौद्धिक “जॉम्बी” तैयार कर रहा है। रट्टा ज्ञान नहीं देता, केवल स्मृति देता है।
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देश किसी सैन्य आक्रमण से नहीं, विदेशी डिजीटल बुनियादी ढांचे पर निर्भरता से पराधीन होंगे
धनखड़ ने 21वीं सदी के नए युग को लेकर कहा कि अब देश किसी सैन्य आक्रमण से नहीं, बल्कि विदेशी डिजिटल बुनियादी ढांचे पर निर्भरता से कमजोर और पराधीन होंगे। सेनाएं अब एल्गोरिदम में बदल गई हैं। संप्रभुता की रक्षा का संघर्ष अब तकनीकी स्तर पर लड़ा जाएगा। 21वीं सदी का युद्धक्षेत्र अब भूमि या समुद्र नहीं है। पारंपरिक युद्ध अब अतीत की बात हो गई है। आज हमारी शक्ति और प्रभाव कोड, क्लाउड और साइबर से तय होते हैं। तकनीकी नेतृत्व अब देशभक्ति की नई सीमा रेखा है।
दीक्षांत समारोह में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एके भट्ट, निदेशक प्रो. एनपी पाढ़ी, कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा, लाडपुरा विधायक कल्पना देवी, कलक्टर पीयूष समारिया, पुलिस अधीक्षक शहर डॉ. अमृता दुहन, आईएएस प्रशिक्षु आराधना चौहान सहित संस्थान की फैकल्टी, छात्र-छात्राएं एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।
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