कहीं आपका कोई खाता ऐसा तो नहीं, जिसकी एक्टिविटी की आपको न हो जानकारी
एआर लाइव न्यूज। बीकानेर पुलिस ने शुक्रवार को ऑनलाइन ठगी गिरोह का खुलासा करते हुए 6 शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है, ये ठग बीकानेर के ही रहने वाले हैं और बड़े शहरों में बैठे साइबर ठगों को लोगों के बैंक खाते किराए पर उपलब्ध करवाते थे। इस गिरोह ने विभिन्न बैंकों के खातों का दुरुपयोग कर देशभर में 51.81 करोड़ रुपए की ठगी को अंजाम दिया है।rajasthan bikaner police bust gang of bank account providers on rent to cyber fraud
पुलिस अधीक्षक कावेंद्र सिंह सागर ने बताया कि बीकानेर के पवनपुरी निवासी समर्थ सोनी, धर्म नारायण सिंह, रोहित सिंह, शिव नारायण सिंह, राजीव नगर निवासी विकास बिश्नोई, एमपी कालोनी निवासी गुरदेव को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज और बैंकिंग सामग्री बरामद की है, जिसमें 8 बैंक पासबुक, 16 चेकबुक, 23 एटीएम डेबिट कार्ड, 3 अलग-अलग फॉर्म की सील मोहरें और केवाईसी फॉर्म शामिल हैं।
ऐसे किराए पर देते थे बैंक एकाउंट
आरोपी क्षेत्र के गरीब-निर्धन और कम पढ़े-लिखे लोगों को लालच देकर बैंक ले जाकर उनका सेविंग अकाउंट खुलवाते हैं और लोगों की आईडी यूज कर फर्जी फर्म के नाम से रजिस्ट्रेशन कर करंट अकाउंट खुलवाते हैं। खाते में मोबाइल नंबर संबंधित व्यक्ति का नहीं लिखवाते हैं, ताकि खाते में होने वाली एक्टिविटी की उसे जानकारी नहीं मिले। बैंक द्वारा दी जाने वाली खाता किट भी आरोपी ही प्राप्त कर लेते थे। साइबर ठग आमजनता से ठगी राशि को ट्रांसफर करने के लिए इन आरोपियों से संपर्क करते हैं और इनसे बैंक खाता किराए पर लेते हैं। बीकानेर में बैठे ये आरोपी खाता किट या खाते की जानकारी बस के जरिए या वाट्सएप के जरिए साइबर ठगों तक पहुंचा देते हैं। साइबर ठग चेकबुक या एटीएम से राशि निकाल लेते थे। इस तरह खाता मालिक को पता भी नहीं चलता है कि उसे खाते का किस तरह दुरूपयोग हो रहा है।
आमजन को सावधान होने की जरूरत
पुलिस साइबर ठगी के किसी मामले में कोई खाता फ्रीज भी करवाती है तो साइबर ठगों तक पहुंचना उसके लिए काफी मुश्किल होता है, क्यों कि जो खाता मालिक चिह्नित होता है, वास्तविकता में वो खुद धोखाधड़ी का शिकार होता है।
पिछले दिनों उदयपुर में भी पुलिस ने ऐसे ही गिरोह का खुलासा किया था, जिसमें बैंक कर्मी गिरफ्तार हुई थी। बैंक कर्मी के पास तो लोगों के खातों की डिटेल और आईडी सबकुछ आसानी से उपलब्ध होता है। ऐसे में आमजन को सावधान होने की जरूरत है और अलर्ट रहने की जरूरत है कि कहीं उनके नाम से ऐसा कोई खाता तो नहीं चल रहा है, जिसकी एक्टिविटी की उन्हें जानकारी नहीं हो।
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