नारायण सेवा संस्थान का 39वां दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह सम्पन्न
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। नारायण सेवा संस्थान की ओर से रविवार को बड़ी स्थित संस्थान परिसर में 39वां निःशुल्क निर्धन एवं दिव्यांग सामूहिक विवाह समारोह (narayan seva sansthan samuhik vivah) हुआ। यहा 51 जोड़ों ने पवित्र अग्नि को साक्षी मानते हुए फेरे लिए और एक-दूसरे का जीवनभर साथ निभाने की कसम खाई।
संस्थान अध्यक्ष प्रशान्त अग्रवाल ने अतिथियों व वर-वधुओं का स्वागत करते हुए बताया कि पिछले 21 वर्षों में संस्थान 2200 निर्धन व दिव्यांग जोड़ों की सुखद गृहस्थी बसाने में सहायक बना है। उन्होंने बताया कि इस विवाह में जो जोड़ें परिणय सूत्र में बंध रहे हैं, उनमें राजस्थान, बिहार, झारखंड़, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश व गुजरात शामिल हैं।

ढोल-नगाड़ों के साथ तोरण रस्म निभाते हुए मंच पर पहुंचे दूल्हे
परिसर में सुबह 11.15 बजे से ही ढोल-नगाड़े बजने शुरू हो गए। ढोल-नगाड़ों के साथ झूमते गाते दूल्हों ने परंपरागत तोरण की रस्म निभाई। इसके बाद बारात में झूमते-गाते दूल्हा-दुल्हन मंच पर पहुंचे। वरमाला की रस्म प्रज्ञाचक्षु करोली के केसरी नन्दन व हाथ से दिव्यांग झारखंड की उर्मिला, लसाड़िया के प्रज्ञाचक्षु प्रेमचंद मीणा व दोनों पांवों से पोलियो की शिकार सुरजा मीणा, महेंद्र कुमार व कलावती आमलिया(दोनों जन्मान्ध), भरतपुर के सत्येंद्र व झारखंड सुनिता(दोनों दिव्यांग) के साथ निदेशक वन्दना अग्रवाल व पलक के सानिध्य में आरम्भ हुई। इस दौरान पाण्डाल देर तक तालियों से गूंजता रहा।
वरमाला के बाद विवाह के लिए बने विशाल पाण्डाल में 51 वेदियों पर भीलवाड़ा के पंडित योगेंद्र आचार्य, शास्त्री उपेन्द्र चौबीसा व विकास उपाध्याय के निर्देशन में वैदिक ऋचाओं के बीच 51 जोड़ों ने साथ फेरे लिए। फेरों के बाद सभी जोड़ों ने जल ही जीवन ध्येय वाक्य के अनुसार पानी बचाने का संकल्प लिया।

अतिथियों ने उपहार स्वरूप भेंट किए गृहस्थी के सामान
समारोह में विशिष्ट अतिथि लंदन से आयीं उर्मिला कुमारी, यूएसए से आयीं डॉ प्रेमरानी सिंगल व वीना शर्मा और डूंगरपुर के केके गुप्ता और मथुरा से आयीं कुसुम गोयल ने कार्यक्रम की खूब सराहना की। अतिथियों व संस्थान की ओर से सभी नवदंपत्तियों को गैस चूल्हा, पलंग, बिस्तर, अलमारी, बर्तन, पंखा, सिलाई मशीन, पानी की टंकी संदूक आदि और दुल्हन को मंगलसूत्र, कर्णफूल, लोंग, पायल व दूल्हे को अंगूठी, परिधान, घड़ी आदि उपहार स्वरूप भेंट किए गए।
संस्थान संस्थापक पद्मश्री कैलाश मानव ने कन्यादान के इस अनुष्ठान में सहयोगियों व नवयुगलों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि देव दुर्लभ मानव जीवन हमें भागवतकृपा से जो भी उपलब्ध है, उसका उपभोग समाज के पीड़ित और वंचित वर्ग के लिए कर जीवन को सार्थक करें।


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