राजसमंद,(ARLive news)। राजसमंद के मोखमपुरा में एक प्यारी सी सुकून भरी खबर आयी है, जहां बेहद कुपोषण से जूझ रही 1 महीने की बच्ची को डॉक्टर्स की टीम ने हर पल मां बनकर जीवनदान दिया है। यह कहानी है उस 1 महीने की बच्ची राशि की, जिसकी मां की मौत हो गयी थी और पिता के पास इनता धन भी नहीं था कि बच्ची का इलाज करवा सकें, लेकिन तब बच्ची को बचाने अनंता हॉस्पिटल और डॉक्टर्स की टीम आगे आयी और बच्ची को नया जीवन मिल सका।
मोखमपुरा निवासी कैलाश गमेती की पत्नी सायरी बाई ने सरकारी अस्पताल में 6 जुलाई को एक बच्ची को जन्म दिया था। बच्ची जन्म से ही बेहद कुपोषित थी। प्रसव के बाद से ही सायरी बाई की तबियत खराब होने से वह बच्ची को दूध नहीं पिला सकी और 2 अगस्त को सायरी बाई की मौत हो गयी। मां के दूध से महरूम बच्ची 1 महीने की हो गयी थी, लेकिन उसका वजन मात्र 1 किलोग्राम ही था। बच्ची कुपोषण के चलते जीवन-मौत के बीच संघर्ष कर रही थी, जानकारी के अभाव में परिजन बच्ची को बकरी का दूध पिला रहे थे, इससे बच्ची और ज्यादा कुपोषित होती चली गयी।
पत्नी को खो चुके कैलाश गमेती बच्ची को बचाने 4 अगस्त को अनंता हॉस्पिटल पहुंचे। कैलाश गमेती की आर्थिक स्थिति खराब होने से हॉस्पिटल प्रबंधन ने उन्हें राज्य सरकार की चिरंजीवि योजना से जोड़ा और इसके बाद बच्ची का निशुल्क इलाज हुआ।
14 दिन हर पल बच्ची का ध्यान रखकर किया कुपोषण मुक्त

अनन्ता अस्पताल के एक्जक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. नितिन शर्मा ने बताया कि बच्ची जन्म से ही कुपोषण का शिकार थी और 26 दिन बाद ही बच्ची की माँ की मृत्यु हो गई। बकरी का दूध पिलाने से बच्ची की हालत ज्यादा बिगड़ गयी। परिजन बच्ची को अनन्ता अस्पताल में 4 अगस्त को लेकर पहुंचे।
हॉस्पिटल के शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. कपिल श्रीमाली और डॉ. गौरव गोयल ने बताया कि बच्ची को एनआईएसयू में रखा गया और उचित इलाज शुरू किया। 14 दिन तक पूरे स्टाफ ने बच्ची का हर पल ध्यान रखा। बच्ची जब स्वस्थ हो गयी और और उसका वजन भी बढ़ गया। इसके बाद 17 अगस्त को बच्ची को डिस्चार्ज कर दिया गया।
बाल एवं शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रसून भट्टाचार्य, कन्सल्टेंट नियोनोलॉजिस्ट डॉ. कपिल श्रीमाली, डॉ. पंकज साहू, डॉ. हिमांगी टांक, डॉ. गौतम एवं नर्सिंग स्टाफ ने मिलकर बच्ची की देखभाल की जिससे उसकी सेहत में सुधार देखा गया।


