लोकसभा अध्यक्ष ने तिरुवनंतपुरम में संसद और राज्य विधानमंडलों की लोक लेखा समितियों के अध्यक्षों के सम्मेलन का उद्घाटन किया
तिरुवनंतपुरम, एआर लाइव न्यूज। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सार्वजनिक धन के प्रभावी उपयोग और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संसद तथा राज्य विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों (पीएसी) को अपनी भूमिका और अधिक मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकारी खजाने से निकाले गए सार्वजनिक धन के एक-एक रुपये का हिसाब होना चाहिए और उसका उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए, जिसके लिए उसे आवंटित किया गया है। | Om Birla at Public Accounts Committee Conference
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तिरुवनंतपुरम में संसद और राज्य विधानमंडलों की लोक लेखा समितियों के अध्यक्षों के सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि लोक लेखा समिति संसदीय लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण संस्था है। इसका दायित्व सार्वजनिक व्यय की जांच करना, वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना और कार्यपालिका को जनता के प्रति जवाबदेह बनाना है। | Om Birla at Public Accounts Committee Conference

सार्वजनिक धन के उपयोग की जांच करना पीएसी की अहम जिम्मेदारी
ओम बिरला ने कहा कि लोक लेखा समितियों का कार्य केवल सरकारी खातों की जांच करने या लेखा परीक्षा रिपोर्टों पर विचार करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। समितियों को यह भी देखना चाहिए कि सार्वजनिक धन से निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति हुई या नहीं और जिन परिणामों के लिए राशि आवंटित की गई थी, वे वास्तव में हासिल हुए या नहीं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक व्यय का मूल्यांकन केवल आंकड़ों, बजट आवंटन और उपयोगिता प्रमाण-पत्रों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। विशेष रूप से सामाजिक कल्याण योजनाओं में यह जांचना आवश्यक है कि सरकारी खर्च का आम जनता के जीवन पर क्या वास्तविक प्रभाव पड़ा है।लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सार्वजनिक धन के व्यय का अंतिम उद्देश्य सामाजिक कल्याण और जनहित होना चाहिए।
वर्षों तक लंबित लेखा परीक्षा आपत्तियों पर जताई चिंता
लोकसभा अध्यक्ष ने लेखा परीक्षा से संबंधित आपत्तियों के 10, 15 और 20 वर्षों तक लंबित रहने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक मामलों का अनसुलझा रहना पूरी व्यवस्था की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने इन आपत्तियों के निस्तारण के लिए ठोस, व्यवस्थित और समयबद्ध कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता बताई। बिरला ने कहा कि लेखा परीक्षा संबंधी आपत्तियों और उन पर की जाने वाली कार्रवाई को अनावश्यक देरी के बिना पूरा किया जाना चाहिए।
राजनीतिक मतभेदों से ऊपर है सार्वजनिक धन की सुरक्षा
ओम बिरला ने कहा कि लोक लेखा समितियों के सदस्य भले ही अलग-अलग राजनीतिक दलों से आते हों और उनकी विचारधाराएं तथा शासन को लेकर विचार अलग-अलग हों, लेकिन सार्वजनिक धन की सुरक्षा सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोक लेखा समिति को संवाद, सहयोग, आम सहमति और सामूहिक जिम्मेदारी के साथ कार्य करना चाहिए।
समिति का उद्देश्य किसी व्यक्ति या सरकार की आलोचना करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और बर्बादी न हो। अनियमितताओं और वित्तीय लीकेज को रोकना तथा सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाए रखना लोक लेखा समितियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
विपक्ष के सदस्य को पीएसी अध्यक्ष बनाने की परंपरा लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक
लोकसभा अध्यक्ष ने लोक लेखा समिति के अध्यक्ष के रूप में विपक्ष के सदस्य को नियुक्त करने की लोकतांत्रिक परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह परंपरा भारत के संसदीय लोकतंत्र की परिपक्वता, समावेशिता और मजबूती को दर्शाती है।उन्होंने कहा कि समिति में सभी राजनीतिक दलों की भागीदारी से सार्वजनिक व्यय की जांच के दौरान विभिन्न दृष्टिकोण सामने आते हैं। इससे वित्तीय निगरानी की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और निष्पक्ष बनती है।
वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को मजबूत करने पर जोर
ओम बिरला ने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं से रचनात्मक सुझाव और ठोस परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि सम्मेलन से निकलने वाले प्रस्तावों के माध्यम से वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया जाना चाहिए। निगरानी व्यवस्था में सुधार, लेखा परीक्षा संबंधी कार्रवाई को समय पर पूरा करना और सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता बढ़ाना इस सम्मेलन के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल होना चाहिए।
सम्मेलन में कई प्रमुख गणमान्य व्यक्ति हुए शामिल
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, लोकसभा की लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष के.सी. वेणुगोपाल, केरल विधानसभा के अध्यक्ष तिरुवंचूर राधाकृष्णन और केरल विधानसभा की पीएसी के अध्यक्ष के.एन. बालगोपाल शामिल हुए और सभा को संबोधित किया। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों के अध्यक्षों, सदस्यों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन, प्रभावी लेखा परीक्षा और सरकारी जवाबदेही को मजबूत करने के लिए साझा रणनीति तैयार करना है।

