राहुल गांधी बोले- संविधान और वोटिंग अधिकारों की रक्षा करेंगे
नई दिल्ली,एआर लाइव न्यूज। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक के नेताओं ने शनिवार को नई दिल्ली में सांकेतिक जनमहाभियोग कार्यक्रम आयोजित किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम को मॉक पार्लियामेंट का स्वरूप दिया गया, जिसकी अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। करीब 3 घंटे 23 मिनट तक चले इस कार्यक्रम में कांग्रेस सहित 19 विपक्षी दलों के 215 सांसदों ने हिस्सा लिया। | INDIA Bloc public impeachment of Gyanesh Kumar
कार्यक्रम के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, जिसे उपस्थित सांसदों ने पारित किया। हालांकि, यह एक सांकेतिक राजनीतिक प्रस्ताव था, न कि संसद में पारित कोई औपचारिक महाभियोग प्रस्ताव या पद से हटाने का कानूनी आदेश। INDIA ब्लॉक ने इस कार्यक्रम के जरिए चुनाव आयोग की निष्पक्षता, SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश की है।
राहुल गांधी ने कहा- ‘बचेगा कोई नहीं’, संविधान और वोटिंग अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ पेश प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार इस पूरे मामले में अकेले नहीं हैं, बल्कि उनके जैसे कई अन्य लोग भी हैं। राहुल गांधी ने कहा, “हम आपको भागने नहीं देंगे। हम उन लोगों को भी जानते हैं, जिन्होंने भारत के लोकतंत्र और संविधान पर हमला किया है।”
राहुल गांधी ने चेतावनी देते हुए कहा कि राजनीतिक परिस्थितियां बदल रही हैं और विपक्ष के पास अब एक नया राजनीतिक हथियार है। उन्होंने कहा कि विपक्ष संविधान और आम नागरिकों के वोट देने के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ केवल पद से हटाने की कार्रवाई ही नहीं, बल्कि अदालत में देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग भी की।
खड़गे ने लगाए छह गंभीर आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने संबोधन में मुख्य चुनाव आयुक्त पर छह प्रमुख आरोप लगाए। इनमें चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कथित साजिश, SIR के माध्यम से करीब 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने, संसद की मंजूरी के बिना फॉर्म-6 में बदलाव, ECINET प्लेटफॉर्म के जरिए मतदाता सूची पर नियंत्रण, अन्य दो चुनाव आयुक्तों को महत्वपूर्ण फैसलों से अलग रखने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर काम करने के आरोप शामिल हैं।
खड़गे ने कहा कि विपक्ष को मुख्य चुनाव आयुक्त से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। उनकी मांग है कि निर्वाचन आयोग संविधान के अनुरूप निष्पक्षता से काम करे और मतदाताओं का भरोसा बनाए रखे। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं, युवाओं और कमजोर वर्गों के मतदान अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया।
विपक्ष की मांग और बीजेपी की प्रतिक्रिया
खड़गे ने दावा किया कि करीब सात महीने पहले 193 विपक्षी सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए नोटिस दिया था, लेकिन उन्हें स्वीकार नहीं किया गया। इसी के विरोध में INDIA ब्लॉक ने सांकेतिक जनमहाभियोग कार्यक्रम आयोजित किया।
वहीं, बीजेपी की ओर से इस कार्यक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष के इस कदम की आलोचना की गई। बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर संसद के बजाय अलग से मॉक पार्लियामेंट आयोजित करने को लेकर निशाना साधा।
क्या है जनमहाभियोग?
जनमहाभियोग विपक्ष की ओर से आयोजित एक सांकेतिक विरोध प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य किसी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ राजनीतिक और सार्वजनिक असहमति दर्ज कराना है। इस कार्यक्रम में प्रस्ताव पारित होने से मुख्य चुनाव आयुक्त स्वतः पद से नहीं हटते। वास्तविक पद से हटाने की प्रक्रिया संविधान और निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही पूरी होती है।

