डॉ. अरविंदर सिंह की पहल ला रही रंग, बदल रही सोच
उदयपुर,एआर लाइव न्यूज। शिक्षा का अधिकार सभी नागरिकों को है, शिक्षा सभी के लिए है, फिर चाहे बच्चा हो, बुजुर्ग हो, जवान हो या दिव्यांग। लेकिन हमारी सोसायटी में आज भी कई बड़े विश्वविद्यालयों सहित उच्च शिक्षा शैक्षणिक संस्थान ऐसे हैं, जहां दिव्यांग शिक्षा से वंचित है, कारण विश्वविद्यालयों सहित शैक्षणिक संस्थानों में दिव्यांग सुगम्य संसाधनों की अनुलब्धता। कहीं क्लासरूम ऊपर मंजिलों में हैं और लिफ्ट नहीं है, रैम्प नहीं है। पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, दिव्यांग सुगम्य टॉयलेट्स नहीं है। | Dr Arvinder Singh Udaipur
ऐसे ही कुछ हालात उदयपुर संभाग की सबसे बड़ी सरकारी यूनिवर्सिटी मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में दिखायी दिए। जब संस्था ने विश्वविद्यालय की सुगम्यता और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति जानने के लिए सूचना के अधिकार आरटीआई के तहत 13 सूचना आवेदन प्रस्तुत किए।
परिसर की सुगम्यता, कक्षाओं और पुस्तकालय तक पहुंच, दिव्यांग विद्यार्थियों के पंजीकरण तथा आवश्यक सुविधाओं पर केंद्रित रहे। प्राप्त सूचनाओं के आधार पर संपूर्ण परिसर को दिव्यांग-अनुकूल बनाने के लिए सुधार की आवश्यकता नजर आयी।
इस पहल का उद्देश्य किसी संस्था की आलोचना नहीं
पैनेशिया डिसेबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट्स के संस्थापक-अध्यक्ष एवं अर्थ डायग्नोस्टिक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अरविंदर सिंह ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य किसी संस्था की आलोचना नहीं, बल्कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के अनुरूप विश्वविद्यालय को और अधिक समावेशी बनाने में सहयोग करना है।
यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने राजीव रतूड़ी बनाम भारत संघ 2024 में स्पष्ट किया कि सुगम्यता केवल सुविधा नहीं, बल्कि समानता, गरिमा और स्वतंत्र जीवन से जुड़ा अधिकार है।
इसी प्रकार ओमकार बनाम भारत संघ 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च शिक्षा के संदर्भ में कहा कि दिव्यांगता का प्रतिशत मात्र किसी विद्यार्थी को शिक्षा से वंचित करने का आधार नहीं हो सकता। संस्थानों को व्यक्ति की वास्तविक क्षमता, उचित समायोजन और समान अवसर के सिद्धांत को ध्यान में रखना चाहिए।
यूनिवर्सिटी कुलपति ने कमियों में सुधार का भरोसा दिलाया
डॉ. सिंह ने दिव्यांगता, अधिकार, आत्मनिर्भरता और समावेशन से संबंधित अपनी छह पुस्तकें विश्वविद्यालय पुस्तकालय को भेंट कीं, ताकि विद्यार्थियों और शिक्षकों में जागरूकता बढ़ सके। साथ ही दिव्यांग सुगम्यता के प्रति यूनिवर्सिटी का ध्यान दिलाया। इस पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो कैलाश डागा ने भी आवश्यक व्यवस्थाओं और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के अनुपालन की दिशा में उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है

