उदयपुर,एआर लाइव न्यूज। हिंदुस्तान जिंक की सखी माइक्रोएंटरप्राइज पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बन रही है। पहल से वर्तमान में 426 महिलाएं जुड़ी हैं और वित्त वर्ष 2026 में उनकी सामूहिक आय 23 लाख रुपये से बढ़कर 32.84 लाख रुपये हो गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 43 प्रतिशत की वृद्धि है। | Hindustan Zinc Sakhi Microenterprise
इस पहल से जुड़ी मंजू देवी आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी हैं। वर्ष 2019 में पति के निधन के बाद दो बच्चों की जिम्मेदारी संभालने वाली मंजू पहले मौसमी कृषि कार्य और मजदूरी पर निर्भर थीं। अब सखी परियोजना के तहत आधुनिक प्रोसेसिंग मशीनों का संचालन कर वे लगभग 8 हजार रुपये प्रतिमाह की नियमित आय अर्जित कर रही हैं।

सखी माइक्रोएंटरप्राइज के तहत राजस्थान और उत्तराखंड में 14 उत्पादन इकाइयां संचालित हैं। ‘दायची’ ब्रांड के अंतर्गत अचार, शहद, मसाले, दालें, नमकीन, तेल और घी जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जबकि ‘उपाया’ परिधान उत्पादों पर केंद्रित है। अब क्रोशिया, मूंगफली तेल और मिलेट आधारित उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं।
दरीबा में नई मिलेट उत्पादन इकाई स्थापित की गई है, जिससे महिलाओं को रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर मिलेंगे।
सखी उत्पादों को अब स्थानीय बाजारों से आगे राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल रही है। ले मार्शे के साथ साझेदारी के तहत उत्पाद दिल्ली के तीन स्टोर्स में उपलब्ध हैं। इसके अलावा ब्लिंकिट, अमेजन, फ्लिपकार्ट, ONDC और ‘हार्ट्स विद फिंगर्स’ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए भी बिक्री हो रही है।
यह पहल महिला सशक्तिकरण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय कौशल एवं संसाधनों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

