उदयपुर, एआर लाइव न्यूज। उदयपुर के भट्टियानी चौहट्टा स्थित करीब 450 वर्ष पुराने ऐतिहासिक महालक्ष्मी मंदिर में माता महालक्ष्मी का प्राकट्योत्सव (पाटोत्सव) 3 अक्टूबर को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर मंदिर में दिनभर यज्ञ, हवन, पूजन और धार्मिक अनुष्ठान होंगे। शाम को सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाएगा, जबकि रात 12 बजे माता महालक्ष्मी की विशेष महाआरती होगी। | Mahalakshmi mandira Patotsav Udaipur
श्रीमाली जाति संपत्ति व्यवस्था ट्रस्ट के अध्यक्ष भगवती लाल दाशोत्तर ने बताया कि प्राकट्योत्सव की शुरुआत सुबह 4 बजे माता महालक्ष्मी के विशेष अभिषेक से होगी। इस दौरान पंचामृत, गंगाजल, इत्र, गंधोदक और शुद्ध जल से माता का विधिवत स्नान कराया जाएगा। | Mahalakshmi mandira Patotsav Udaipur
अभिषेक के बाद माता महालक्ष्मी को सोने-चांदी के विशेष आभूषण और नई पोशाक धारण कराई जाएगी। इसके बाद षोडशोपचार विधि से पूजा-अर्चना की जाएगी।
पांच जोड़े देंगे हवन में आहुतियां
ट्रस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष जयप्रकाश श्रीमाली ने बताया कि सुबह 10 बजे से हवन का आयोजन होगा। इसमें पांच जोड़े आहुतियां देंगे। आचार्य मनीष श्रीमाली अपने पांच सहयोगियों के साथ हवन संपन्न कराएंगे। शाम 4:30 बजे हवन की पूर्णाहुति होगी। जतिन श्रीमाली श्रीमाली ने बताया कि समाज के गणमान्य सदस्य मौजूद रहेंगे। पूर्णाहुति के बाद मंदिर परिसर में सुंदरकांड का पाठ किया जाएगा।
रात 12 बजे होगी माता महालक्ष्मी की महाआरती
प्राकट्योत्सव का मुख्य धार्मिक आयोजन रात 12 बजे होगा, जब माता महालक्ष्मी की भव्य महाआरती की जाएगी। इस अवसर पर माता का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। महाआरती के दौरान श्रद्धालुओं को माता के दिव्य स्वरूप के दर्शन होंगे। इसके बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण किया जाएगा।
450 वर्ष पुराना है महालक्ष्मी मंदिर
भट्टियानी चौहट्टा स्थित महालक्ष्मी मंदिर उदयपुर के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों में शामिल है। मंदिर करीब 450 वर्ष पुराना बताया जाता है। मान्यता के अनुसार, इसका निर्माण तत्कालीन महाराणा जगत सिंह के शासनकाल में हुआ था।
मंदिर में स्थापित माता महालक्ष्मी की 31 इंच ऊंची सफेद पत्थर की प्रतिमा अपनी विशिष्टता के लिए जानी जाती है। सामान्यतः देवी लक्ष्मी को कमल पर विराजमान स्वरूप में दर्शाया जाता है, लेकिन इस मंदिर में माता महालक्ष्मी को गजराज पर विराजमान स्वरूप में पूजा जाता है।
मान्यता है कि माता की यह प्रतिमा भीनमाल से लाई गई थी। श्रीमाली समाज में यह मंदिर माता महालक्ष्मी की प्रमुख कुलदेवी के पवित्र धाम के रूप में विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
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