जयपुर, एआर लाइव न्यूज। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की है। |Ashok Gehlot Gyanesh Kumar जयपुर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में गहलोत ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग केंद्र सरकार के एक विभाग की तरह काम कर रहा है।
गहलोत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब निर्वाचन आयोग के दो चुनाव आयुक्तों द्वारा आयोग के कुछ फैसलों पर आपत्ति जताए जाने से संबंधित रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। निर्वाचन आयोग ने इन मतभेदों को बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में होने वाली सामान्य आंतरिक deliberation बताया है।
गहलोत बोले- CEC को तत्काल हटाया जाना चाहिए
अशोक गहलोत ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में भारत के प्रधान न्यायाधीश को शामिल नहीं किया गया।
गहलोत ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर देश में लोगों का विश्वास कमजोर हो रहा है। उन्होंने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े इन मुद्दों को समझना चाहिए। गहलोत ने न्यायपालिका और केंद्रीय जांच एजेंसियों को लेकर भी अपनी राजनीतिक राय व्यक्त की और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी किया जिक्र
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि यदि निर्वाचन आयोग के दो सदस्यों ने आयोग के फैसलों को लेकर आपत्ति जताई है, तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने इसी आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल हटाने की मांग की। |Ashok Gehlot Gyanesh Kumar
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने 23 सितंबर को कहा कि आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया के दौरान मतभेद होना किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था के सामान्य कामकाज का हिस्सा है और आयोग के महत्वपूर्ण फैसले पूर्ण आयोग की मंजूरी से लिए गए हैं।
राजस्थान निकाय चुनावों पर भी गहलोत के आरोप
अशोक गहलोत ने राजस्थान में हाल में हुए नगरीय निकाय चुनावों को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। गहलोत ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान पुलिस और प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल कर पार्षदों पर दबाव बनाया गया।
उन्होंने दावा किया कि कुछ पार्षदों और उनके परिवारों को धमकाया गया तथा पुराने मामलों को खोलने और मकान तोड़ने या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई के नोटिस दिए गए।
गहलोत ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश पुलिस के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया। इन आरोपों को लेकर सत्ता पक्ष का पक्ष भी महत्वपूर्ण है; उपलब्ध रिपोर्टों में भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों का खंडन किया है।
परिसीमन और वोट शेयर पर भी सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने राजस्थान के निकाय चुनावों से पहले हुए वार्ड परिसीमन पर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि परिसीमन से सत्तारूढ़ भाजपा को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई।
राजस्थान के 309 शहरी निकायों के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भाजपा को 35.18 प्रतिशत और कांग्रेस को 34.24 प्रतिशत वोट मिले थे, यानी दोनों दलों के बीच वोट शेयर का अंतर 0.94 प्रतिशत अंक रहा।
इंडियन एक्सप्रेस की एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में जयपुर, जोधपुर और कोटा के वार्ड परिसीमन तथा चुनावी आंकड़ों की समीक्षा की गई और कांग्रेस की ओर से लगाए गए परिसीमन संबंधी आरोपों का भी उल्लेख किया गया है।
25 सितंबर को होने वाले प्रमुख निकाय चुनावों पर नजर
जयपुर, जोधपुर और कोटा सहित कुछ शहरी निकायों में प्रमुख पदों के चुनाव को लेकर गहलोत ने 25 सितंबर का इंतजार करने की बात कही।
निकाय चुनावों के दौरान कांग्रेस ने पार्षदों पर दबाव, पैसे के इस्तेमाल और कथित हॉर्स ट्रेडिंग जैसे आरोप लगाए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा ने कई नगर निकायों में अध्यक्ष और महापौर पदों पर बढ़त बनाई है।
गहलोत ने आरोप लगाया कि इन चुनावों में पैसे बांटने, पार्षदों को प्रभावित करने और उनके परिवारों पर दबाव बनाने जैसे हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। ये आरोप राजनीतिक दावों के रूप में हैं और संबंधित पक्षों के जवाब को भी खबर के अपडेट में शामिल किया जाना चाहिए।
