सवाल – क्या चुनाव ड्यूटी में तैनात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए उनके अपने नगरीय निकाय में मतदान का कोई वैकल्पिक प्रबंध नहीं होना चाहिए?
- पहली बार प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में एक साथ चुनाव के चलते बनी यह स्थिति
लकी जैन, उदयपुर,एआर लाइव न्यूज। देश में लोकसभा, विधानसभा या नगरीय निकाय चुनाव—हर पात्र नागरिक के लिए मतदान लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी का महत्वपूर्ण अधिकार है। लेकिन राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव 2026 में चुनाव ड्यूटी पर तैनात हजारों पुलिसकर्मी, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य सरकारी कर्मचारी अपने गृह जिले के निकाय चुनाव में मतदान नहीं कर पा रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के लिए डाक मतपत्र की व्यवस्था नहीं होना बताई जा रही है। | Rajasthan Nikay Chunav 2026 postal-ballot
राज्य निर्वाचन आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार राजस्थान में इस बार 309 नगरीय निकायों में चुनाव दो चरणों में 9 सितंबर और 11 सितंबर 2026 को कराए जा रहे हैं। इनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगर पालिकाएं शामिल हैं। चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए प्रदेश में करीब 1,15,255 कार्मिक लगाए गए हैं, जबकि सुरक्षा व्यवस्था के लिए 98,790 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
गृह नगरीय निकाय से बाहर पदस्थ सरकारी कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी बनी मतदान में बाधा
इन चुनाव कर्मचारियों में बड़ी संख्या ऐसे पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों-कर्मचारियों की है, जिनकी पोस्टिंग उनके होम डिस्ट्रिक्ट से अलग जिले में है। चुनाव ड्यूटी के कारण वे अपने गृह जिले में स्थित नगर पालिका, नगर परिषद या नगर निगम में मतदान करने नहीं पहुंच पा रहे हैं।
ऐसे कर्मचारियों के लिए यदि डाक मतपत्र या कोई वैकल्पिक मतदान व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, तो वे अपने स्थानीय निकाय के चुनाव में मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग की जनसंपर्क अधिकारी ने भी पुष्टि की है कि नगरीय निकाय चुनाव 2026 में चुनाव ड्यूटी में तैनात सरकारी कर्मचारियों के लिए डाक मतपत्र की व्यवस्था नहीं की गई है।
सभी 309 निकायों में एक साथ चुनाव से बदली स्थिति
जानकारी के अनुसार पहले नगरीय निकाय चुनाव अलग-अलग वर्षों में होते रहे हैं। ऐसे में दूसरे जिले में पदस्थ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी अपने गृह जिले/नगरीय निकाय में चुनाव होने पर मतदान करने पहुंच पाते थे, क्योंकि जिस जिले में वे कार्यरत होते थे, वहां उसी समय निकाय चुनाव नहीं होने के कारण उनकी चुनाव ड्यूटी नहीं लगती थी।
इस बार स्थिति अलग है। राजस्थान के सभी 309 नगरीय निकायों में पहली बार एक साथ चुनाव कराए जा रहे हैं। ऐसे में गृह जिले से बाहर पदस्थ हजारों सरकारी कर्मचारी चुनाव ड्यूटी के कारण अपने निकाय में मतदान नहीं कर पा रहे हैं।
चुनाव कराने वाले ही अपने पार्षद का चुनाव नहीं कर पा रहे
इस स्थिति ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है—क्या चुनाव ड्यूटी में तैनात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए उनके अपने नगरीय निकाय में मतदान का कोई वैकल्पिक प्रबंध नहीं होना चाहिए?
चुनाव प्रक्रिया को सफल बनाने में हजारों सरकारी कर्मचारी और पुलिसकर्मी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में जब सभी नगरीय निकायों के चुनाव एक साथ कराए जा रहे हैं, तब राज्य निर्वाचन आयोग के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती भी है कि चुनाव ड्यूटी के कारण कोई पात्र मतदाता अपने स्थानीय निकाय के चुनाव में मतदान से वंचित न रह जाए।
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