7 अगस्त को हुई तीनों एपिलेप्सी सर्जरी सफल, फॉलोअप में मरीज रहे दौरे से मुक्त
उदयपुर, एआर लाइव न्यूज। जटिल और दवाओं से नियंत्रित नहीं होने वाली मिर्गी के उपचार में गीतांजली हॉस्पिटल, उदयपुर ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल में 7 अगस्त को तीन जटिल एवं अनियंत्रित मिर्गी के मरीजों की एपिलेप्सी सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। सर्जरी के बाद तीनों मरीजों की स्थिति संतोषजनक रही और फॉलोअप में वे दौरे से मुक्त पाए गए। किसी भी मरीज में लकवा या बोलने में कठिनाई जैसी महत्वपूर्ण जटिलता सामने नहीं आई। | Epilepsy Surgeries at Geetanjali Hospital Udaipur
तीनों मरीजों की सर्जरी को सफल बनाने में अस्पताल की मल्टीडिसिप्लिनरी एपिलेप्सी टीम, उन्नत ब्रेन मैपिंग और आधुनिक न्यूरोसर्जिकल तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जटिल मिर्गी के मामलों में सर्जरी से पहले यह पता लगाना बेहद जरूरी होता है कि मस्तिष्क के किस हिस्से से दौरे शुरू हो रहे हैं और वह हिस्सा बोलने, याददाश्त तथा हाथ-पैरों की गतिविधियों जैसे महत्वपूर्ण कार्यों से कितना जुड़ा है।
3टी एमआरआई और वीडियो ईईजी से हुई सटीक जांच
गीतांजली हॉस्पिटल में मरीजों के विस्तृत मूल्यांकन के लिए 3टी एमआरआई, वीडियो ईईजी, फंक्शनल एमआरआई और डिफ्यूजन टेंसर इमेजिंग (डीटीआई) जैसी आधुनिक जांच सुविधाओं का उपयोग किया जाता है। इन जांचों के आधार पर सीजर फोकस की पहचान और महत्वपूर्ण ब्रेन एरिया की मैपिंग कर सर्जरी की रणनीति तैयार की गई।
सर्जरी के दौरान न्यूरोनैविगेशन और इंट्राऑपरेटिव इलेक्ट्रोकॉर्टिकोग्राफी (ईसीओजी) जैसी आधुनिक तकनीकों की सहायता ली गई। इन तकनीकों का उद्देश्य प्रभावित हिस्से तक सटीक पहुंच बनाने के साथ मस्तिष्क के महत्वपूर्ण कार्यात्मक क्षेत्रों को सुरक्षित रखना रहा।
विशेषज्ञ टीम ने संभाला जटिल ऑपरेशन
तीनों एपिलेप्सी सर्जरी में न्यूरोसर्जिकल टीम में डॉ. गोविंद मंगल, डॉ. गौरव गुप्ता और डॉ. आदित्य गुप्ता शामिल रहे। न्यूरोएनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. निलेश भटनागर ने किया।
पूरे उपचार एवं मरीजों के मूल्यांकन का नेतृत्व वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट, एपिलेप्टोलॉजिस्ट एवं न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अनीस जुकरवाला के मार्गदर्शन में किया गया। डॉ. विनोद मेहता और डॉ. निशांत असवानी ने भी मरीजों के समग्र प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दवाओं से दौरे नियंत्रित नहीं हों तो विशेषज्ञ जांच जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि दो उपयुक्त एंटी-सीजर दवाओं के बावजूद मरीज को लगातार दौरे आते रहते हैं, तो इसे ड्रग-रेजिस्टेंट एपिलेप्सी माना जा सकता है। ऐसे मरीजों में केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय विशेषज्ञ एपिलेप्सी सेंटर में विस्तृत मूल्यांकन जरूरी होता है।
हर मरीज के लिए सर्जरी उपयुक्त नहीं होती, लेकिन सही मरीज का चयन, अत्याधुनिक जांच, ब्रेन मैपिंग और आधुनिक न्यूरोसर्जिकल तकनीकों के समन्वय से उपचार की संभावनाओं को बेहतर किया जा सकता है।
गीतांजली हॉस्पिटल में एक ही समय में उपलब्ध उन्नत डायग्नोस्टिक सुविधाओं, एपिलेप्सी विशेषज्ञों और न्यूरोसर्जिकल टीम के समन्वित प्रयास से तीन जटिल मरीजों की सफल सर्जरी इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

