पार्टी ने अंतिम समय तक भी जारी नहीं की प्रत्याशियों की अधिकृत सूची
उदयपुर, एआर लाइव न्यूज। उदयपुर नगर निगम चुनाव 2026 के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया सोमवार दोपहर 3 बजे समाप्त हो गई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नामांकन प्रक्रिया के अंतिम समय तक भी अपने पार्षद प्रत्याशियों की अधिकृत सूची सार्वजनिक नहीं की। इसका असर सोमवार को उदयपुर में भाजपा की नामांकन रैली में साफ नजर आया। पार्टी के अधिकांश दावेदारों को व्यक्तिगत रूप से फोन के माध्यम से टिकट मिलने की जानकारी दे दी गई थी और वे उत्साह के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंचे। | nagar nigam election udaipur 2026 bjp Candidate Nomination rally | udaipur nagar nigam election bjp Nomination rally
आज सुबह टाउनहॉल से भाजपा की नामांकन रैली शुरू हुई। कई चहरों पर खुशी का माहौल नजर आया तो कई चेहरे ऐसे थे जिनकी बॉडी लैंग्वेज बता रही थी कि वे इस नामांकन रैली में शामिल जरूर हुए है, लेकिन आधे अधूरे मन से। इनमें वो दावेदार भी शामिल थे जिनके टिकट काट दिए गए। टिकट वितरण से बनी परिस्थितियों को देखते हुए चुनाव में दौरान कुछ वार्डाें में भाजपा में भीतरघात होने की संभावना है। | udaipur nagar nigam election bjp Nomination rally | Udaipur BJP nomination rally 2026
महिला कार्यकर्ताओं का हक बनता, वहां नेताओं ने पत्नियों को टिकट दिलवा दिया
भाजपा की नामांकन रैली के दौरान शहर के महिला आरक्षित वार्डों में टिकट वितरण को लेकर भी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा रही। कार्यकर्ताओं का कहना था कि कुछ ऐसे वार्डों में लंबे समय से पार्टी के लिए सक्रिय महिला कार्यकर्ता मौजूद थीं, जिन्हें टिकट का मजबूत दावेदार माना जा रहा था।
इन कार्यकर्ताओं का आरोप था कि संगठन के कुछ करीबी नेताओं ने अपनी पत्नियों के नाम आगे कर उन्हें टिकट दिलवाया। कार्यकर्ताओं का तर्क था कि वार्डों में वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ता मजबूत दावेदार हों, वहां उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी।
‘यस मैन’ बने रहने वालों में से कई लोग टिकट पाने में सफल ?
नामांकन रैली में कई कार्यकर्ताओं और दावेदारों के बीच इस बात की भी चर्चा रही कि कुछ वार्डों में प्रत्याशी तय करते समय मजबूत दावेदारी के बजाय ‘यस मैन’ की राजनीति को तवज्जो दी गई।
कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा रही कि टिकट वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेताओं के करीबी (यस मैन) कई लोग टिकट पाने में सफल हो गए। वहीं, कुछ कार्यकर्ताओं का मानना था कि कई वार्डों में जमीनी पकड़, लंबे समय से पार्टी के लिए काम और चुनाव जीतने की क्षमता जैसे पहलुओं की तुलना में नेताओं के प्रति नजदीकी को अधिक महत्व मिला।
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