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Home Udaipur

शिव प्रकट हुए, बाबा बैद्यनाथ की स्थापना के साथ शिव कथा का विराम

Lucky Jain by Lucky Jain
August 9, 2026
Reading Time: 1 min read
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प्रशांत अग्रवाल ने दिया सेवा और परोपकार का संदेश

उदयपुर, एआर लाइव न्यूज। सावन मास के पावन अवसर पर नारायण सेवा संस्थान में आयोजित शिव कथा का भावपूर्ण समापन हुआ। कथा के विराम दिवस पर संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने भगवान शिव की भक्ति, तपस्या, समर्पण और लोककल्याण से जुड़े प्रसंगों का मार्मिक वाचन किया। उन्होंने रावण की कठोर तपस्या, भगवान शिव के प्रकट होने और बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना से जुड़े प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ अहंकार से दूर रहने का संदेश दिया। | narayan seva sansthan shiv-katha-samapan prashant-agarwal-udaipur | udaipur news

रावण की तपस्या से प्रसन्न होकर प्रकट हुए भगवान शिव

प्रशांत अग्रवाल ने कथा में बताया कि सच्ची और अटूट भक्ति में इतनी शक्ति होती है कि भगवान अपने भक्त के सामने प्रकट हो जाते हैं। रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उसके नौ कटे सिरों को पुनः जोड़कर उसे आरोग्य प्रदान किया।

कथा के अनुसार, रावण ने भगवान शिव से कैलाश पर्वत को लंका ले जाने का आग्रह किया। भगवान शिव ने उसे दिव्य शिवलिंग प्रदान किया। देवताओं को चिंता हुई कि यदि यह शिवलिंग लंका पहुंच गया तो रावण का अहंकार और अधिक बढ़ सकता है। इसके बाद ऐसी परिस्थितियां बनीं कि शिवलिंग पृथ्वी पर ही स्थापित हो गया।

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ऐसे हुई बाबा बैद्यनाथ धाम की स्थापना

प्रशांत अग्रवाल ने कथा के माध्यम से बताया कि लंका ले जाते समय रास्ते में रावण को लघुशंका के लिए जाना पड़ा। उसने वहां मौजूद एक बालक को शिवलिंग सौंपकर कुछ देर संभालने के लिए कहा। काफी समय बीतने पर बालक ने शिवलिंग को पृथ्वी पर स्थापित कर दिया।

वापस लौटने के बाद रावण ने शिवलिंग को उठाने का काफी प्रयास किया, लेकिन वह उसे हिला तक नहीं सका। इसी प्रसंग को बाबा बैद्यनाथ धाम की स्थापना की कथा से जोड़ा जाता है।

“भगवान हमारी प्रार्थना से भी बेहतर योजना बनाते हैं”

कथा के दौरान प्रशांत अग्रवाल ने कहा, “कभी-कभी भगवान हमारी प्रार्थना को अस्वीकार नहीं करते, बल्कि हमारे लिए उससे भी बेहतर योजना बनाते हैं।” उन्होंने कहा कि भगवान शिव केवल शरीर के वैद्य नहीं, बल्कि आत्मा के भी वैद्य हैं। शिव की आराधना मनुष्य को भीतर से स्वस्थ, शांत, संयमित और करुणामय बनने की प्रेरणा देती है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि भक्ति का वास्तविक अर्थ केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा, त्याग, करुणा और परोपकार के माध्यम से मानवता की सेवा करना भी शिव भक्ति का ही स्वरूप है।

भीमाशंकर और भक्त नंदनार के प्रसंगों से दिया समानता का संदेश

शिव कथा के दौरान भीमाशंकर महादेव और भक्त नंदनार के प्रसंगों का भी वाचन किया गया। इन प्रसंगों के माध्यम से भक्ति में समर्पण, विश्वास, समानता और सामाजिक सद्भाव के महत्व को रेखांकित किया गया।

कथा के दौरान संगीत और भक्ति का माहौल बना रहा। दिव्यांगजन और उनके परिवारजनों ने उत्साहपूर्वक भक्ति गीतों पर नृत्य किया। परिसर में लगातार “हर-हर महादेव” के जयकारे गूंजते रहे और श्रद्धालु शिव भक्ति में सराबोर नजर आए।

“अपने लिए नहीं, औरों के लिए जीने” का दिलाया संकल्प

शिव कथा के समापन अवसर पर प्रशांत अग्रवाल ने विश्व मंगल, शांति और मानव कल्याण की कामना की। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को “अपने लिए नहीं, औरों के लिए जीने” का संकल्प दिलाया।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव का जीवन त्याग, करुणा, समर्पण और लोककल्याण की प्रेरणा देता है। ऐसे में शिव भक्ति का वास्तविक उद्देश्य भी मानव सेवा और जरूरतमंदों के प्रति संवेदना विकसित करना होना चाहिए।

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