क्या इस जमीन धोखाधड़ी मामले में सवीना के तत्कालीन एसएचओ, यूडीए के अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, क्या तय होगी जिम्मेदारी.?
उदयपुर,एआर लाइव न्यूज। उदयपुर शहर के सवीना थाना क्षेत्र के डाकन कोटड़ा स्थित राम्या रिसोर्ट से जुड़े कथित भूखंड घोटाला सिर्फ एक जमीन विवाद नहीं रहा है, बल्कि इसने पुलिस, उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) और कथित भूमाफिया के गठजोड़ और भ्रष्ट तंत्र का भी खुलासा कर दिया है। किस तरह कमजोर लोगों की जमीन पर कब्जा किया जाता हैं और मजबूर किया जाता है कि वे अपनी जमीनें औने-पौने दाम में कथित भूमाफिया को बेच दें। अगर व्यक्ति न माने तो डमी (फर्जी) खातेदार खड़ा कर उसकी जमीन हथिया ली जाती है। | Udaipur Ramya Resort Land Scam
इस पूरे नेक्सस में भूमाफिया को संरक्षण भी कहीं न कहीं पुलिस और यूडीए के अधिकारियों द्वारा दिया जाता है। पीड़ित थाने पहुंचते हैं तो पुलिस भूमाफिया के पक्ष में खड़ी दिखती है, पीड़ित यूडीए पहुंचता है तो कागजों में उलझा दिया जाता है। राम्या रिसोर्ट से जुड़े कथित भूखंड घोटाले में भी कुछ ऐसा ही हुआ है।
तबादले नहीं होते तो पीड़ित अभी भी न्याय की गुहार लगाते हुए कहीं धक्के ही खा रहे होते.?
यह घोटाला तब खुला और मामले में नया मोड़ तब आया जब उदयपुर पुलिस अधीक्षक (एसपी) और एसएचओ के तबादले हुए। नयी एसपी के आने पर पीड़ित न्याय की गुहार लगाने एसपी डॉ. अमृता दुहन के पास पहुंचे।
एसपी डॉ. अमृता दुहन के निर्देश पर सवीना थानाधिकारी दलबीर सिंह ने जांच शुरू की तो कथित फर्जी दस्तावेज, डमी खातेदारों और नामांतरण से जुड़े कई पहलू सामने आए हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है कथित घोटाले की पर्तें खुल रही हैं। पूरे घटनाक्रम ने तत्कालीन पुलिस और यूडीए के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं, भ्रष्ट तंत्र का हिस्सा बने पूर्व अधिकारियों की कभी क्या कोई जिम्मेदारी तय होगी?
इस मामले के “तीन पॉइंट्स” सबसे अधिक चर्चा में हैं
- फर्जी दस्तावेज सामने आने के बावजूद यूडीए विवादित भूखंडों का नामांतरण रद्द क्यों नहीं कर रहा?
- वास्तविक पीड़ितों की रिपोर्ट दर्ज करने में देरी क्यों हुई और आरोपी पक्ष की एफआईआर पहले कैसे दर्ज हो गई?
- यदि राम्या रिसोर्ट का बड़ा हिस्सा कृषि भूमि पर बिना व्यावसायिक परिवर्तन (कन्वर्जन) के संचालित हो रहा है तो यूडीए कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा?
पॉइंट-1 : भूमाफिया और यूडीए का गठजोड़-आरोपी ने ही स्वीकारा फर्जी दस्तावेजों पर नामांतरण हुआ, फिर भी यूडीए नामांतरण रद्द नहीं कर रहा
मामले में एक रोचक तथ्य यह भी है कि आरोपी पल खमेसरा ने सवीना थाने में 8 अगस्त 2025 को जो एफआईआर दर्ज करायी थी उसमें यह स्वीकार किया है कि उसने जो भूखंड खरीदे थे वे उसे फर्जी खातेदारों के जरिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचे गए थे। मतलब उसकी मां मीना खमेसरा के नाम हुए भूखंड नामांतरण फर्जी हैं।
वहीं पीड़ित मूल खातेदार बार-बार यूडीए में एप्लीकेशन देकर संबंधित भूखंडों का नामांतरण रद्द करने की मांग कर रहे हैं। पीड़ित कह रहे हैं कि मूल खातेदार हम हैं, धोखाधड़ी हमारे साथ हुई है और यह बात आरोपी पक्ष के पल पुत्र राजेश खमेसरा द्वारा दर्ज करायी एफआईआर से भी स्पष्ट हो गयी है। इसके बावजूद यूडीए मीना खमेसरा पत्नी राजेश खमेसरा के नाम हुए भूखंड के नामांतरण रद्द नहीं कर रहा है। यूडीए के रिकॉर्ड में संबंधित भूमि अभी भी मीना खमेसरा के नाम दर्ज है। मतलब यूडीए अभी भी पीड़ित मूल खातेदारों के पक्ष में जायज कार्यवाही करने के बजाए कथित भूमाफिया के पक्ष में ही खड़ा नजर आ रहा है।
पॉइंट-2ः भूमाफिया और पुलिस का गठजोड़–पुलिस ने पीड़ितों की एफआईआर पहले क्यों नहीं की?
मामला मरे हुए आदमी का डमी खातेदार खड़ा कर फर्जी मुख्तारनामे का भी था, अगर पुलिस पीड़ितों की रिपोर्ट पर उसी समय एफआईआर दर्ज करती तो इसमें मीना खमेसरा की गिरफ्तारी की पूरी संभावना थी। क्यों कि इन्हीं के नाम पर फर्जी दस्तावेजों से नामांतरण हुआ था, मुख्य लाभार्थी मीना खमेसरा थीं।
भुवाणा निवासी मंजू कुंवर राठौड़ पत्नी स्वर्गीय प्रेम सिंह राजपूत सहित अन्य पीड़ित वर्ष 2023 से थाने के चक्कर काट मदद की गुहार लगा रहे थे। मंजू कुंवर मई 2025 में एसपी ऑफिस पेश हुई। पीड़ित मंजू ने तत्कालीन एसपी को दिए परिवाद में राम्या रिसोर्ट के संचालक खमेसरा परिवार के राजकुमार खमेसरा, मीना खमेसरा, दलाल, डमी कैंडीडेट और गवाहों सहित अन्य के खिलाफ भूखंड धोखाधड़ी की नामजद रिपोर्ट दी। पीड़िता का परिवाद जरिए एसपी ऑफिस 29 मई 2025 को सवीना थाने पहुंचा। सवीना पुलिस ने परिवाद रिसीव तो किया, लेकिन उस वक्त मामला दर्ज नहीं किया।
मंजू राठौड़ पुलिस से कहती रहीं कि उनके पति की मौत मार्च 2019 में हो गयी थी, तो 2024 के बाद उनके पति भूखंड की पावर ऑफ अटॉर्नी किसी और के नाम कैसे कर सकते हैं। लेकिन तत्कालीन एसएचओ ने उस वक्त मामला दर्ज नहीं किया।
इसी तरह दरीबा माइंस निवासी 75 वर्षीय मीठालाल वैष्णव ने भी पल पुत्र राजेश खमेसरा, पल की मां मीना खमेसरा, पार्थ पुत्र राजकुमार खमेसरा सहित भूखंड धोखाधड़ी करने वाले अन्य लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दी थी। इनके साथ भी वही हुआ, मीठालाल की जगह फर्जी खातेदार को खड़ा कर आरोपियों ने फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए इनके भूखंड बेचे और नामांतरण मीना खमेसरा के नाम हुआ। मीठालाल वैष्णव ने भी जब सवीना थाने में रिपोर्ट दी तो उनकी एफआईआर भी उस समय दर्ज नहीं की गयी।
क्या आरोपी को गिरफ्तारी का डर सताया, इसलिए पुलिस ने असल पीड़ित से पहले आरोपी की FIR दर्ज कर उसे भी पीड़ित बनाया?
जानकारी के अनुसार पीड़ितों की रिपोर्ट पर एफआईआर दर्ज कर जांच का दबाव थाना पुलिस पर बढ़ रहा था। इसके चलते आरोपी पक्ष को गिरफ्तारी का डर सताने लगा। संभावना है कि गिरफ्तारी से बचाने के लिए सवीना पुलिस ने मुख्य आरोपी पल खमेसरा से तत्काल एक रिपोर्ट लेकर 8 अगस्त 2025 को एफआईआर दर्ज भी कर ली, जिसमें उन दलालों, गवाहों और फर्जी खातेदारों को नामजद किया, जिनके जरिए भूखंड पल खमेसरा की मां मीना खमेसरा के नाम पर दर्ज किए गए थे। पल खमेसरा ने रिपोर्ट में कहा इन लोगों ने फर्जी दस्तावेज दिखाकर उन्हें जमीन बेच उनके साथ धोखाधड़ी की है। इस तरह असल पीड़ितों की रिपोर्ट के मुख्य आरोपी पुलिस द्वारा 8 अगस्त 2025 को पीड़ित बना दिए गए।
खमेसरा की एफआईआर के करीब 1 माह बाद जब असल पीड़ित समझौते को तैयार नहीं हुए और जांच का दबाव बढ़ने लगा तो मजबूरी में असल पीड़ितों की तरफ से भी सितंबर 2025 में एफआईआर दर्ज कर ली गयी।
पॉइंट-3 : यूडीए अधिकारी राम्या रिसोर्ट वालों को फायदा, जबकि सरकार को राजस्व हानि पहुंचा रहे हैं
भूखंडों के फर्जी बेचान के मामलों की जांच में सामने आया है कि करीब 7 एकड़ में फैले राम्या रिसोर्ट का ज्यादातर हिस्सा एग्रीकल्चर लैंड पर संचालित है। बिना कंवर्जन धड़ल्ले से राम्या रिसोर्ट व्यावसायिक गतिविधियां चला रहा है। ऐसा नहीं है कि राम्या रिसोर्ट यूडीए के ध्यान में नहीं है। सवाल यही है कि आखिर क्यों यूडीए इस रिसोर्ट को सीज नहीं कर रहा? जबकि यूडीए ने पूर्व में भी कृषि भूमि पर बने कई रिसोर्ट और होटल सीज करने के साथ ही निर्माण ध्वस्त करने की कार्यवाही भी की है, तो यूडीए के अधिकारियों की इस रिसोर्ट के प्रति इतनी सहानुभूति क्यों है?
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