नारायण सेवा संस्थान की शिव कथा में कथा पंडाल ‘हर-हर महादेव’ और ‘शिव-पार्वती की जय’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा
उदयपुर,एआर लाइव न्यूज। सावन माह में आयोजित नारायण सेवा संस्थान की शिव कथा में बुधवार को भगवान शिव और माता सती के वियोग से लेकर शिव-पार्वती के दिव्य विवाह तक का मार्मिक प्रसंग सुनाया गया। संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, त्याग, करुणा, मानव सेवा और लोकमंगल का संदेश देते हुए कहा कि भगवान शिव का जीवन केवल पूजा-अर्चना का विषय नहीं, बल्कि समाज के कल्याण, समर्पण और मानवता की सर्वोच्च प्रेरणा है। | narayan seva sansthan Shiv Katha Udaipur
उन्होंने बताया कि दक्ष प्रजापति के यज्ञ में माता सती द्वारा देह त्याग करने के बाद भगवान शिव गहरे शोक में डूब गए और उनके निष्प्राण शरीर को कंधे पर लेकर समस्त ब्रह्मांड में विचरण करने लगे। भगवान शिव के विरह और तांडव से सृष्टि का संतुलन प्रभावित होने लगा। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को स्पर्श कराया, जिसके बाद उनके अंग पृथ्वी के विभिन्न स्थानों पर गिरे। यही स्थान आगे चलकर 52 शक्तिपीठों के रूप में विश्वभर में आस्था के प्रमुख केंद्र बने।
प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि भगवान शिव ने अपने व्यक्तिगत दुःख को भी लोककल्याण का माध्यम बना दिया। यही शिवत्व का वास्तविक स्वरूप है, जो हमें सिखाता है कि व्यक्तिगत पीड़ा से ऊपर उठकर समाज और मानवता के हित में कार्य करना ही सच्ची साधना है।
तारकासुर के वध के लिए भगवान शिव और माता पार्वती का मिलन आवश्यक था
कथा में आगे तारकासुर के अत्याचारों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि उसके वध के लिए भगवान शिव और माता पार्वती का मिलन आवश्यक था। माता पार्वती के रूप में सती के पुनर्जन्म, उनकी कठोर तपस्या और अटूट श्रद्धा का भावपूर्ण वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने माता पार्वती को स्वीकार किया और शिव-पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ। इस दौरान कथा पंडाल ‘हर-हर महादेव’ और ‘शिव-पार्वती की जय’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि शिव-पार्वती का विवाह केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन के आदर्श मूल्यों का संदेश है। सच्चा प्रेम त्याग, तपस्या, विश्वास और समर्पण की नींव पर टिका होता है। यदि जीवन में धैर्य, श्रद्धा और सकारात्मक सोच बनाए रखी जाए तो कठिन से कठिन परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है।
कथा के दौरान संस्थान में उपस्थित दिव्यांग लाभार्थियों एवं उनके परिजनों से संवाद भी किया गया। कई श्रद्धालु भक्ति में भावविभोर होकर भगवान शिव के जयकारे लगाते नजर आए। कथा के समापन पर मानव सेवा, करुणा, परोपकार और लोकमंगल को जीवन का उद्देश्य बनाने का संदेश दिया गया। narayan seva sansthan Shiv Katha Udaipur


