नई दिल्ली,एआर लाइव न्यूज। भारतीय खगोलविदों ने अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक ऐसे दुर्लभ ब्लू स्ट्रैगलर स्टार (Blue Straggler Star – BSS) की खोज की है, जो अभी सक्रिय रूप से बन रहा है। यह खोज पहली बार प्रत्यक्ष रूप से यह दिखाती है कि इस प्रकार के रहस्यमयी तारे किस तरह अपने साथी तारे से पदार्थ ग्रहण कर विकसित होते हैं। | Astronomers discover forming Blue Straggler Star
ब्लू स्ट्रैगलर स्टार ऐसे तारे होते हैं जो अपने समान आयु वाले तारों की तुलना में अधिक गर्म, अधिक चमकीले और अधिक विशाल दिखाई देते हैं। वर्षों से वैज्ञानिक इनकी उत्पत्ति को लेकर शोध कर रहे थे। अब इस नई खोज ने इस रहस्य को काफी हद तक सुलझा दिया है।
9,500 प्रकाश वर्ष दूर मिली दुर्लभ प्रणाली
भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने लगभग 9,500 प्रकाश वर्ष दूर स्थित पुराने खुले तारा समूह कोलिंडर 261 में मौजूद द्विआधारी तारा प्रणाली TIC 327546480 का विस्तृत अध्ययन किया।
इस शोध में NASA के TESS अंतरिक्ष मिशन से प्राप्त उच्च-सटीकता वाले डेटा और यूरोपियन सदर्न ऑब्जर्वेटरी (ESO) के वेरी लार्ज टेलीस्कोप (VLT) से प्राप्त रेडियल वेग मापों का उपयोग किया गया।
साथी तारे से लगातार ग्रहण कर रहा है पदार्थ
अध्ययन की सह-लेखिका एवं IIA की वैज्ञानिक अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम के अनुसार, शोध से स्पष्ट हुआ कि ब्लू स्ट्रैगलर तारा अपने कम द्रव्यमान वाले साथी तारे से लगातार पदार्थ (Mass Transfer) ग्रहण कर रहा है। यह प्रक्रिया इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि ब्लू स्ट्रैगलर स्टार का निर्माण अभी भी जारी है।
वैज्ञानिकों के अनुसार यह द्विआधारी प्रणाली अर्ध-पृथक (Semi-detached Binary) है, जिसमें एक तारा अपनी गुरुत्वीय सीमा (Roche Lobe) से बाहर फैल चुका है और लगातार अपने साथी तारे को पदार्थ स्थानांतरित कर रहा है।
एक्स-रे उत्सर्जन ने भी दी पुष्टि
शोधकर्ताओं ने इस प्रणाली से तेज़ एक्स-रे उत्सर्जन भी दर्ज किया। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा उत्सर्जन तभी होता है जब स्थानांतरित पदार्थ दूसरे तारे द्वारा तेजी से ग्रहण किया जा रहा हो। इससे यह पुष्टि होती है कि द्रव्यमान स्थानांतरण की प्रक्रिया वर्तमान समय में भी जारी है। | Astronomers discover forming Blue Straggler Star
सूर्य से 1.67 गुना अधिक द्रव्यमान
शोध के अनुसार—
- ब्लू स्ट्रैगलर तारे का द्रव्यमान सूर्य का लगभग 1.67 गुना है।
- इसका साथी तारा लगभग 0.32 सौर द्रव्यमान का है।
- दोनों तारों का कक्षीय आवर्तकाल 2.11 दिन है।
- यह प्रणाली लगभग 69.55 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से घूम रही है।
विकासवादी मॉडल से पता चलता है कि द्रव्यमान स्थानांतरण की प्रक्रिया लगभग 5.46 अरब वर्ष पहले शुरू हुई थी और आज भी जारी है, जबकि पूरे तारा समूह की अनुमानित आयु करीब 7 अरब वर्ष है।
दशकों पुराने रहस्य को सुलझाने में मिलेगी मदद
अध्ययन के सह-लेखक राम सागर ने कहा कि यह खोज बाइनरी तारा प्रणालियों में द्रव्यमान स्थानांतरण के माध्यम से ब्लू स्ट्रैगलर स्टार बनने के सबसे मजबूत प्रत्यक्ष प्रमाणों में से एक है। इससे तारकीय विकास (Stellar Evolution), बाइनरी सिस्टम और तारों के कायाकल्प (Stellar Rejuvenation) को समझने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
प्रमुख तथ्य
- भारतीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की संयुक्त उपलब्धि।
- निर्माणाधीन ब्लू स्ट्रैगलर स्टार का पहला मजबूत प्रत्यक्ष प्रमाण।
- तारा पृथ्वी से लगभग 9,500 प्रकाश वर्ष दूर स्थित।
- NASA TESS और ESO के VLT से जुटाए गए आंकड़ों का उपयोग।
- शोध Astrophysical Journal Letters में प्रकाशित।
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