21 दिनों में ऑन लाइन दिए जा सकेंगे सुझाव
नई दिल्ली,एआर लाइव न्यूज। अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखलाओं के संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन तथा उनसे जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गठित सर्वोच्च न्यायालय की उच्चाधिकार समिति (High Powered Committee) ने आम जनता, विशेषज्ञों और सभी हितधारकों से सुझाव एवं अभ्यावेदन आमंत्रित किए हैं। | Aravalli Hills Conservation| latest news Aravalli Hills Conservation
सर्वोच्च न्यायालय ने 25 मई 2026 को पारित अपने आदेश के तहत स्वतः संज्ञान रिट याचिका (सिविल) संख्या 10/2025 में अरावली पहाड़ियों एवं पर्वतमालाओं से जुड़े मामलों की जांच और व्यापक अध्ययन के लिए इस समिति का गठन किया था। समिति को 31 अगस्त 2026 तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत करनी है। | Supreme Court Aravalli High Powered Committee | Supreme Court ravalli Hills Conservation news
किन लोगों से मांगे गए हैं सुझाव?
उच्चाधिकार समिति ने विशेष रूप से निम्नलिखित हितधारकों से अपने सुझाव और अभ्यावेदन भेजने की अपील की है—
- दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात तथा अन्य राज्यों के नागरिक
- पर्यावरणविद् एवं संरक्षण विशेषज्ञ
- गैर-सरकारी एवं गैर-लाभकारी संगठन (NGOs)
- खनन पट्टा धारक
- परियोजना प्रस्तावक
- ग्रामीण, किसान एवं स्थानीय समुदाय
- खदान श्रमिक
- वे सभी व्यक्ति एवं संस्थाएं जिनका अरावली क्षेत्र या उससे जुड़े पर्यावरणीय एवं आजीविका संबंधी मुद्दों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध है।
समिति का उद्देश्य अरावली क्षेत्र के संरक्षण, जैव विविधता, पारिस्थितिकी तंत्र, खनन गतिविधियों, स्थानीय समुदायों की आजीविका और विकास से जुड़े सभी पक्षों पर व्यापक विचार-विमर्श करना है।
कैसे भेजें सुझाव?
समिति ने कहा है कि सभी सुझाव और अभ्यावेदन यथासंभव दस्तावेजी साक्ष्यों या अन्य सत्यापन योग्य सामग्री के साथ भेजे जाएं।
इच्छुक व्यक्ति इस सूचना के प्रकाशन की तिथि से 21 दिनों के भीतर निम्न माध्यमों से अपने सुझाव भेज सकते हैं—
- ईमेल: mshpcaravalli[at]gmail[dot]com
- Google Form: (लिंक: https://forms.gle/FpWwXBES5Gfr9bn16 ) के माध्यम से संप्रेषित किया जाना चाहिए।
क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रक्रिया?
अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है और यह उत्तर-पश्चिम भारत के पर्यावरणीय संतुलन, भूजल संरक्षण, जैव विविधता और जलवायु सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लंबे समय से अवैध खनन, अतिक्रमण और अनियंत्रित विकास गतिविधियों को लेकर चिंता जताई जाती रही है। ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट भविष्य में अरावली संरक्षण से जुड़े नीतिगत और कानूनी फैसलों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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