CSE रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
नई दिल्ली, 30 जून 2026: भारत के प्रमुख शहरों में ग्राउंड-लेवल ओजोन (Ground-Level Ozone) प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की छह वर्षों (2021-2026) के विश्लेषण पर आधारित नई रिपोर्ट में बताया गया है कि ओजोन प्रदूषण अब केवल कुछ शहरों या गर्मियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पूरे देश में सालभर स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
रिपोर्ट में 25 भारतीय शहरों का अध्ययन किया गया, जिसमें दिल्ली-एनसीआर सबसे बड़ा क्षेत्रीय ओजोन हॉटस्पॉट बनकर सामने आया। वहीं चंडीगढ़, जयपुर, अहमदाबाद, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, भोपाल और पटना जैसे शहर भी गंभीर रूप से प्रभावित पाए गए हैं।
CSE रिपोर्ट की प्रमुख बातें
- 25 में से 15 शहरों में गर्मियों के दौरान ओजोन का औसत स्तर राष्ट्रीय मानक से अधिक पाया गया।
- चंडीगढ़ में सबसे अधिक औसत ओजोन सांद्रता दर्ज की गई।
- जयपुर दूसरे और अहमदाबाद तीसरे स्थान पर रहे।
- दिल्ली-एनसीआर में अध्ययन अवधि के सभी 71 दिनों में ओजोन का स्तर निर्धारित सीमा से ऊपर रहा।
- मुंबई और चेन्नई जैसे तटीय शहरों में भी ओजोन प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।
- बेंगलुरु में ओजोन का दायरा लगातार फैल रहा है और लोगों का एक्सपोजर बढ़ रहा है।
दिल्ली-एनसीआर बना सबसे बड़ा ओजोन हॉटस्पॉट
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में हर दिन आठ घंटे के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक का उल्लंघन दर्ज किया गया। दिल्ली के पूसा आईएमडी, ग्रेटर नोएडा नॉलेज पार्क-5, नोएडा सेक्टर-125 और गाजियाबाद का वसुंधरा क्षेत्र प्रमुख ओजोन हॉटस्पॉट के रूप में सामने आए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती गर्मी, तेज धूप और वाहनों, उद्योगों तथा अन्य स्रोतों से निकलने वाली गैसों के कारण ओजोन का निर्माण तेजी से हो रहा है।
केवल उत्तर भारत नहीं, दक्षिण भारत भी प्रभावित
CSE के अध्ययन में स्पष्ट हुआ है कि ओजोन प्रदूषण अब केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं है। मुंबई में लगभग पूरे वर्ष ओजोन प्रदूषण देखा गया, जबकि चेन्नई में सबसे अधिक एपिसोडिक ओजोन स्तर दर्ज किया गया। बेंगलुरु में भी लंबे समय तक ओजोन का प्रभाव बना रहने की बात सामने आई है।
रात में भी बना रहता है ओजोन
रिपोर्ट बताती है कि ओजोन अब केवल दिन का प्रदूषक नहीं रह गया है। दिल्ली-एनसीआर में 46 रातों तक ओजोन का स्तर सुरक्षित सीमा से ऊपर दर्ज किया गया। इसके अलावा बेंगलुरु, भोपाल, पटना और मुजफ्फरपुर में भी रात के समय ओजोन प्रदूषण चिंता का विषय बन रहा है।
स्वास्थ्य पर क्या पड़ता है असर?
ग्राउंड-लेवल ओजोन फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाला खतरनाक प्रदूषक है। इससे अस्थमा, सांस लेने में तकलीफ, फेफड़ों की सूजन, हृदय रोग, स्ट्रोक और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक ओजोन के संपर्क में रहने से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर सबसे अधिक असर पड़ता है।
खेती और जलवायु पर भी असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि ओजोन प्रदूषण पौधों की वृद्धि और प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया को प्रभावित करता है। इससे गेहूं जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार में 14 से 15 प्रतिशत तक कमी आने का खतरा है। साथ ही ओजोन एक शक्तिशाली जलवायु प्रदूषक भी है, जो वातावरण में गर्मी बढ़ाने का काम करता है।
CSE की सिफारिशें
CSE ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP 2.0) में केवल पीएम2.5 और धूल नियंत्रण पर ध्यान देने के बजाय मल्टी-पॉल्यूटेंट (Multi-Pollutant) रणनीति अपनाने की सिफारिश की है। संस्था का कहना है कि NOx, VOC और CO जैसी गैसों के उत्सर्जन पर एक साथ नियंत्रण और राज्यों के बीच एयरशेड आधारित क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन लागू करना जरूरी है।
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