UNESCO विश्व धरोहर चित्तौड़गढ़ दुर्ग में बढ़ा अतिक्रमण संकट
उदयपुर,एआर लाइव न्यूज। राजस्थान के ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ दुर्ग में 200 से अधिक अवैध निर्माण और अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। इनमें होटल, हैंडीक्राफ्ट शोरूम और अन्य व्यावसायिक निर्माण भी शामिल हैं। यह दुर्ग UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल है तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारक है। | 200 Illegal Constructions in Chittorgarh Fort |
मुख्य सवाल: इतने अवैध निर्माण हुए कैसे?
दुर्ग क्षेत्र में चिन्हित अवैध निर्माण एक दिन या कुछ महीनों में नहीं हुए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। पुरातत्व विभाग की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। | udaipur latest news
जानकारी के अनुसार ASI ने वर्ष 2020 के बाद किसी बड़े अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश जारी नहीं किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी वजह से अतिक्रमणकर्ताओं के हौसले बढ़े और संरक्षित क्षेत्र में लगातार निर्माण होते रहे।
जिला प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई
चित्तौड़गढ़ जिला कलेक्टर डॉ. मंजू के संज्ञान में मामला आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला प्रशासन और ASI ने संयुक्त रणनीति बनाकर वर्तमान में प्राथमिकता उन निर्माणों को ध्वस्त करने की है जो अभी निर्माणाधीन हैं।
चित्तौड़गढ़ दुर्ग में निर्माण के नियम क्या हैं?
प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत चित्तौड़गढ़ दुर्ग संरक्षित क्षेत्र है। दुर्ग की प्राचीर के भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण, पुनर्निर्माण, मरम्मत या व्यावसायिक गतिविधि केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकरणों की अनुमति के बिना नहीं की जा सकती।
नियमों के बावजूद 200 से अधिक अवैध निर्माणों का चिन्हित होना निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कलेक्टर की सख्ती के बाद दर्ज हुई एक FIR
हाल ही में दुर्ग क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं को लेकर आयोजित बैठक में जिला कलेक्टर डॉ. मंजू ने अवैध निर्माणों पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल एफआईआर दर्ज कराने और अवैध निर्माणों को हटाने के निर्देश दिए।
इसके बाद ASI के संरक्षण सहायक प्रेमचंद शर्मा की रिपोर्ट पर कोतवाली थाना पुलिस ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग स्थित रत्नसिंह महल के सामने बिना अनुमति निर्माण कराने के मामले में युवराजादित्य सिंह के खिलाफ प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- चित्तौड़गढ़ दुर्ग UNESCO विश्व धरोहर स्थल है।
- दुर्ग क्षेत्र में 200 से अधिक अवैध निर्माण और अतिक्रमण चिन्हित हुए हैं।
- होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी जांच के दायरे में हैं।
- वर्ष 2020 के बाद बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं हुई।
- जिला कलेक्टर के निर्देश पर प्रशासन और ASI ने संयुक्त कार्रवाई शुरू की है।
- एक मामले में FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
बड़ा सवाल
यदि चित्तौड़गढ़ दुर्ग जैसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारक में 200 से अधिक अवैध निर्माण हो सकते हैं, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? और सबसे अहम प्रश्न यह है कि चिन्हित अतिक्रमणों पर वास्तविक ध्वस्तीकरण कार्रवाई कब शुरू होगी?
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