उदयपुर में चिकित्सा क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि
उदयपुर,एआर लाइव न्यूज। दक्षिण राजस्थान के चिकित्सा इतिहास में एक नई उपलब्धि दर्ज करते हुए Pacific Medical College & Hospital (PMCH) में पहली बार मात्र 5 दिन की नवजात बच्ची की सफल लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन द्वारा) सर्जरी की गई। 2.7 किलोग्राम वजन की इस नवजात के पेट से 110 सीसी की ओवेरियन सिस्ट (Ovarian Cyst) को सफलतापूर्वक निकालकर उसे नया जीवन दिया गया। | udaipur live news
गर्भावस्था के दौरान चला बीमारी का पता
राजसमंद जिले की 30 वर्षीय गर्भवती महिला की डिलीवरी से पांच दिन पहले नियमित सोनोग्राफी जांच के दौरान गर्भ में पल रही बच्ची के पेट में एक बड़ी गांठ दिखाई दी। रिपोर्ट सामने आने के बाद परिवार चिंता में आ गया, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भरोसा दिलाया कि जन्म के बाद ऑपरेशन के जरिए इसका सफल इलाज संभव है। | udaipur latest news
जन्म के बाद हुई गंभीर बीमारी की पुष्टि
बच्ची के जन्म के बाद विस्तृत जांच में पता चला कि उसके पेट में मौजूद गांठ वास्तव में एक बड़ी ओवेरियन सिस्ट थी। नवजात शिशुओं में, विशेष रूप से कम वजन वाले बच्चों में, इस प्रकार की सर्जरी अत्यंत जटिल और जोखिमपूर्ण मानी जाती है।
दक्षिण राजस्थान में पहली बार हुई नवजात की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी
बाल एवं नवजात शिशु सर्जन Dr. Praveen Jhanwar के नेतृत्व में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने लगभग डेढ़ घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन में दूरबीन तकनीक की मदद से सिस्ट को सफलतापूर्वक बाहर निकाला।
सर्जरी टीम में डॉ. उर्जिता पटेल, डॉ. विजय चाहर, डॉ. कृष्ण गोपाल, डॉ. प्रकृति, डॉ. पुनीत जैन, डॉ. सन्नी मालवीया सहित एनेस्थीसिया एवं नर्सिंग विभाग के विशेषज्ञ शामिल रहे।
क्यों चुनौतीपूर्ण थी यह सर्जरी?
विशेषज्ञों के अनुसार नवजात बच्ची के पेट में जगह बेहद सीमित होती है। ऐसे में लेप्रोस्कोपिक उपकरणों की सहायता से सिस्ट तक पहुंचना और आसपास के अंगों को बिना नुकसान पहुंचाए उसे निकालना एक बड़ी चुनौती थी। इस प्रक्रिया के लिए अत्याधुनिक तकनीक, सटीक सर्जिकल कौशल और एनेस्थीसिया टीम के समन्वय की आवश्यकता होती है। | udaipur breaking news
नियमित सोनोग्राफी की अहमियत का उदाहरण
डॉ. प्रवीण झंवर ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच और समय पर सोनोग्राफी से गंभीर बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकता है। यदि इस सिस्ट का पता गर्भावस्था में नहीं चलता, तो जन्म के बाद नवजात की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।
बच्ची पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित
सफल ऑपरेशन के बाद नवजात बच्ची की स्थिति सामान्य है और वह पूरी तरह स्वस्थ है। चिकित्सकों के अनुसार उसे आवश्यक निगरानी के बाद सुरक्षित रूप से घर भेजा जाएगा।
चिकित्सा क्षेत्र में नया मील का पत्थर
पीएमसीएच चेयरमैन Rahul Agrawal ने कहा कि यह सफल सर्जरी न केवल एक नवजात को नया जीवन देने वाली उपलब्धि है, बल्कि दक्षिण राजस्थान में एडवांस पीडियाट्रिक और नवजात सर्जरी के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। | udaipur news
मुख्य बिंदु (Highlights)
- उदयपुर में 5 दिन की नवजात बच्ची की सफल लेप्रोस्कोपिक सर्जरी।
- 2.7 किलो वजन की बच्ची के पेट से निकाली गई 110 सीसी ओवेरियन सिस्ट।
- दक्षिण राजस्थान में पहली बार इतनी कम उम्र के नवजात का दूरबीन तकनीक से ऑपरेशन।
- गर्भावस्था की सोनोग्राफी में बीमारी का चला था पता।
- विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने लगभग डेढ़ घंटे में किया सफल ऑपरेशन।
- नवजात अब पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित।


