ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सोहराबुद्दीन के भाई की अपील को बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज किया
एआर लाइव न्यूज। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में 21 पुलिसकर्मियों सहित सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया है। हाईकोर्ट बैंच ने मामले की सुनवायी करते हुए आज 7 मई को फैसला सुनाया और मुंबई सीबीआई स्पेशल कोर्ट (ट्रायल कोर्ट) के फैसले के खिलाफ सोहराबुद्दीन के भाई रूबाबुद्दीन की अपील को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट का यह फैसला राजस्थान और गुजरात के पुलिसकर्मियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। बॉम्बे हाईकोर्ट चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवायी 16 जनवरी को पूरी कर ली थी और मामले में फैसला रिजर्व रखा गया था। Sohrabuddin Encounter case : bombay High Court Acquitted All Police Personnel
बरी हुए 21 पुलिसकर्मियों में राजस्थान पुलिस टीम में तत्कालीन इंस्पेक्टर वर्तमान डीएसपी अब्दुल रहमान, तत्कालीन एसआई वर्तमान इस्पेक्टर हिमांशु सिंह राजावत, श्याम सिंह सहित अधिनस्थ पुलिसकर्मी युदवीर सिंह, करतार सिंह और नारायण सिंह सहित गुजरात और आंध्रप्रदेश के पुलिसकर्मी शामिल हैं। जिनमें हेडकांस्टेबल नारायण सिंह की मृत्यु हो चुकी है। | Sohrabuddin Encounter news | High Court Acquitted All Police Personnel | Sohrabuddin Encounter | Sohrabuddin-tulsi Encounter | Sohrabuddin Encounter today news | Sohrabuddin Encounter update news | bombay high court decision on Sohrabuddin Encounter case
2019 में रूबाबुद्दीन शेख ने हाईकोर्ट में की थी अपील
23 नंवबर 2005 को राजस्थान और गुजरात पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन कर वांछित अपराधी सोहराबुद्दीन शेख को एनकाउंटर में मार गिराया था, जबकि सोहराबुद्दीन के साथी तुलसी का भी एक साल बाद दिसंबर 2006 में एनकाउंटर हुआ था। सीबीआई ने मामले की जांच की थी और इसे फर्जी एनकाउंटर मानते हुए गुजरात के तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह, राजस्थान के तत्कालीन गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया सहित आंध्रप्रदेश, राजस्थान और गुजरात के आईपीएस अधिकारी, पुलिसकर्मी और उद्योगपतियों सहित 38 लोगों को आरोपी मानते हुए चार्जशीट दाखिल की थी।
वर्ष 2014 के बाद तत्कालीन गुजरात के गृहमंत्री अमित शाह, तत्कालीन राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, आरके मार्बल के मालिक विमल पाटनी, गुजरात के आईपीएस डीजी बंजारा, राजकुमार पांडियन, अभय चूडास्मा, विपुल अग्रवाल, दिनेश एमएन सहित 16 आरोपियों को केस में ट्रायल शुरू होने से पहले ही कोर्ट द्वारा डिस्चार्ज कर दिया गया था। मतलब इन 16 आरोपियों पर तो कोर्ट ने आरोप माना ही नहीं था और इन्हें आरोपमुक्त कर दिया था। ऐसे में एनकाउंटर टीम में शामिल 21 पुलिसकर्मियों सहित 22 आरोपियों ने मामले में ट्रायल फेस की थी।
21 दिसंबर 2018 को ट्रायल कोर्ट ने 21 पुलिसकर्मियों सहित 22 आरोपियों को बरी किया था
जबकि एनकाउंटर टीम में शामिल राजस्थान के तत्कालीन इंस्पेक्टर वर्तमान डीएसपी अब्दुल रहमान, तत्कालीन एसआई वर्तमान इस्पेक्टर हिमांशु सिंह राजावत, श्याम सिंह सहित अधिनस्थ पुलिसकर्मी युदवीर सिंह, करतार सिंह और नारायण सिंह सहित गुजरात और आंध्रप्रदेश के 21 पुलिसकर्मियों कुल 22 आरोपियों ने मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में ट्रायल फेस की थी। सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट में केस की सुनवायी के दौरान 210 गवाह पेश किए थे, जिनमें से 96 गवाह होस्टाईल हो गए थे।
21 दिसंबर 2018 को ट्रायल कोर्ट ने 21 पुलिसकर्मियों सहित 22 आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया था और यह कहा था कि प्रोसीक्यूशन गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश के 21 मौजूदा और रिटायर्ड पुलिसकर्मियों सहित कुल 22 आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित नहीं कर सका। प्रोसीक्यूशन द्वारा कथित फेक एनकाउंटर की बतायी गयी कहानी के मुख्य गवाह ही होस्टाईल हो गए।
मुंबई सीबीआई स्पेशल कोर्ट (ट्रायल कोर्ट) के इसी फैसले के खिलाफ सोहराबुद्दीन के भाई रूबाबुद्दीन शेख ने बॉम्बे हाईकोर्ट में वर्ष 2019 में अपील दायर की थी।
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