उदयपुर के अर्थ डायग्नोस्टिक के सीईओ डॉ. अरविंदर सिंह की याचिका पर सुनवायी: दिव्यांगों के मौलिक अधिकार और असुविधाजनक रोडवेज बस स्टैंडों को लेकर दायर की याचिका
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर के अर्थ डायग्नोस्टिक के सीईओ डॉ. अरविंदर सिंह की याचिका पर उदयपुर लोक अदालत ने राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) को जरिए चेयरमैन नोटिस जारी कर अगली तारीख पर उपस्थित हो याचिका के संबंध में जवाब मांगा है। लोक अदालत से आदेश में स्पष्ट कहा है कि निगम के चेयरमैन स्वयं या फिर जो जवाब देने के लिए सक्षम अधिकारी हो उसे मय दस्तावेज जवाब देने प्रस्तुत करें। उदयपुर लोग अदालत ने अगली तारीख 29 मई दी है। arth dr arvinder singh | dr arvinder singh news | arth group | RSRTC | Divability Rights | Panacea Disability Rights Activists | Dr Arvinder Singh arth news | Disability Rights Activist Dr Arvinder Singh | dr arvinder singh udaipur
डॉ.अरविंदर सिंह की याचिका के अनुसार वे पोलियो से पीड़ित हैं और 50% शारीरिक दिव्यांगता से ग्रसित हैं। जयपुर जाने के लिए वे उदियापोल रोडवेज बस स्टैंड गए थे, वहां जाना उनके लिए बेहद पीड़ादायक, अपमानजनक अनुभव रहा। डॉ. अरविंदर सिंह ने कहा वहां दिव्यांगजन के लिए प्रवेश द्वार से लेकर बस में चढ़ने तक न तो रैंप था, न व्हीलचेयर थी और न ही दिव्यांगों के लिए अलग से काउंटर या कोई भी सुविधा नहीं थी। मानो सरकार की यह रोडवेज बस सुविधा दिव्यांगजनों के लिए है ही नही। udaipur lok adalat issue notice to rsrtc chairman on dr arvinder singh petition
तमाम कठिनाइयों को झेलकर वे बस तक पहुंचे, लेकिन बस में चढ़ नहीं पाए
याचिका में डॉ. अरविंदर सिंह ने बताया कि उनकी जयपुर जाने वाली ट्रेन छूट गई थी, उन्हें तुरंत जयपुर जाना था, इसलिए वे बस पकड़ने के लिए रोडवेज बस स्टैंड पहुंचे। डिपो पर पहुंचने पर उन्हें भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा। डिपो पर दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कोई अलग पार्किंग सुविधा नहीं मिली। डिपो का प्रवेश द्वार भी सुगम्य नहीं था, वहां कोई रैंप उपलब्ध नहीं था। इस कारण शिकायतकर्ता को सीढ़ियां चढ़ने या उतरने में काफी परेशानी हुई।
बड़ी मुश्किल से वे किसी यात्री की सहायता से पूछताछ खिड़की तक पहुंचे, लेकिन वहां भी दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कोई अलग काउंटर नहीं था। उन्होंने सुविधा के लिए व्हीलचेयर की उपलब्धता के बारे में पूछा तो पता चला डिपो पर कोई भी व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं थी। वे बड़ी कठिनाइयों के साथ बस प्लेटफॉर्म तक पहुंचे।
जयपुर जाने के लिए बस का एक टिकट लिया, लेकिन जब बस आयी तो बस में चढ़ना उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी। बस में चढ़ने के लिए न तो कोई व्हीलचेयर थी और न ही रैंप। बेहद ऊँची और असुविधाजनक सीढ़ियां थीं, जिससे वे चढ़ते तो उन्हें बड़ी चोट लग सकती थी। इस कारण वे बस में नहीं चढ़ सके और उन्हें मजबूरन निजी वाहन से जयपुर जाना पड़ा। डॉ. अरविंदर सिंह ने बताया दिव्यांगजन के लिए न तो कोई शौचालय था, न ही मार्गदर्शन के लिए कोई साइनबोर्ड या ब्रेल टाइल्स थीं। इसके अलावा कोई आधिकारिक ऑडियो घोषणाएँ भी नहीं थीं।
सार्वजनिक स्थानों और संसाधनों तक पहुंच दिव्यांगजनों का एक मौलिक अधिकार
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत बस स्टॉप, रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डों को पार्किंग स्थलों, शौचालयों, टिकटिंग काउंटरों और टिकटिंग मशीनों से संबंधित पहुंच मानकों के अनुरूप होना चाहिए। साथ ही परिवहन के सभी साधन-संसाधन भी मानकों के अनुरूप होने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि सार्वजनिक स्थानों और संसाधनों तक पहुंच दिव्यांगजनों का एक मौलिक अधिकार है और पहुंच मानकों का पालन न करना दिव्यांगजनों की गरिमा और अधिकारों का उल्लंघन है। इस प्रकार उदयपुर रोडवेज बस स्टैंड पर दिव्यांगजनों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। याचिका में लिखा कि रोडवेज निगम के कर्मचारियों की लापरवाही भरे और दोषपूर्ण आचरण के कारण शिकायतकर्ता को वित्तीय हानि, असुविधा, गरिमा की हानि और मानसिक उत्पीड़न का सामना पड़ा।


