उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। गीतांजली मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के स्त्री एवं प्रसूती रोग विभाग में गंभीर हालत में भर्ती हुई गर्भवती महिला की चिकित्सकों की टीम ने सफल ऑपरेशन कर जान बचा ली है। स्त्रीरोग, गैस्ट्रो, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी, आईसीयू, एनेस्थीसिया इन सभी विभागों के चिकित्सकों के संयुक्त प्रयास से महिला की जान बचाई जा सकी है। udaipur geetanjali hospital doctors teamwork saves woman life admitted in serious condition
गीतांजली हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नलिनी शर्मा ने बताया कि महिला मरीज पांच माह की आईवीएफ से हुई ट्विन प्रेग्नेंसी में उच्च रक्तचाप, लिवर की खराबी, प्लासेंटा प्रीविया और मोलर प्रेग्नेंसी से ग्रसित होने से हॉस्पिटल में भर्ती हुई थी। पांच माह की गर्भावस्था तक मरीज का पेट नौ माह की गर्भावस्था जितना बढ़ चुका था, एक भ्रूण तो सामान्य था, लेकिन दूसरा भाग मोलर प्रेग्नेंसी था। मरीज को मोलर प्रेग्नेंसी के कारण रह-रहकर रक्तस्राव हो रहा था। ऐसे में परिजनों की सहमति पर डॉक्टर्स ने महिला की जान बचाने के लिए गर्भावस्था समाप्त करने का कठिन निर्णय लिया।
ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा था
डॉक्टर ने बताया कि डिलीवरी के दौरान भारी रक्तस्राव का रिस्क था। जिसमें उच्च रक्तचाप, लिवर की खराबी, प्री-एक्लेम्प्सिया, प्लासेंटा का बच्चेदानी के मुख पर होना, पांच माह में ही गर्भाशय का नौ माह जितना बढ़ जाना और मोलर प्रेग्नेंसी प्रमुख कारण थे। महिला को लिवर फेल्योर, हिस्टरेक्टॉमी और यहां तक कि मृत्यु का भी गंभीर खतरा था
ऑपरेशन थिएटर में डॉ. नलिनी शर्मा के साथ डॉ. अक्षय तोषनीवाल (एनेस्थीसिया विभाग) की टीम ने बिना ऑपरेशन के सक्शन इवैकुएशन द्वारा डिलीवरी कराई। गंभीर प्रसवोत्तर रक्तस्राव को दवाइयों, सक्शन केनुला और 17 ब्लड कॉम्पोनेंट्स देने के बावजूद जब पूर्ण रूप से नियंत्रित नहीं किया जा सका, तो पहले से तैयार इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. तान्या दीक्षित एवं उनकी टीम ने गर्भाशय धमनी एम्बोलाइजेशन किया। इसमें जांघ की फेमोरल आर्टरी से एक पतली नली (कैथेटर) डालकर एक्स-रे एंजियोग्राफी की मदद से गर्भाशय की धमनियों में छोटे-छोटे कणों द्वारा रक्त प्रवाह को सफलतापूर्वक रोका गया। अंततः मरीज का गर्भाशय और जान बचाई जा सकी।
आईसीयू में डॉ. संजय पालीवाल के निर्देशन में दो दिन तक मरीज की गहन निगरानी की गई। लिवर से संबंधित संपूर्ण उपचार डॉ. कार्तिकेय माथुर (गैस्ट्रो फिजिशियन) द्वारा किया गया।
ट्रोफोब्लास्टिक कैंसर के खतरे को देखते हुए एक साल तक मरीज का फॉलोअप होगा
इस जटिल केस के सफल प्रबंधन में डॉ नलिनी शर्मा के नेतृत्व में डॉ फरहीन शेख, डॉ तेहनाज, डॉ जयश्री और लोकेश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मोलर प्रेग्नेंसी वाले मामलों में गर्भावस्था समाप्त होने के बाद ट्रोफोब्लास्टिक कैंसर होने का खतरा बहुत अधिक होता है। इस संभावना को देखते हुए कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ अंकित अग्रवाल के निर्देशन में अगले एक साल तक मरीज का फॉलो.अप होगा।
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