आरएमसी का पूर्व रजिस्ट्रार, उदयपुर, जयपुर सहित 9 जिलों से 15 डॉक्टर, कुल 18 लोग गिरफ्तार : फर्जी FMGE सर्टिफिकेट पेश कर RMC में रजिस्ट्रेशन करवाने का मामला, फर्जी सर्टिफिकेट लेकर प्रदेश के अस्पतालों में कर रहे थे काम
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने प्रदेश के मेडिकल क्षेत्र के फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा सहित 18 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन 18 आरोपियों में 15 डॉक्टर हैं, जो उदयपुर, जयपुर सहित प्रदेश के 9 जिलों से गिरफ्तार किए गए हैं। इन डॉक्टर्स ने फर्जी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) सर्टिफिकेट आरएमसी में लगाकर वहां से रजिस्ट्रेशन करवा प्रोवीजनल और पर्मानेंट सर्टिफिकेट बनवा लिए और ऐसे कई डॉक्टर प्रदेश के अस्पतालों में काम भी कर रहे हैं। | rajasthan SOG | rajasthan police | RMC | FAKE FMGE Certificate | rajasthan medical council | udaipur latest news | udaipur news | medical news |
एसओजी एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि आज बुधवार सुबह एसओजी की 22 टीमों ने एक साथ प्रदेश में जयपुर, उदयपुर, जोधपुर सहित 9 जिलों में दबिश देकर 15 डॉक्टर्स, राजस्थान मेडिकल काउंसिल के के दो अधिकारी-कर्मचारी (पूर्व रजिस्ट्रार डॉक्टर राजेश शर्मा, तत्कालीन नोडल ऑफिसर) और एक दलाल सहित कुल 18 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन डॉक्टर्स ने फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) का फर्जी सर्टिफिकेट राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) में लगाया। आरएमसी के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा ने इन कैंडीडेट्स द्वारा प्रस्तुत किए गए एफएमजीई सर्टिफिकेट का बिना कोई सत्यापन कराए ही इनका आरएमसी में रजिस्ट्रेशन करवा इनको प्रोवीजनल सर्टिफिकेट जारी कर दिए। आरएमसी में रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट प्राप्त कर कुछ डॉक्टर तो प्रदेश के अस्पतालों में काम कर रहे हैं। Rajasthan police SOG arrest 18 doctors including two officials of rajasthan medical council
20 से 25 लाख रूपए में आरएमसी में कराए गए रजिस्ट्रेशन
एडीजी ने बताया कि विदेश से एमबीबीएस करके आए कैंडीडेट्स जो भारत में आकर एफएमजीई परीक्षा पास नहीं कर पाए, उनसे इस गिरोह ने फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट बनाने और आरएमसी में रजिस्ट्रेशन करवाने के प्रति कैंडीडेंट 20 से 25 लाख रूपए लिए। गिरोह के किंगपिन इन कैंडीडेंट्स का फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट बनाते और इस पर उन कैंडीडेट के रोल नंबर लिखते जिन्होंने एफएमजीई परीक्षा पास की। कैंडीडेट यह फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट आरएमसी में लगाता। आरएमसी ने कैंडीडेट के प्रस्तुत किए गए फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट का वैरीफिकेशन या जांच किए बगैर ही उसका आरएमसी में रजिस्ट्रेशन कर प्रोवीजनल सर्टिफिकेट जारी कर दिए।। RMC में रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट से ये डॉक्टर प्रदेश के अलग-अलग हॉस्पिटल में काम कर रहे थे।
गिरोह के किंगपिन के संपर्क में थे पूर्व रजिस्ट्रार
एसओजी के अनुसार इस पूरी कार्रवाई की शुरूआत तीन एमबीबीएस डॉक्टरों की गिरफ्तारी से हुई थी। इसके बाद एसओजी ने 2 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो विदेश से एमबीबीएस कर लौटे थे और इस फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। गिरोह के किंगपिन के पकड़े जाने के बाद ही पूरे गिरोह का खुलासा हुआ। आरएमसी के पूर्व रजिस्ट्रार राजेश शर्मा इन्हीं के संपर्क में थे। कैंडीडेट से वसूले जाने वाले 20 से 25 लाख रूपए में 10-12 लाख रूपए तो आरएमसी में जाते थे, 2 लाख रूपए फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों को जाते थे और बची हुई राशि दलालों में बंटती थी। एसओजी अब तब जांच में ऐसे 93 डॉक्टर्स को चिह्नित कर चुकी है, जिन्होंने फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट बनवाए।
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