चोरी का नेकलेस बदमाश ने कोटक महिंद्रा बैंक में गिरवी रख गोल्ड लोन प्राप्त किया: चोरी का खुलासा हुआ और पुलिस ने नोटिस भेजा तो कोटक महिन्द्रा बैंक कर्मियों में हड़कंप मच गया
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। बदमाशों को घरों-मकानों से चोरी किए या लूट की वारदातों के सोने जेवर बैंकों में गिरवी रखकर आसान गोल्ड लोन प्राप्त करने का तरीका बड़ा रास आ रहा है, सोने को ठिकाने लगाने के लिए न तो किसी सुनार की तलाश करनी पड़ती है और जेवर की वास्तविक कीमत का 70 से 80 प्रतिशत राशि लोन के तहत मिल जाती है। udaipur: man mortgage stolen jewellery in kotak mahindra bank udaipur
उदयपुर के मधुबन स्थित कोटक महिंद्रा बैंक के सेल्स मैनेजर अंकुर जैन ने हाथीपोल थाने में मनवाखेड़ा निवासी युवराज सिंह पुत्र दुर्जन सिंह राठौड़ के खिलाफ धोखाधड़ी कर चोरी के जेवर को अपना बता बैंक में गिरवी रखकर बैंक से 8.70 लाख रूपए का गोल्ड लोन लेने की एफआईआर दर्ज करवायी है।
पुलिस ने बैंक को नोटिस भेजा तो पता चला उनके लॉकर में चोरी का नेकलेस रखा है
हाथीपोल थाने में दर्ज एफआईआर में कोटक महिंद्रा बैंक मैनेजर ने बताया कि 12 जनवरी 2026 को उनकी बैंक में युवराज सिंह नाम का युवक आया। उसने एक नेकलेस दिखाया और कहा यह उसका पुश्तैनी नेकलेस है और गिरवी रखकर गोल्ड लोन प्राप्त करना चाहता है। बैंक प्रतिनिधि ने नेकलेस की जांच और मूल्याकंन करवाया। 109.400 ग्राम सोने के नेकलेस की बाजार कीमत 11 लाख रूपए से अधिक निकली। बैंक ने नियमानुसार एग्रीमेंट कर 75 प्रतिशत लोन पास कर युवराज सिंह राठौड़ के खाते मे 8.70 लाख रूपए ट्रांसफर कर दिए। लेकिन 8 दिन बाद ही 20 जनवरी को बैंक को पुलिस का नोटिस मिला तो बैंक कर्मियों के होश उड़ गए, क्यों कि यह नेकलेस चोरी का निकला।
डूंगरपुर की साबला थाना पुलिस मधुबन स्थित कोटक महिन्द्रा बैंक आकर कानूनी कार्यवाही करते हुए सोने का वह नेकलेस जब्त कर साथ ले गयी और जानकारी दी कि यह नेकलेस युवराज सिंह का न होकर साबला निवासी प्रताप सिंह के घर से चोरी किया हुआ है।
गत वर्षों में उदयपुर पुलिस ने चोरी और लूट के ऐसे कुछ और मामलों का खुलासा किया है, जिनमें बदमाशों ने वारदात के बाद जेवर बैंक में गिरवी रखकर गोल्ड लोन प्राप्त किया और फिर कभी बैंक लौटकर नहीं गए।
पुलिस मात्र 20 से 30 प्रतिशत चोरियों का ही कर पाती है खुलासा
पुलिस विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पुलिस घर, मकान और दुकानों से हुई चोरी/नकबजनी के कुल मामलों के 20 से 30 प्रतिशत चोरियों का ही खुलासा कर पाती है। जबकि 65 से 70 प्रतिशत मामलों में आरोपियों का पता ही नहीं लगने पर एफआर लगा देती है। ऐसे में 65 से 70 प्रतिशत मामलों में यह कभी पता ही नहीं चल पाता कि बदमाशों ने चोरी किए जेवरों को किसी बैंक में गिरवी रखकर रूपए तो प्राप्त नहीं कर लिए। बदमाश रूपए प्राप्त कर कभी बैंक लौटते नहीं और बाद में बैंक प्रक्रिया के तहत वह जेवर बैंक की संपत्ति हो जाते हैं।
बैंकों की जिम्मेदारी तय करनी जरूरी
पूर्व में ऐसे मामलों का अनुसंधान कर चुके पुलिस इंस्पेक्टर भरत योगी ने बताया कि ऐसी कई वारदातों का खुलासा हुआ है, जिनमें आरोपियों ने चोरी, लूट या आपराधिक कृत्य से प्राप्त किए सोने के जेवरों को बैंक में गिरवी रखकर गोल्ड लोन प्राप्त कर लिया। ऐसे में जरूरी है कि बैंक अपनी जिम्मेदारी समझें। बिना दस्तावेज और बिल देखे या यह सुनिश्चित किए बगैर कि जेवर उक्त व्यक्ति के ही हैं, गोल्ड लोन नहीं देना चाहिए।
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि अक्सर घरों में पुश्तैनी गहनों के दस्तावेज नहीं होते हैं, तो बैंकों को गहनों का मालिकाना हक सुनिश्चित करने के दूसरे रास्ते भी निकालने चाहिए। बैंक सिर्फ एक व्यक्ति के कहने के बजाए उसके परिवार में पत्नी, माता-पिता, बालिग बच्चों के पहचानपत्र लेकर और उन्हें गारंटर बनाकर गहनों का मालिकाना हक सुनिश्चित कर सकते हैं। इससे गोल्ड लोन सही व्यक्ति को जाएगा और अपराध में भी कमी आ सकती है। ऐसे मामलों में बैंकों की जिम्मेदारी तय करनी जरूरी है। अगर कोई बैंककर्मी गोल्ड के मालिकाना हक के संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन किए बगैर गोल्ड लोन पास कर रहा है तो उस बैंक प्रतिनिधि की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
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