आदमखोर पैंथर को पकड़ने के प्रयासों में हुए खर्चों का विवरण बना चर्चा का विषय : वनकर्मियों ने 5.52 लाख का तो भोजन कर लिया, वहीं आदमखोर 43 हजार के मुर्गों और बकरों के झांसे में भी नहीं फंसा, 17904 रूपए स्टेशनरी पर खर्च हो गए
लकी जैन,उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। सवा साल पहले उदयपुर के गोगुंदा विभानसभा क्षेत्र में 1 माह में 8 लोगों का शिकार करने वाले आदमखोर पैंथर को पकड़ने के लिए वन विभाग ने 20 लाख रूपए खर्च किए थे, लेकिन फिर भी वन विभाग उसे पकड़ नहीं पाया और वह पुलिस की गोली से मारा गया। हालांकि इस 20 लाख रूपए में मुआवजा राशि नहीं है। 8 लोगों की मौत पर 40 लाख रूपए मुआवजा परिजनों को अलग से स्वीकृत हुआ। यह 20 लाख रूपए तो 1 महीने के अंतराल में वन विभाग ने आदमखोर पैंथर को पकड़ने के प्रयासों में ही खर्च कर दिए थे। udaipur forest department expenses 20 lakh rupees trying to capture man-eater panther
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 महीने तक गोगुंदा क्षेत्र में दहशत का सबब बने आदमखोर पैंथर को पकड़ने के नाम पर खर्च की गयी राशि 20 लाख 44 हजार 453 रूपए में से 43 हजार रूपए तो मीट, बकरे और मुर्गों की खरीद पर खर्च करने पड़े थे, क्या पता इंसानों की तरफ पैंथर भी लालची हो और बकरे, मुर्गों के लालच में ट्रेप हो जाए, लेकिन शातिर आदमखोर वन विभाग के इस झांसे में नहीं आया। अब खरीदे गए बकरे और मुर्गों किस पैंथर का निवाला बने होंगे, ये पता नहीं। एक रोचक बात यह भी है कि इस एक महीने में विभाग ने पैंथर को पकड़ने में इतनी लिखापढ़ी की, इतने कागज चलाए कि 17904 रूपए तो स्टेशनरी पर ही खर्च करने पड़ गए।
आदमखोर पैंथर ने वन कर्मियों को “पानी खूब पिलाया”
वन विभाग से प्राप्त आंकड़ों में इस बात का खुलासा भी हुआ है कि पैंथर को पकड़ने में खर्च हुए 20 लाख रूपए में 5 लाख 52 हजार रूपए मतलब एक चौथाई से ज्यादा बजट तो कर्मचारियों के भोजन पर ही खर्च हो गया था, वहीं आदमखोर पैंथर ने वन कर्मियों को पानी भी खूब पिलाया, तभी अस्थायी कैंप में मौजूद कर्मचारियों के पानी पर 26900 रूपए खर्च हो गए थे।
दूरबीन, ट्रेप कैमरे और पिंजरे तक खरीदने पड़े
विभाग के खर्चों की सूची से इस बात का खुलासा भी हुआ है कि विभाग किसी आपातस्थिति में कितना तैयार रहता है। जिस आदमखोर पैंथर के आतंक में हजारों ग्रामीण 18 सितंबर से 18 अक्टूबर 2024 पूरा एक महीने तक आतंकित रहे, उसे पकड़ने के लिए विभाग के पास पर्याप्त पिंजरे, दूरबीन (बाइनोकुलर) या कैमरों की बैटरियां तक नहीं थीं। यह सबकुछ विभाग को पैंथर को पकड़ने के सर्च ऑपरेशन के दौरान खरीदने पड़े।
वन विभाग द्वारा आदमखोर पैंथर को पकड़ने और सुरक्षा के लिए व्यय की गयी राशि का ब्यौरा
- कार्य का विवरण : व्यय राशि
- एनीमल फूड में मीट, मुर्गो, बकरा खरीदे : 43,242 रूपए
- ट्रेप कैमरा, सेल, मेमोरी कार्ड : 2,88,605
- दूरबीन : 3,48,900 रूपए
- पिंजरे : 3,31,800 रूपए
- कैमरों के एंटीना इंस्टॉलेशन और बैटरी खरीद : 50,000 रूपए
- अस्थायी कैंप के लिए टेंट : 1,29,726 रूपए
- अस्थायी कैंप में पानी : 26,900
- कार्मिकों के भोजन : 5,52,600 रूपए
- मेडिकल खर्च : 1,117 रूपए
- स्टेशनरी : 17,904 रूपए
- सैंपल फीस : 45,000 रूपए
- ट्रांसपोर्टेशन : 1,55,000 रूपए
- वाहनों की रिपेयरिंग : 4,250 रूपए
- विविध व्यय : 49,409 रूपए
आदमखोर पैंथर ने 8 इंसानों का किया था शिकार
गौरतलब है कि सवा साल पहले 18 सितंबर 2024 को गोगुंदा थाना क्षेत्र के उंडीथल से पैंथर ने एक बच्ची का शिकार कर उसे खाया था और यहीं से आदमखोर पैंथर के मानव शिकार का सिलसिला शुरू हुआ था। आदमखोर पैंथर एक के बाद एक गांव की ओर बढ़ता गया और लोगों का शिकार करता रहा। वन विभाग को इस आदमखोर पैंथर को पकड़ने में आर्मी और पुलिस की मदद तक लेनी पड़ी और वाइल्ड लाइफ के एक प्रोफेशनल शूटर तक को बुलाना पड़ा। आखिरकार 18 अक्टूबर 2024 को उदयपुर पुलिस की गोली से यह आदमखोर पैंथर मारा गया था। इसी के बाद से इस क्षेत्र में पैंथर के मानव शिकार का सिलसिला भी बंद हुआ। मारे गए पैंथर के सैंपल की जांच कराने पर इसी के आदमखोर पैंथर होने की पुष्टि भी हुई और इसके बाद विभाग ने राहत की सांस ली थी।
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