उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। जिला कलेक्टर नमित मेहता की कड़ी नाराजगी और सख्त निर्देश के बावजूद उदयपुर विकास प्राधिकरण(यूडीए) अफसरों ने कैलाशपुरी क्षेत्र में अवैध रूप से पहाड़ियों को काट कर बनाए होटल, विला को ध्वस्त करने की बजाय सोमवार को पहाड़काट माफिया के व्यावसायिक नुकसान को देख सहानुभूति के बुलडोजर चलाए। udaipur UDA seized villa, hotel and resort in kailashpuri built by hill cutting illegally after collector visit. Team Just broken the road, not demolish illegal construction
कलेक्टर के दिए निर्देश की पालना में यूडीए की तहसील शाखा की टीम आज सोमवार को भारी भरकम बुलडोजर और पूरे लवाजमे के साथ कैलाशपुरी क्षेत्र में छलनी हुई पहाड़ियों के बीच पहुंची। ऐसा लगा कि आज तो पहाड़ियों को छलनी कर बनाए जा रहे अवैध होटल, रिसोर्ट और विला की खैर नहीं। लेकिन यह क्या..? मौके पर पहुंची यूडीए की टीम अवैध विला, रिसोर्ट या होटल को तोड़ने के बजाए होटल, विला तक जाने वाले रास्ते ही बुलडोजर से काट सकी। यूडीए की टीम ने होटल, विला की बिल्डिंग को सहानुभूति के बुलडोजर से दूर ही रखा। यूडीए की टीम ने बुलडोजर ऐसे दूर-दूर चलाए की गलती से भी बुलडोजर किसी होटल, विला को टच नहीं हो जाए।वीडियो में देखें कैसे चला यूडीए का सहानुभूति का बुलडोजर-:
यूडीए ने कार्रवाई के नाम पर सिर्फ होटल, विला की दीवारों, गेट पर सीज की कारवाई के नोटिस चस्पा कर कलेक्टर को दिखाने के लिए ऐसी मासूमियत से लाठी पटकी कि पहाड़ियों को छलनी करने वाले माफियाओं को ज्यादा दर्द भी न हो और कलेक्टर साब भी खुश हो जाएं।

जो लोग पहाड़ काट सकते है, क्या वो रास्ते वापस नहीं बना सकते ?
यूडीए ने होटल, विला तक जाने के रास्ते काट दिए, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिन लोगों ने होटल, विला बनाने प्रकृति के बनाए पहाड़ काट दिए, क्या वो लोग मामूली खर्चे में रास्ते वापस नहीं बना सकते ? तोड़ना ही था तो बड़े पक्के निर्माण तोड़कर आते तो पहाड़ियों को छलनी करने वालों में सख्त मैसेज जाता। आखिर यूडीए के भारी भरकम बुलडोजर का पंजा क्यों अवैध निर्माण तक पहुंचने में कांपा.? क्या बुलडोजर के पंजे को मलबे के बजाए किसी और चीज से भर दिया गया है.?

कलेक्टर ने तो पहाड़ियों को काटकर बनाए गए अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे
जिला कलेक्टर नमित मेहता गत 15 जनवरी को यूडीए आयुक्त राहुल जैन और तहसीलदार अभिनव शर्मा सहित जिम्मेदारों को साथ लेकर कैलाशपुरी क्षेत्र की इन पहाड़ियों के हालत देखने गए थे। छलनी हुई पहाड़ियां देखकर कलेक्टर हैरान भी हुए और नाराजगी भी जताई थी। तब जिला कलेक्टर ने अवैध रास्तों को हटाने के साथ ही पहाड़ियों को काटकर करवाए गए अवैध निर्माण कार्यों को ध्वस्त करने के मौके पर ही स्पष्ट निर्देश दिए थे।

एफआईआर क्यों नहीं करवाता यूडीए
अवैध रूप से पहाड़ियों को काटने की साजिशें रुक नहीं रही। चिंतनीय विषय है कि जिला कलेक्टर नमित मेहता कैलाशपुरी की इन पहाड़ियों के बीच नहीं जाते तो यूडीए के जिम्मेदार तो अनजान ही बने घूमते रहते। अब भी बड़ा सवाल यह है कि यूडीए अवैध रूप से पहाड़ियों को छलनी करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की हिम्मत क्यों नहीं कर पा रहा।

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