पीसीपीएनडीटी टीम की मंशा पर उठे सवाल- स्वास्थ्य विभाग से जारी प्रेस रिलीज में गिरफ्तारी बतायी, लेकिन पुलिस टीम ने नोटिस देकर छोड़ा
- भ्रूण लिंग परीक्षण की रोकथाम के लिए बने कानून का पुलिस ने ही उड़ाया मखौल
- सोनोग्राफी करने वाले धरा डायग्नोटिक सेंटर की भूमिका को लेकर भी कार्रवाई में कोई स्पष्टता नहीं
- क्या कारण थे कि रंगे हाथों पकड़ीं गयी महिला चिकित्सक को गिरफ्तार नहीं किया, जबकि आमतौर पर ऐसे मामलों में भ्रूण लिंग निर्धारण करने वाले डॉक्टर की गिरफ्तारी होती है
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर के एमबी हॉस्पिटल रोड चेतक सर्किल स्थित अमर आशीष हॉस्पिटल की डॉ. नीना सक्सेना को भ्रूण लिंग परीक्षण के आरोप में पकड़ने वाली राजस्थान सरकार की पीसीपीएनडीटी टीम ही सवालों के घेरे में आ गयी है। स्वास्थ्य विभाग की पीसीपीएनडीटी सेल में तैनात पुलिस टीम की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं, कि कहीं इस मामले में पुलिस मैनेज तो नहीं हो गयी? क्या कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम ही डॉक्टर को बचाना चाहती है? क्यों विभाग के निदेशक (आईएएस) डॉ. अमित यादव और कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (आरपीएस) डॉ. हेमन्त जाखड़ के बयानों और कार्रवाई में विरोधाभास हैं।
स्वास्थ्य विभाग बता रहा है कि डॉ. नीना सक्सेना को भ्रूण लिंग परीक्षण के आरोप में गिरफ्तार किया गया, वहीं कार्रवाई में शामिल एडि.एसपी हेमंत जाखड़ ने कहा हमने बीएनएसएस की धारा 35/3 के तहत नोटिस देकर महिला चिकित्सक को छोड़ दिया है, गिरफ्तार नहीं किया है।
गिरफ्तार नहीं करने के कारण किसी के गले नहीं उतर रहे..
नेशनल हेल्थ मिशन के निदेशक और पीसीपीएनडटी के राज्य समुचित प्राधिकारी अध्यक्ष डॉ. अमित यादव के बयान के साथ जारी प्रेस रिलीज में यह स्पष्ट कहा गया है कि जैसे ही अमर आशीष हॉस्पिटल की संचालक डॉ. नीना सक्सेना ने डिकॉय गर्भवती महिला को उसके गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग बताया, इशारा पाते ही एडि.एसपी हेमंत जाखड़ के निर्देशन में पुलिस निरीक्षक मंजू मीणा ने टीम सहित छापा मारा और डॉ. नीना सक्सेना को गिरफ्तार किया और उनसे डिकॉय राशि 30 हजार रूपए भी बरामद की। डॉ. अमित यादव की तरफ से जारी यह प्रेसनोट राजस्थान सरकार के डीआईपीआर की अधिकृत वेबसाइट पर भी जारी हुआ है।
वहीं इस कार्रवाई का निर्देशन कर रहे पीसीपीएनडीटी सेल के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमंत जाखड़ ने बताया कि हमने डॉ. नीना सक्सेना को गिरफ्तार नहीं किया, उनको बीएनएसएस की धारा 35/3 के तहत नोटिस देकर छोड़ दिया है। गिरफ्तार नहीं करने का जब कारण पूछा गया तो एडि.एसपी हेमंत जाखड़ ने बताया कि चिकित्सक महिला हैं, कार्रवाई करते-करते सूर्यास्त हो गया था, उन्हें गिरफ्तार करते तो हमें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) को बताना पड़ता कि सूर्यास्त के बाद गिरफ्तार क्यों किया।
यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि डॉ. नीना सक्सेना को पकड़ने वाली पुलिस निरीक्षक मंजू मीणा खुद महिला हैं। ऐसे में गिरफ्तार नहीं करने का यह कारण गले नहीं उतरता। क्यों कि नियमानुसार कार्रवाई के लिए पहुंची टीम में महिला पुलिस निरीक्षक थीं।
राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की वेबसाइट पर 8 जनवरी को जारी इस कार्रवाई का प्रेसनोट–

सीजेएम को बताना पड़ता तो बता देते, सूर्यास्त से आरोप की गंभीरता तो कम नहीं होती
सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस 3 से 5 साल की सजा वाले अन्य अपराधों में भी आरोपी को यह कहकर छोड़ती है कि सूर्यास्त के बाद महिला को गिरफ्तार करते तो सीजेएम को बताना पड़ता। विशेषज्ञों ने बताया कि पीसीपीएनडीटी टीम ने पूर्व में इस तरह की कार्रवाई की है तो डिकॉय ऑपरेशन के दौरान आरोपी गिरफ्तार हुए हैं। सीजेएम को बताना पड़ता तो बता देते। सूर्यास्त होने से अपराध की गंभीरता कम नहीं होती। सूर्यास्त का बहाना बनाकर महिला चिकित्सक को गिरफ्तार न करना पुलिस की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
3 से 5 साल की सजा का प्रावधान है
पीसीपीएनडीटी एक्ट (गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध)) अधिनियम के तहत लिंग निर्धारण करने वाले डॉक्टर, क्लिनिक को 3 से 5 साल तक की जेल और 10 हजार से एक लाख रूपए जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
सोनोग्राफी करने वाले धरा डायग्नोटिक्स सेंटर के रेडियोलॉजिस्ट की भूमिका भी संदेह के घेरे में
पीसीपीएनडीटी टीम डॉ. नीना सक्सेना को पकड़ने के बाद मधुबन स्थित धरा डायग्नोटिक्स सेंटर पहुंची, क्यों कि सोनोग्राफी वहीं हुई थी। रिकॉर्ड चेक किया, रेडियोलॉजिस्ट से पूछताछ भी की। लेकिन टीम ने डायग्नोटिक्स सेंटर के इस रैकेट में मिलीभगत को लेकर कोई स्पष्टता नहीं की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोनोग्राफी के दौरान रेडियोलॉजिस्ट को भ्रूण लिंग का पता चल सकता है, लेकिन उसका सोनोग्राफी रिपोर्ट में कोई हवाला नहीं दिया जाता। ऐसे में धरा डायग्नोटिक्स की सोनोग्राफी देखकर डॉ. नीना सक्सेना ने अगर भ्रूण लिंग की पहचान डिकॉय गर्भवती महिला को बतायी तो इसमें धरा के रेडियोलॉजिस्ट की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ जाती है।
हम जांच में कर रहे सहयोग – पर्वत सिंह देवड़ा, संचालक धरा डायग्नोस्टिक्स सेंटर
धरा डायग्नोटिक्स के संचालक पर्वत सिंह देवड़ा ने बताया कि बुधवार को पीसीपीएनडीटी की टीम आयी थी। उन्होंने जो रिकॉर्ड मांगे हमने सभी दिखाए, रेडियोलॉजिस्ट से भी पूछताछ की। यहां रूटीन में रोज 50-60 सोनाग्राफी होती है, उक्त महिला की सोनोग्राफी भी पूरी प्रक्रिया मे तहत डॉक्टर नीना सक्सेना के पर्चे के आधार पर की गयी और रिपोर्ट दे दी गयी थी। हमारे यहां किसी प्रकार के नियम का उल्लंघन या आपराधिक कृत्य नहीं हुआ। पीसीपीएनडीटी की टीम ने कहा कि आगे मामले की जांच में जब भी जरूरत पड़ेगी वे बुलाएंगे। हम जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।
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