सीडब्ल्यूसी गोवा ने जीरो नंबर एफआईआर दर्ज कर उदयपुर के फतहनगर थाने भेजी, गोवा में गुब्बारे और खिलौने बेचती की गयी थी रेस्क्यू
क्या बच्ची के माता-पिता भी बनेंगे आरोपी : सामाजिक कुप्रथा का दंश झेल रही थी यह बच्ची
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। गोवा पुलिस ने नव वर्ष के सेलीब्रेशन के दौरान गुब्बारे और खिलौने बेच रही 15 वर्षीय एक बालिका का रेस्क्यू किया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। वह 15 वर्षीय बालिका गर्भवती थी और उदयपुर के फतहनगर क्षेत्र की रहने वाली थी। इस उम्र में सामाजिक कुप्रथा और गर्भावस्था का दंश झेल रही वह बच्ची जीवन यापन के लिए सड़कों और समुद्र के बीच पर गुब्बारे, खिलौने बेचने को मजबूर थी। udaipur pregnant minor girl rescued in goa, udaipur police lodged FIR in rape allegation
उदयपुर के फतहनगर थानाधिकारी चन्द्रशेखर किलानिया ने बताया कि गोवा के फुटपाथ पर गुब्बारे और खिलौने बेचते हुए बच्ची रेस्क्यू की गयी थी। गोवा की बाल कल्याण समिति ने बच्ची की काउंसलिग कर उससे जानकारी ली तो पता चला कि उदयपुर के फतहनगर क्षेत्र की वह बच्ची बाल विवाह का दंश झेल रही थी। यह जिंदगी उसे किसी और ने नहीं, उसके माता-पिता ने ही दी थी। बच्ची ने गोवा बाल कल्याण समिति को बताया कि वह राजस्थान के उदयपुर के फतहनगर की रहने वाली है। एक वर्ष पहले जब वह 14 वर्ष की थी, उसके माता-पिता ने उसकी उदयपुर के ही युवक के साथ शादी करवा दी थी। तब से वह ससुराल में रह रही है, इस बीच वह गर्भवती हो गयी। जीवन यापन के लिए धन कमाने वह दिसंबर में उसके पति और सास के साथ नववर्ष से पूर्व गुब्बारे, खिलौने बेचने के लिए गोवा पहुंची थी।
दुष्कर्म के आरोप, पोक्सो एक्ट और बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत दर्ज हुई एफआईआर
थानाधिकारी चन्द्रशेखर ने बताया कि गोवा की पणजी बाल कल्याण समिति अध्यक्ष सुषमा चांडेकर ने जीरो नंबर एफआईआर दर्ज कर उदयपुर भेजी है। जिसके आधार था फतहनगर थाने में पोक्सो एक्ट की धारा 4, 8, 12, बाल विवाह निषेध अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(1) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गयी है। बच्ची को गोवा सीडब्ल्यूसी ने फतहनगर में उसके माता-पिता को सुपुर्द किया है। बच्ची और माता-पिता के स्टेटमेंट लेने के बाद अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।
कानून के अनुसार बच्ची के माता-पिता, सास, पति सभी आरोपी बनाए जा सकते हैं
बाल विवाह कानूनी अपराध है, इसके अलावा 15 वर्षीय बच्ची का गर्भवती होना दुष्कर्म की श्रेणी में आएगा, क्यों कि कानून के तहत नाबालिग बच्ची की रजामंदी मायने नहीं रखती। ऐसे में कानून के अनुसार इस मामले में बच्ची का बाल विवाह करवाने वाले माता-पिता और पति, सास सहित अन्य लोग आरोपी बनाए जा सकते हैं।
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