- राजस्थान के पहले मेडिकल कॉलेज में USFDA प्रमाणित रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध
- डॉक्टर की सलाह अनुसार चलें तो रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट करीब 25 वर्ष तक काम करता है
- रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण के लिए अब नहीं जाना पड़ेगा पड़ोसी राज्य
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। गीतांजली मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) में USFDA प्रमाणित VELYS रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट (रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण) सर्जरी की सफल शुरूआत हुई है। जीएमसीएच के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. रामावतार सैनी और डॉ. हरप्रीत सिंह के नेतृत्व में टीम ने सेक्टर 8 निवासी 69 वर्षीय बुजुर्ग की सफल रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की। डेढ़ वर्ष से घुटनों के दर्द से परेशान और चलते-फिरने में अक्षम हुए बुजुर्ग सर्जरी के अगले दिन ही चलने-फिरने में सक्षम हो गए हैं।
गीतांजली मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अंकित अग्रवाल ने बताया कि इस अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक ने घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी को और अधिक सटीक, सुरक्षित बना दिया है। इसका सीधा फायदा मरीजों को होगा। खासबात है कि गीतांजली मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल प्रदेश का पहला मेडिकल कॉलेज है जहां मरीजों को रोबोटिक टेक्नोलॉजी के साथ नी रिप्लेसमेंट की सुविधा उपलब्ध होगी, अभी तक उदयपुर संभाग के मरीजों को इसके लिए पड़ोसी राज्यों की तरफ रूख करना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की सुविधा गीतांजली हॉस्पिटल में ही उपलब्ध होगी। गीतांजली हॉस्पिटल के प्रबंधन ने यह भी निर्णय लिया है कि रोबोटिक सर्जरी का मरीजों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। वीडियो पर क्लिक कर जानिए रोबोटिक घुटना प्रत्योरोपण के बारे क्या बोले हॉस्पिटल प्रबंधन और चिकित्सक:-
रोबोटिक रिजल्ट सर्जन को रिप्लेस नहीं करते, बल्कि सर्जरी को 100 प्रतिशत सटीक बनाते हैं
गीतांजली हॉस्पिटल के सीईओ ऋषि कपूर ने बताया कि रोबोटिक तकनीक ऑपरेशन थिएटर में हमारे अनुभवी सर्जन को रिप्लेस नहीं करती, बल्कि सर्जरी को ज्यादा बेहतर और सटीक बनाती है। घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी हमारे अनुभवी डॉक्टर ही करते हैं, लेकिन VELYS रोबोटिक तकनीक सर्जन को रीयल-टाइम डाटा और इमेजलेस प्लानिंग प्रदान करती है, जिससे प्रत्येक मरीज की शारीरिक संरचना के अनुरूप सटीक घुटना प्रत्यारोपण किया जा सकता है। प्री सर्जरी और पोस्ट सर्जरी यह 2 एमएम के मार्जिन को भी सटीकता के साथ पकड़ कर एनालिसिस कर 100 प्रतिशत सटीक रिपोर्ट देता है। इससे सर्जरी अत्यंत सटीकता के साथ होती हैं। परिणामस्वरूप मरीजों की रिकवरी जल्दी होती है, ऑपरेशन में छोटा चीरा लगने से दर्द कम होता है और दीर्घकालिक स्थिरता प्राप्त होती है।
VELYS Robotic-Assisted Solution प्रणाली पूरी तरह इमेजलेस और सर्जन-नियंत्रित है, जो ऑपरेशन के दौरान घुटने की हड्डियों और लिगामेंट्स का संतुलन बनाते हुए अत्यंत सटीक अलाइनमेंट सुनिश्चित करती है। सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह हर मरीज की शारीरिक बनावट के अनुसार पर्सनलाइज़्ड सर्जरी की सुविधा देती है, जिससे समय, खर्च और अनावश्यक रेडिएशन एक्सपोज़र में कमी आती है।

VELYS Robotic तकनीक की प्रमुख विशेषताएं
- इस तकनीक के लिए मरीज को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा।
- ज्यादा सटीकता, स्थिरता और दीर्घकालिक परिणाम
- सॉफ्ट टिशूज को नुकसान पहुंचाए बगैर छोटे चीरे से सर्जरी हो जाती है
- रिकवरी इतनी जल्दी होती है कि मरीज ऑपरेशन के अगले दिन चलने लगते हैं। मांसपेशियों की कमजोरी लगभग न के बराबर होती है।
- पूरी सर्जरी ज्यादा सुरक्षित, कम दर्द और मरीज के लिए सुविधाजनक है।
- प्रत्येक रोगी के हिसाब से स्पेसिफिक प्लानिंग की सुविधा रहती है।
गोल्ड इम्प्लांट एक स्टैंडर्ड है, जो एनपीपीए ने कोबाल्ट क्रॉमियम इंप्लांट के लिए तय किए हैं
डॉ रामावतार सैनी ने बताया कि National Pharmaceutical Pricing Authority (एनपीपीए) ने कोबाल्ड क्रोमियम से बने इम्प्लांट के लिए जो पैरामीटर्स तय किए हैं, उसे गोल्ड इम्प्लांट कहते हैं। अगर कोई कोबाल्ड क्रोमियम से बने इम्प्लांट पर गोल्डन कोटिंग कर उसे गोल्ड इम्प्लांट बता रहा है तो आमजनता का यह जानना जरूरी है कि गोल्डन कोटिंग से यह गोल्ड इंम्प्लांट नहीं रहेगा, क्यों कि गोल्डन कोटिंग होते ही यह एनपीपीए के पैरामीटर्स में बाहर हो जाता है। एनपीपीए द्वारा तय पैरामीटर्स के अनुसार कोबाल्ड क्रोमियम से बने इम्प्लांट ही गोल्ड इम्प्लांट कहे जाते हैं।
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