प्रति व्यक्ति 210 रूपए है टिकट, हर साल 10 प्रतिशत किराया बढ़ेगा, टेंडर पांच साल का हुआ है
बच्चों का पैरामीटर थोड़ा अजीब : 110 सेंटीमीटर से कम हाईट वाले बच्चों का टिकट आधा लगेगा
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। फतहसागर मध्य स्थित नेहरू गार्डन के जीर्णोद्धार का काम पूरा होने के बाद शुक्रवार को नाव संचालन शुरू कर दिया गया। करीब चार साल बाद शहरवासी और पर्यटक नाव में सवार होकर झील के बीच नेहरू गार्डन देखने जा सकेंगे। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि उदयपुर विकास प्राधिकरण की टेंडर प्रक्रिया में टिकट इतना अधिक तय किया गया है कि क्या सामान्य परिवार नेहरू गार्डन देखने जा पाएगा। udaipur fateh sagar Nehru Garden boat service starts: Tickets price high for average tourist family
शुक्रवार को उदयपुर के सांसद, विधायकों, उप जिला प्रमुख ने बड़े उत्साह के साथ रानी रोड पर बनाए गए नए स्टैंड से नेहरू गार्डन तक नाव संचालन का शुभारंभ किया। नेहरूगार्डन आने जाने का नाव किराया प्रति व्यक्ति 210 रूपए तय किया गया है। इस किराए में हर साल 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। मौजूदा ठेकेदार का 5 साल के लिए ठेका हुआ है। ऐसे में नाव किराए में हर साल 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी के हिसाब से प्रति व्यक्ति किराया करीब 300 रूपए तक हो जाएगा। छोटे बच्चे जिनकी हाईट 110 सेंटीमीटर से कम होगी उनका आधा किराया लगेगा।
सवाल यह उठता है कि उदयपुर के सामान्य परिवार के लोग क्या अपने बच्चे को नेहरू गार्डन दिखाने जा पाएंगे। इससे पहले नेहरू गार्डन तक आने जाने के लिए प्रति व्यक्ति 118 रूपए किराया लगता था। एक सामान्य परिवार में औसतन 4 लोग हैं तो करीब 850 रूपए से 1000 रूपए तो उसे नेहरू गार्डन तक पहुंचने के लिए ही खर्च करने पड़ेंगे।
ठेकेदार क्या करें, यूडीए का नजरिया व्यापारी की तरह हो गया
टिकट ज्यादा है या कम। इसके लिए ठेकेदार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। क्योंकि उसने तो यूडीए की तय रेट के अनुसार प्रतिस्पर्धा में सबसे ज्यादा रेट देकर टेंडर अपने नाम किया। उदयपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारी जनभावना को देखते हुए प्रति व्यक्ति टिकट की दर कम रखकर टेंडर आमंत्रित करते तो, हो सकता प्रतिस्पर्धा कम होती और नेहरू गार्डन देखने के लिए प्रति व्यक्ति टिकट इतना महंगा नहीं होगा। उदयपुर की ये परिसंपत्तियां प्राकृतिक विरासत के रूप में हमें इसलिए नहीं सौंपी हैं कि हम इनको सिर्फ और सिर्फ कमाई का साधन मान बैठे और आमजन को इस विरासत से दूर करते जाए। नेहरू गार्डन का निर्माण 1967 में हुआ था।

नेहरू गार्डन में पानी लेकर नहीं गए तो प्यासा लौटेगा पर्यटक
उदयपुर विकास प्राधिकरण ने नेहरू गार्डन तक नाव संचालन तो शुरू कर दिया, लेकिन अंदर पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं की। 210 रूपए प्रति व्यक्ति टिकट देकर नेहरू गार्डन पहुंचे व्यक्ति को अगर प्यास लगी और वह अगर पानी साथ लेकर नहीं गया होगा तो उसे वहां प्यासा ही रहना होगा। क्यों कि गार्डन के अंदर पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। यह सोचने का विषय है कि नाव संचालन से पहले यूडीए को वहां वाटर कूलर या आरओ लगवाना चाहिए था, लेकिन पर्यटक की इस मूल सुविधा पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
लोकार्पण करने गए जनप्रतिनिधियों ने फोटो तो खिंचाई, लेकिन टिकट पर सवाल नहीं किए
हमारे जनप्रतिनिधि तो सिर्फ फीता काटने के समय तैयार होकर पहुंच जाते। बतौर जनप्रतिनिधि उनका कर्तव्य बनता है कि जन सुविधा के नाम पर कोई टेंडर हो रहा है तो शर्त तैयार होने से पहले यह जरूर देखें कि प्रति व्यक्ति टिकट क्या रखा जा रहा। अगर टिकट ज्यादा लगे तो टेंडर प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही अधिकारियों को पाबंद कर किराए को व्यवहारिक दृष्टि से तय करवाए।
आज नेहरू गार्डन तक नाव संचालन होने के समय सांसद मन्नालाल रावत, चुन्नीलाल गरासिया, विधायक ताराचंद जैन, फूलसिंह मीणा, उप जिला प्रमुख पुष्कर तेली, संभागीय आयुक्त एवं यूडीए चेयरमैन प्रज्ञा केवलरमानी, आईजी गौरव श्रीवास्तव, जिला कलेक्टर नमित मेहता, यूडीए आयुक्त राहुल जैन और नाव संचालन ठेकेदार फर्म के मालिक कैलाश खंडेलवाल सहित कई लोग मौजूद थे।

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