वीडियो और फोटो में देखें मेले की झलकियां: कल महिलाओं का मेला, बाल गृह के बच्चों के बनाए स्कैच को मिली सराहना
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। फतहसागर किनारे और सहेलियों की बाड़ी क्षेत्र में दो दिवसीय पारंपरिक हरियाली अमावस के मेले की गुरूवार को शुरूआत हुई। मेले में आज सुबह से ही लोगों का उत्साही रैला नजर आया। हर उम्र वर्ग के लोगों के शामिल होने से सुबह से ही मेले की रंगत जमी नजर आयी। पुपाड़ियों की पू…पू…पू… के बीच कोई खरीददारी में व्यस्त दिखा, तो कोई खाने पीने की स्टॉलों पर अपनी अपनी पसंद के चटकारे लगाकर मेले की मस्ती में था। फतहसागर की पाल पर पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के कलाकारों की प्रस्तुतियों ने मेले की रौनक और बढ़ा दी। इधर डबोक में धूणीमाता के मेले में भी सुबह से लोगों की भारी भीड़ रही। udaipur hariyali amavasya mela 2025 मेले में मेलार्थियों का वीडियो:-
दूसरे दिन शुक्रवार को महिलाओं का मेला लगेगा। इसमें पुरूष वर्ग का प्रवेश वर्जित रहेगा। उदयपुर में हर साल लगने वाले हरियाली अमावस मेले का मेवाड़ के पारंपरिक एवं सांस्कृतिक नक्शे पर अपना एक गौरवशाली इतिहास है।


बालश्रम और भीक्षावृत्ति नहीं होने दी, जेबकतरों पर रही नजर
मेले में बालश्रम और भीक्षावृत्ति की रोकथाम के लिए पहली बार मेले में बाल अधिकारिता विभाग की स्टॉल लगायी गयी। बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक केके चन्द्रवंशी ने बताया कि विभाग और चाइल्ड लाइन की टीम ने पूरे मेले का सर्वे किया है और सुनिश्चित किया कि मेले में भीक्षावृति न हो और बालश्रम भी न हो। इधर सुरक्षा को लेकर उदयपुर पुलिस का भारी जाब्ता मेले में हर जगह नजर आया। फतहसागर किनारे बंसियों पर खड़े होकर सहित भीड़ के बीच रहकर पुलिसकर्मियों ने जेबकतरों पर नजर रखी।

बच्चों के बनाए स्कैच ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया
फतहसागर पाल पर बाल अधिकारिता विभाग की स्टॉल पर ही बाल गृह के बच्चों के बनाए स्कैच आकर्षण का केन्द्र बनें। माता-पिता के नहीं होने से सरकार के संरक्षण में चित्रकूट नगर स्थित राजकीय बाल गृह में रह रहे कुछ बच्चे इतने टैलेंटेड हैं कि वे तस्वीर को देखकर हू-ब-हू स्कैच बना देते हैं। मेले में इन बच्चों के स्कैच और बालिका गृह की बच्चियों द्वारा बनाए गए लाफिंग बुद्धा को खूब सराहना मिली, यहां तक कि इनके बनाए प्रोडक्ट्स को कई लोग खरीदकर भी ले गए।

चित्रकूट नगर स्थित राजकीय बाल गृह के अधीक्षक पंकज पचार ने बताया कि ये बच्चे उन लाखों बच्चों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं, जिनके पास सबकुछ है, लेकिन किसी छोटी सी बात पर जीवन में हार मान लेते हैं। इन बच्चों के सिर पर माता-पिता का साया नहीं है और लंबे समय से बाल गृह में रह रहे हैं, उपलब्ध संसाधनों में ये बच्चे न सिर्फ खुश रहते हैं, बल्कि बिना किसी प्रशिक्षण के ये हर दिन अपनी योग्यता को निखार रहे हैं। हम प्रयास कर रहे हैं कि स्कैच बनाने में जो बच्चे कुशल है, उन्हें कहीं से अच्छी ट्रेनिंग दिलवा सकें, ताकि उनका टैलेंट निखर सके।



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