केमिकल कंपाउण्ड की मात्रा के लिये एआई आधारित ऑटोमेशन टूल का उपयोग
उदयपुर। हिन्दुस्तान जिंक ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने के एआई संचालित ऑटोमेशन टूल लॉन्च किया है। यह टूल एआई और मशीन लर्निंग-आधारित मॉडल का उपयोग कर जिंक डस्ट, सोडियम सल्फेट, लाइम और सीमेंट जैसे कच्चे माल के उपयोग को अनुकूलित करता है। जिससे गुणवत्तापूर्ण उत्पादन सुनिश्चित होता है। यह सिस्टम पुराने डेटा पर आधारित है, जो इसे ऑपरेशन में होने वाली प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के लिए पूर्वानुमान की भविष्यवाणी करने और उन्हें अनुकूलित करने में सक्षम बनाता है। Hindustan Zinc Integrates AI to Optimize Zinc Production Processes
हिन्दुस्तान जिंक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, कंप्यूटर विजन, ड्रोन तकनीक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और ऑगमेंटेड रियलिटीध्वर्चुअल रियलिटी जैसी तकनीकों का उपयोग कर रहा है। इन प्रोजेक्ट्स से प्रोसेस को बेहतर बनाने, धातु की रिकवरी, एसेट की विश्वसनीयता, उत्पादकता और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में सुधार हो रहा है। ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार कर इस तकनीक के इस्तेमाल से कंपनी ने मैन्युअल काम और कच्चे माल पर निर्भरता कम की है।
वेदांता के ग्लोबल कॉरपोरेट एक्सेलेरेटर वेदांता स्पार्क के तहत रिपिक एआई नामक डीप-टेक स्टार्टअप के सहयोग से विकसित किया गया है। यह डिजिटल बदलाव हिन्दुस्तान जिंक की तीन मुख्य स्मेल्टिंग इकाइयों चित्तौड़गढ़ में चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स, राजसमंद में दारीबा स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स और उदयपुर में जिंक स्मेल्टर देबारी में किया गया है। इस कदम से हिन्दुस्तान जिंक का लक्ष्य तकनीकी नवाचार और ऑटोमेशन का उपयोग कर इंटेलिजेंट एंटरप्राइज बनना है।
कंपनी की डिजिटल पहल पर हिन्दुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि नई तकनीकों को अपनाने से हम नए समाधान बना पा रहे हैं और उद्योग में सबसे आगे रह पा रहे हैं। पहले जो काम इंसान करते थे, अब उसे ऑटोमेट करके हम इंसानी निर्भरता कम कर रहे हैं। रियल-टाइम जानकारी पा रहे हैं और कच्चे माल की खपत को बेहतर करके अच्छे नतीजे प्राप्त कर रहे हैं।


