इनकम टैक्स छूट के लिए मीडिएटर संस्थानों, डमी पॉलिटिकल पार्टीज और चार्टर्ड अकाउंटेंट के ऑर्गेनाइज्ड बोगस क्लैम रैकेट पर पहली बार हुई कार्रवाई
- डमी पॉलिटिकल पार्टी में डोनेशन देकर 90 प्रतिशत वापस कैश ले लिया, कुछ ने तो डोनेशन दिए बगैर एंट्री दिखाकर क्लैम उठा सरकार को लगाया चूना
लकी जैन,उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। देशभर में चल रहे अभियान के तहत आयकर विभाग की उदयपुर और अजमेर की टीम ने भीलवाड़ा, विजयनगर, बेगूं और कोटा में कार्रवाई करते हुए इनकम टैक्स भुगतान में बोगस क्लैम के 50 करोड़ रूपए से अधिक के स्कैम का खुलासा किया है। 2000 से अधिक टैक्सपेयर आयकर विभाग की रडार पर हैं, आयकर अधिनियम के लाभकारी प्रावधानों का दुरूपयोग कर स्कैम किया जा रहा था, जिसमें और बड़े खुलासे होने की संभावना है। इसमें आईटीआर तैयार करने वाले कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और मीडिएटर संस्थानों, डमी पॉलिटिकल पार्टीज के संगठित रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। Income Tax Department Cracks Down on Bogus Claims of Deductions & Exemptions
राजस्थान में यह पूरी कार्रवाई आयकर विभाग के प्रधान निदेशक (अन्वेषण) अवधेष कुमार और अपर निदेशक (अन्वेषण) भैराराम चौधरी के निर्देशन में सहायक निदेशक (अजमेर) ललितेश मीणा और सहायक निदेशक (उदयपुर) माया चहार के नेतृत्व में चल रही है।
विश्लेषण में पता चला है कि यह स्कैम इतने ऑर्गेनाइज तरीके से हो रहा था कि सीए की मदद से कई आयकर दाताओं ने बिना डोनेशन दिए सिर्फ दस्तावेजों में फर्जी एंट्री कर टैक्स छूट प्राप्त की और क्लैम उठा लिए। कोटा में एक ऐसा केस पकड़ा गया, जिसमें धर्मार्थ संस्थान में डोनेशन दी नहीं, लेकिन फर्जी एंट्री कर उसके नाम से टैक्स छूट प्राप्त कर ली। गुजरात में करीब 26 और भीलवाड़ा के 15-20 मीडिएटर्स के जरिए ऐसी डमी पॉलिटिकल पार्टीज चिह्नित हुई हैं, जो टैक्सपेयर से डोनेशन लेकर अपना 5 से 10 प्रतिशत कमीशन रखकर पूरा पैसा वापस लौटा रही थीं। कुछ लोग ऐसे भी पकड़े गए, जिन्होंने अत्यधिक रिफंड का दावा करने के लिए फर्जी टीडीएस रिटर्न तक जमा कर दिए।
आयकर एक्ट की धारा 80 जीजीसी का उठाया फायदा: भीलवाड़ा गढ़ बना हुआ है
कार्रवाई में खुलासा हुआ है कि ऐसी कई डमी पॉलिटिकल पार्टीज हैं, जिन्होंने खुद को इलेक्शन कमीशन में पंजीकृत करवाया हुआ है, लेकिन उन्होंने न तो कभी चुनाव लड़ा और न ही राजनीति में एक्टिव हैं। इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 80GGC के तहत पॉलिटिकल पार्टी को दी गयी डोनेशन में 100 प्रतिशत छूट मिल जाती है। गुजरात में करीब 26 और भीलवाड़ा के 15-20 मीडिएटर्स के जरिए ऐसी डमी पॉलिटिकल पार्टीज चिह्नित हुई हैं, जो डोनेशन प्राप्त कर उसका 5 से 10 प्रतिशत कमीशन रखकर डोनेशन की बची राशि आयकर दाता को नकद वापस लौटा रही थीं।
इस प्रकार आयकर दाता को डोनेशन राशि वापस मिल रही थी और उसे टैक्स में 100 प्रतिशत छूट भी प्राप्त हो रही थी। इनमें ज्यादातर मल्टी नेशनल कंपनियों, सार्वजनिक उपक्रमों, सरकारी निकायों, शैक्षणिक संस्थानों और उद्यमियों के कर्मचारी शामिल हैं। इस तरह के स्कैम के लिए भीलवाड़ा लंबे समय से गढ़ बना हुआ है।
धर्मार्थ संस्थान या ट्रस्ट में डोनेशन दिखाकर छूट ली, लेकिन डोनेशन दी ही नहीं
आयकर विभाग की टीम ने कोटा में एक ऐसे सीए पर कार्रवाई की, जिसने उसके टैक्सपेयर क्लाइंट से डोनेशन दिलवाए बगैर ही उन्हें इनकम टैक्स में छूट दिलवा दी। एक केस में धर्मार्थ संस्थान में डोनेशन दिखाकर इनकम टैक्स छूट प्राप्त कर ली, जब आयकर टीम ने चेक किया तो पता चला कि उसके जरिए धर्मार्थ संस्थान में कभी डोनेशन दी ही नहीं गयी। कुछ लोग ऐसे भी निकले जिन्होंने अत्यधिक रिफंड का दावा करने के लिए झूठे टीडीएस रिटर्न तक जमा किए।
इन धाराओं का हो रहा सबसे ज्यादा दुरूपयोग
जांच में पता चला है कि सीए और दूसरे मीडिएटर्स द्वारा संगठित तौर पर आयकर अधिनियम की धारा 10(13A), 80GGC, 80E, 80D, 80EE, 80EEB, 80G, 80GGA और 80DDB के तहत मिलने वाली आयकर छूट के प्रावधानों का बड़े स्तर पर दुरुपयोग किया जा रहा है।
आयकर विभाग की अपील
आयकर विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार उनकी कार्रवाई के दौरान ज्यादातर करदाताओं ने अपनी गलती मानी है और अपडेट रिटर्न कर उनकी गलती में सुधार किया है। आयकर विभाग ने अपील की है कि अभी तक किसी करदाता ने फर्जी एंट्री कर आयकर अधिनियम के तहत मिलने वाली छूट का दुरूपयोग किया है तो वे अपडेट रिटर्न कर गलती सुधार सकते हैं। अन्यथा आयकर विभाग द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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