तनवीर सिंह कृष्णावत, उनके पिता, भाई, भतीजे सहित अन्य के खिलाफ अंबामाता थाने में एफआईआर दर्ज
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर शहर में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति में काफी सक्रिय रहे तनवीर कृष्णावत और उनके परिवार के खिलाफ 6.70 करोड़ रूपए की धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज हुई है। प्रार्थी गार्गी सामर ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उनके पिता राजेश जैन से होटल प्रोजेक्ट में साझेदारी के नाम पर 6 करोड़ 70 लाख रूपए का निवेश करा लिया और जब होटल बन गया, तो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वह संपत्ति किसी और के नाम कर प्रार्थी के साथ धोखाधड़ी की है। udaipur: rs 6.70 crore Fraud FIR against tanveer singh krishnawat in ambamata police station udaipur
उदयपुर शहर में महाप्रज्ञ विहार निवासी गार्गी सामर ने हरिदास जी की मगरी निवासी तनवीर कृष्णावत, उनके पिता मनोहर सिंह, भाई मनवीर सिंह, भतीजा विक्रमादित्य सिंह कृष्णावत सहित टेक्नोक्रेट सोसायटी निवासी दिव्य जैन पुत्र अमित जैन, शिवाजी नगर निवासी भूपेन्द्र कुमार जैन पुत्र मणिलाल जैन, फतहपुरा निवासी प्रतीक सुहालका पुत्र राजेश सुहालका के खिलाफ होटल प्रोजेक्ट में 6.70 करोड़ रूपए निवेश कराकर धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज करवाया है।
दोस्ती और भरोसे का फायदा उठाकर की धोखाधड़ी
प्रार्थी गार्गी सामर ने बताया कि उसके पिता राजेश जैन और तनवीर कृष्णावत में दोस्ती थी। इस दौरान तनवीर कृष्णावत और उनके पिता मनोहर सिंह ने प्रार्थी के पिता राजेश जैन को प्रस्ताव देते हुए बताया कि उनकी हरिदास जी की मगरी में रिहायशी प्रोपर्टी “थाणा हाउस” है, जिसे वे लोग होटल में परिवर्तित कर रहे हैं। यह बेहद प्रीमियम होटल होगा। भूमि सहित निर्माण की कुल लागत करीब साढ़े छह करोड़ रूपए होगी। अगर राजेश जैन इसमें निवेश करते हैं तो होटल संचालन में साझेदार के तौर पर उन्हें अच्छा लाभ होगा। इस होटल प्रोजेक्ट में निवेश के लिए राजेश जैन तैयार हो गए और इधर होटल का कार्य शुरू हो गया। प्रार्थिया ने बताया कि उनके पिता ने होटल के एक्सटीरियर और इंटीरियर वर्क के लिए टुकड़ों-टुकड़ों में 6 करोड़ 70 लाख रूपए आरोपी पक्ष को दिए।
6.70 करोड़ निवेश के बाद भी प्रार्थी को न होटल मिला, न उससे होने वाली आय
2023 तक 30 कमरों का सुसज्जित होटल का निर्माण करीब-करीब पूरा हुआ, तो राजेश जैन ने तनवीर कृष्णावत और उनके परिवार से होटल संचालन के लिए फर्म बनाने की बात कही। प्रार्थिया का आरोप है कि आरोपीगण शुरूआत में टालते रहे और बाद में प्रार्थिया को पता चला कि मनोहर सिंह ने यह संपत्ति कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर पौते विक्रमादित्य को डिफ्ट डीड कर दी है और बाद में प्रार्थी की बिना सहमति के होटल संचालन के लिए किराए पर दे दिया। प्रार्थिया ने आरोप लगाया है कि उसने जब आरोपीगण से होटल संचालन में प्राप्त किराए और बतौर साझेदार होटल के विक्रय विलेख के पंजीयन कराने का तकाजा किया, तो आरोपीगणों ने विक्रय विलेख पंजीयन से साफ इनकार कर होटल की तरफ नहीं आने के लिए धमकाया।
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