वन समितियों से जुड़ी आदिवासी महिलाओं ने फूलों, पत्तियों और अरारोट से बनाया चार रंगों का 100% हर्बल गुलाल
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। होली पर रंग-गुलाल के साथ खेलना सबको पसंद है और ये रंग-गुलाल अगर 100 प्रतिशत हर्बल हो तो होली खेलने का उत्साह दो गुना हो जाता है। उदयपुर के वन विभाग की वनसमितियों से जुड़ी आदिवासी महिलाओं द्वारा तैयार किया गया 100 प्रतिशत हर्बल गुलाल हमारी होली में रंग भरेगा। इस वर्ष उदयपुर वन विभाग के उत्तर, दक्षिण सभी मंडलों में करीब 2000 किलो (20 क्विंटल) हर्बल गुलाल तैयार हुआ है। गुलाबी, केसरिया, हरे और पीले रंगे का गुलाल फूल, पत्तियों, चुकंदर और अरारोट से बनाया गया है, ऐसे में यह त्वचा को किसी प्रकार से नुकसान नहीं पहुंचाता। holi special udaipur tribal women making herbal gulal to use flowers with support of forest department udaipur

राजस्थान, दिल्ली, गुजरात सहित अन्य राज्यों के कोरपोरेट ऑफिस से भी है डिमांड
खासबात है कि उदयपुर के आदिवासी क्षेत्र में बनाए गए इस हर्बल गुलाल की डिमांड हर वर्ष बढ़ रही है। इस वर्ष भी राजस्थान सहित दिल्ली, गुजरात के कोरपोरेट ऑफिसों से यह हर्बल गुलाल उनकी डिमांड पर सप्लाई किया गया है। यहां तक कि उदयपुर आए विदेशी पर्यटक भी इस हर्बल गुलाल को साथ लेकर जा रहे हैं। वन विभाग के वनपाल धर्मेन्द्र सक्सेना ने बताया कि उदयपुर शहर में यह हर्बल गुलाल चेतक सर्किल पर मोहता पार्क के सामने वन भवन के गेट पर, वन विभाग के नॉर्थ मंडल कार्यालय के बाहर और फतहसागर पाल के पास उपलब्ध होगा, जहां से आमजन ले सकते हैं।

फूल और गुलाल
- गुलाब और कचनार के फूलों से गुलाबी गुलाल
- पलाश के फलों से केसरिया गुलाल
- अमलताश के फुलों से पीला गुलाल
- चुकंदर से लाल गुलाल
- पत्तियों से हरा गुलाल

ऐसे तैयार करते हैं गुलाल
वन विभाग के रेंजर सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि फूलों में गुलाब, कचनार, पलाश, अमलताश के फूलों को इकट्ठा करते हैं। इन्हें देशी चूल्हों पर उबालकर इनसे रंग और रस निकाला जाता है। फिर इस रस को अरारोट के आटे में मिलाते हैं। इस पूरे मैटेरियल को बारीक पीसकर, सुखाकर और छानकर इसमें अरारोट का आटा मिलाते हैं और सुगंधित अर्क डालकर हर्बल गुलाल तैयार किया जाता है। इसमें उदयपुर के आदिवासी क्षेत्र की महिलाओं की काफी मेहनत लगती है।

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