एआर लाइव न्यूज। मौद्रिक नीति समिति (MPC) की 53वीं बैठक 5 से 7 फरवरी 2025 तक भारतीय रिजर्व बैंक आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई। इसमें आरबीआई ने रेपो रेट घटायी है। इसका सीधा असर बैंक लोन और ईएमआई पर दिखायी देगा। बैंक लोन सस्ते हो सकते हैं और ईएमआई भी घटेगी। बैठक में एमपीसी के सदस्य डॉ. नागेश कुमार, सौगत भट्टाचार्य, प्रो. राम सिंह, डॉ. राजीव रंजन और एम राजेश्वर राव शामिल हुए। RBI Reduced repo rate
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एमपीसी बैठक में लिए गए निर्णयों की आज शुक्रवार को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि liquidity adjustment facility (LAF) के अंतर्गत नीतिगत रेपो रेट 6.50 प्रतिशत को तत्काल प्रभाव से 25 basis points घटाकर 6.25 प्रतिशत किया है, परिणामस्वरूप स्थायी जमा सुविधा (SDF) दर 6.00 प्रतिशत तथा marginal standing facility (एमएसएफ) दर और बैंक दर 6.50 प्रतिशत समायोजित हो जाएगी।
क्या होती है रेपो रेट और किसके लोन की घटेगी ईएमआई
RBI जिस इंटरेस्ट रेट पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। बैंक इसी कर्ज से अपने कस्टमर्स को लोन देते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक से मिलने वाले कई तरह के लोन सस्ते हो जाएंगे। रेपो रेट के कम होने का सीधा मतलब है कि बैंकों से मिलने वाले लोन का इंटरेस्ट रेट भी कम होगा।
वहीं जिन लोगों के बैंक से लोन चल रहे हैं, उनकी ईएमआई भी घटेगी। बैंक द्वारा कस्टमर को दिए लोन की ब्याज दरें 2 तरह की होती हैं। एक फिक्स्ड और दूसरी फ्लोटर। फिक्स्ड है तो रेपो रेट में बदलाव का कोई फर्क नहीं पड़ेगा और जिस ब्याज दर से लोन शुरू हुआ है, वही ईएमआई चलेगी। लेकिन अगर लोन फ्लोटर ब्याज दर पर है, तो रेपो रेट में बदलाव का लोन की ब्याज दर पर फर्क पड़ता है, फ्लोटर ब्याज दर पर लोन लिया है तो ईएमआई भी घट जाएगी।

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