- देशभर से ख्यातनाम पक्षीविद, पर्यावरण प्रेमियों ने की शिरकत
- पेंटिंग व क्विज स्पर्धा में दिखाया उत्साह: सूचना केंद्र में पक्षी आधारित चित्र व डाक टिकट प्रदर्शनी शुरू
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। वन विभाग के ओर से उदयपुर बर्ड फेस्टिवल के 11वें संस्करण का शुक्रवार को सिसारमा रोड़ स्थित गोल्डन पार्क में शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय बर्ड फेस्टिवल के पहले दिन बर्ड वॉचिंग, स्कूली बच्चों के लिए पेंटिंग व क्विज स्पर्धाएं हुई। वहीं सूचना केंद्र परिसर में पक्षी आधारित फोटो एवं डाक टिकट प्रदर्शनी का भी शुभारंभ हुआ। दोपहर बाद ओटीएस परिसर में नेचर लिट्रेरी फेस्टिवल और कांफ्रेन्स में देश भर से आए ख्यातनाम पक्षी एवं पर्यावरण विशेषज्ञों ने भाग लिया। Udaipur Bird Festival 2025
उदयपुर बर्ड फेस्टिवल का उद्घाटन करते हुए सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने कहा कि भारत में पक्षी और पर्यावरण संरक्षण लोक जीवन का हिस्सा रहा है। आज भी गांव-देहातों में बड़े-बुजुर्गों द्वारा कटे हुए नाखूनों को इधर-उधर न फेंकने का सुझाव देते हैं, क्यों कि कटे हुए नाखून यदि खुले में फेंके, तो चिड़िया इसे चावल समझ कर खा जाएगी और इससे उसकी मौत भी हो सकती है। भारतीय जीवन शैली में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं। उन्होंने बर्ड फेस्टिवल जैसे आयोजनों को युवा पीढ़ी के लिए काफी महत्वपूर्ण बताते हुए ऐसे कार्यक्रमों का दायरा बढ़ाने की भी आवश्यकता जताई। विधायक ताराचंद जैन ने उदयपुर बर्ड फेस्टिवल 2025 को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से प्रेषित शुभकामना संदेश का वाचन किया। Udaipur Bird Festival 2025

पक्षियों की अठखेलियां निहारी, टेटू बनवाए
इस अवसर पर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के सीईओ रवि सिंह, अतिरिक्त जिला कलक्टर प्रशासन दीपेंद्र सिंह राठौड़, ख्यातनाम पक्षीविद् और बोम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के पूर्व निदेशक असद आर रहमानी, बीएनएचएस के रजत भार्गव, आंनदों बनर्जी, सेवानिवृत्त आईएएस विक्रमसिंह, सेवानिवृत्त वन अधिकारी आरके सिंह, आईपीएस मथारू, राजपाल सिंह, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण सदस्य राहुल भटनागर, मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव एस आर वी मूर्थी, मुख्य वन संरक्षक सुनील छिद्री, उप वन संरक्षक वन्यजीव डीके तिवारी, उप वन संरक्षक मुकेश सैनी, उप वन संरक्षक उत्तर अजय चित्तौड़ा सहित अन्य गण, पर्यावरण व पक्षी प्रेमी व स्कूल स्टूडेंट्स मौजूद रहे।
बर्ड फेस्टिवल के तहत पिछोला झील के पार्श्व भाग में बर्ड वॉचिंग की भी व्यवस्था की गई। यहां पक्षी विशेषज्ञों ने बच्चों को बायनोकूलर की मदद से पक्षी दर्शन कराया तथा पक्षियों की जानकारी भी दी। झील के छिछले पानी में अठखेलियां करते पक्षियों को देखकर बच्चों के चेहरे खिल उठे। वहीं आयोजन स्थल पर बच्चों ने प्राकृतिक रंगों से पक्षियों के टेटू भी अपने चेहरे और हाथों पर मुद्रित कराए।

पक्षियों के जीवन आधारित प्रतियोगिताओं में स्कूल स्टूडेंट्स ने दिखाया उत्साह
उद्घाटन समारोह के बाद सीनियर और जूनियर ग्रुप में पेटिंग व क्वीज स्पर्धा भी हुई। इसमें शहर सहित आसपास के विद्यालयों से पहुंचे बच्चों ने उत्साह से भाग लिया। बच्चों ने कूची और रंग से पक्षियों के सुंदर संसार को ड्राईंग शीट पर उकेरा। वहीं क्वीज स्पर्धा में पक्षी और पर्यावरण से जुड़े प्रश्नों के उत्तर भी दिए। दोपहर में सूचना केन्द्र में पक्षियों से संबंधित फोटोग्राफी एवं स्टाम्प प्रर्दशनी का शुभारंभ हुआ। पक्षियों के चित्रों के साथ ही उदयपुर की डाक टिकट संग्रहकर्त्ता पुष्पा खमेसरा का विश्व के 354 से अधिक देशों पर जारी डाक टिकट का संग्रह विशेष आकर्षण का केन्द्र है। इस अवसर पर यूनिसेफ की सिंधु बिनुजीत सहित विभिन्न पक्षी विशेषज्ञ व विभागीय कार्मिक उपस्थित रहे।

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