सिर्फ बातों, बैठकों और कागजों में है पर्यटन विकास
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। पर्यटन की दृष्टि से मेवाड़ का देश दुनिया में अपना एक नाम है। यहां प्राकृतिक विरासत भी है और धार्मिक-ऐतिहासिक स्थल भी, लेकिन अभी तक हम ऐसा कोई प्रयास नहीं कर पाए कि ज्यादा से ज्यादा विदेशी पर्यटक हमारी इस विरासत को देखने आए।(foreign tourism in Mewar)
ऐसी बात नहीं है कि मेवाड़ में विदेशी पर्यटक नहीं आते हैं, लेकिन ज्यादातर विदेशी पर्यटक झीलों की नगरी से जुड़ी पहचान लेकर ही लौट जाते हैं, जबकि झीलों की नगरी उदयपुर की पहचान के साथ ही मेवाड़ के चित्तौड़गढ़, राजसमंद, डूंगरपुर, बांसवाड़ा जिले भी विरासत, किले, महल, आदिवासी संस्कृति, पर्यावरण से घिरे टापुओं जैसी कई पहचान को समेटे हुए हैं, जो मेवाड़ को पर्यटन के तौर पर खास बनाती हैं। लेकिन हम पर्यटकों को खींचने की इस ताकत पर्याप्त इस्तेमाल ही नहीं कर पा रहे है। पिछले तीन साल के आंकड़ों पर ही नजर डाले तो साफ हो जाएगा कि विदेशी पर्यटन विकास सिर्फ बातों में, सरकारी बैठकों और कागजों में है।(foreign tourism in Mewar)

पर्यटन विकास के नाम पर्यटन विभाग सालाना लाखों रूपए खर्च कर रहा है फिर भी यह स्थिति
पर्यटन विभाग से प्राप्त आंकड़े खुद कहानी बया कर रहे हैं कि 2023 में उदयपुर में 213824 विदेशी पर्यटक आए। जबकि राजसमंद में 13927, चित्तौड़ 3469, बांसवाड़ा 69, साल भर में डूंगरपुर में 231 पर्यटक आए जबकि प्रतापगढ़ में तो कोई विदेशी पर्यटक आया ही नहीं। पर्यटन विभाग पर्यटन विकास के नाम सालाना लाखों रूपए खर्च कर रहा है फिर भी यह स्थिति चिंताजनक है। वर्ष 2022 में उदयपुर में 54399, राजसमंद में 3533, चित्तौड़ 711, बांसवाड़ा 90, डूंगरपुर में 119 और प्रतापगढ़ में 28 विदेशी पर्यटक घूमने आए थे।

हमारे पास इतना मजबूत आदिवासी कल्चर है, फिर भी यह हाल
पर्यटन विभाग के आंकड़ों से ही हकीकत सामने आ रही है कि मेवाड़ में विदेशी पर्यटन की क्या स्थिति है। हम पर्यटन स्थलों को एक तरफ रख दे तो भी मेवाड़ में ग्रामीण क्षेत्रों और आदिवासी क्षेत्रों के कल्चर में इतनी ताकत है कि हर महीने बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक आदिवासी क्षेत्रों में आ सकते है। आदिवासियों का खान पान, रहन सहन, उनके रीतिरिवाज, पारंपरिक पर्व और मेलों में भी इतनी ताकत है कि विदेशी पर्यटक एक बार देख लें तो बार-बार देखने से अपने आपको रोक नहीं पाएंगे। सिर्फ जरूरत सतत प्रयास करने की है।
पर्यटन विकास के विजन वाले अधिकारियों की जरूरत
इस कड़वी हकीकत को नकारा नहीं जा सकता कि पर्यटन विभाग में ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जिनका पर्यटन विकास को लेकर अपना एक मजबूत विजन हो। ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो यह विजन रखते हो कि विदेशी पर्यटन को कैसे मेवाड़ में आकर्षित किया जा सके। जिनको बिना किताब, बुकलेट देखे पर्यटन से जुड़ी जानकारी टिप्स पर याद हों और जिनके दिमाग में पर्यटन विकास का नक्शा हर समय तैयार मिले। तभी मेवाड़ में विदेशी पर्यटन को बढ़ावा मिल सकेगा।
डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।
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