आमजन में रही चर्चा : क्या संपत्ति विवाद रिश्तों और आपसी एहसासों से बड़ा हो गया.?
- यह समय था जब पूरा परिवार एक साथ खड़ा होकर समाज को एक मिसाल पेश करता कि संपत्तियां रिश्तों के एहसासों से ऊपर नहीं हो सकती।
लकी जैन, उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। देश की आजादी के बाद भी भले ही अलग-अलग राजघराने एक भारत में विलय हो गए हों, लेकिन आमजनता ने इन राजपरिवारों का सम्मान उसी प्रकार बरकरार रखा जो आजादी से पहले हुआ करता था। आमजन के लिए राजपरिवारों के सदस्य हमेशा रोल मॉडल रहे हैं। मेवाड़ राजपरिवार की तो बात ही अलग रही है। देश के लिए राजपाट और प्राण तक न्यौछावर कर देने वाले महाराणा प्रताप के वंशजों ने भी मेवाड़ के आन-बान-शान का हमेशा ध्यान रखा और हर मेवाड़ी के मन में राजपरिवार के सदस्यों के लिए असीम प्रेम रहा है। राजपरिवार राजपूत ही नहीं, सभी मेवाड़ियों के लिए एक रोल मॉडल रहे हैं। लेकिन आज मेवाड़ राजपरिवार ने ये कैसी मिसाल पेश की है.?
कहते हैं घर में किसी के मौत-मरण होने पर तो दुश्मन भी दुख व्यक्त करने आ जाते हैं, लेकिन मेवाड़ पूर्व राजघराने के महाराणा महेन्द्र सिंह मेवाड़ के निधन पर उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होने न तो छोटे भाई अरविंद सिंह मेवाड़ आए और न ही उनके भतीजे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ कहीं दिखायी दिए। लोगों के बीच ये चर्चा भी रही कि संभवत अरविंद सिंह मेवाड़ स्वास्थ्य खराब होने से अंतिम यात्रा में शामिल नहीं हो सके होंगे, लेकिन उनके बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ तो आ ही सकते थे, वे समोर बाग न सही, तो महासतिया आकर पुष्पांजलि अर्पित करते तो समाज के बीच एक अच्छा संदेश जाता। पूरे दिन समाज के लोगों में इस बात की चर्चा रही कि संपत्ति विवाद के चलते भले ही दोनों परिवारों के बीच काफी मनमुटाव हो गए हों, लेकिन ऐसे समय में पूरे राजपरिवार को एक साथ खड़ा रहना चाहिए था।
भाई-भाई में संपत्ति विवाद होने से रिश्ते तो खत्म नहीं हो जाते हैं.?
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने एक माह पहले 10 अक्टूबर को उनके सोशल मीडिया पर दिवंगत रतन टाटा के निधन पर तो शोक व्यक्त श्रद्धांजलि अर्पित की थी, लेकिन 10 नंवबर को अपने सगे ताऊ महेन्द्र सिंह मेवाड़ के निधन पर वे सार्वजनिक तौर पर न तो एक शब्द लिख सके और न ही बोल सके। भाई-भाई में संपत्ति विवाद होने से रिश्ते तो खत्म नहीं हो जाते हैं.? यह समय था जब पूरा परिवार एक साथ खड़ा होकर समाज को एक मिसाल पेश करता कि संपत्तियां रिश्तों के एहसासों से ऊपर नहीं हो सकती.! Mahendra singh mewar and Arvind singh mewar : Mewar royal family
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