- जिलों के विशिष्ट उत्पाद की मदद से लोकल से ग्लोबल बनेगा भारतीय बाजार
- पेसिफिक यूनिवर्सिटी और जीजीटीयू के सांझे में हो रही है कॉन्फ्रेंस
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। पेसिफिक विश्वविद्यालय में आयोजित हो रही 75वीं ऑल इंडिया कॉमर्स कॉन्फ्रेंस विकसित भारत 2047 का दूसरा दिन रोचक एवं नयी जानकारियों से युक्त रहा। कॉन्फ्रेंस सेक्रेटरी तथा गुरू गोविंद ट्राइबल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. केएस ठाकुर ने बताया कि दूसरे दिन दो मेमोरियल तथा दो तकनीकी सत्रों में शिक्षाविदों ने सूचनाप्रद शोध पत्रों का वाचन एवं प्रस्तुतीकरण किया। (75th All India Commerce Conference in pacific university)
इंडियन कॉमर्स एसोसिएशन की वार्षिक जनरल बोर्ड मीटिंग भी हुई जिसमें प्रो केएस ठाकुर को आईसीए का प्रेसिडेंट चुना गया। भारत में डिजिटल इकॉनोमी के लिए कॉमर्स एजूकेशन के ट्रांसफोर्मेशन पर एक पैनल डिस्कशन रखा गया। कॉन्फ्रेंस में 5वीं अखिल भारतीय कॉमर्स कॉन्फ्रेंस में भाग लेंगे 400 से अधिक महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलरए प्रोफेसर और रिसर्च स्कॉलर सहित 28 राज्यों के 2300 शिक्षाविद भाग ले रहे हैं।
AI के नकारात्मक प्रभावों से निपटने के लिए समाज को तैयार रहना होगा
कॉन्फ्रेंस जॉइंट सेक्रेटरी तथा पेसिफिक यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट प्रो. हेमंत कोठारी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के महत्व पर बोलते हुए कहा कि एआई के उपयोग से कार्य को सरल और कम समय में किया जा सकता है। AI पर आधारित सेशन की अध्यक्षता करते हुए अन्नामलाई यूनिवर्सिटी के प्रो. रामचंद्रन और श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के डॉ. एस. प्रकाश ने बताया कि आर्टिफियल इंटेलिजेंस के अवसर असीमित हैं और कई लोगों ने इसमें करियर बनाया है, लेकिन इसके उपयोग में नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का ध्यान रखना आवश्यक है। यह हमारे जीवन को और अधिक सरल बना सकता है, लेकिन इसके सकारात्मक व नकारात्मक प्रभावों से निपटने के लिए समाज को तैयार रहना होगा।
शिक्षाविदों से समझायी वित्तीय साक्षरता
डिजिटल युग में कॉमर्स और मैनेजमेंट शिक्षा का रोडमैप पर आधारित ट्रेक की अध्यक्ष सरदार पटेल विश्वविद्यालय की प्रो. कामिनी शाह और दरभंगा बिहार के प्रो. दिवाकर झा ने कहा कि कौशल विकास के विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन कई तरह के कोर्सेज उपलब्ध हैं। प्रबंधन शिक्षा में डेटा एनालिटिक्स का प्रयोग करके व्यवसायों में डेटा-चालित निर्णय लेने की क्षमता को सिखाया जा रहा है।
मनु भाई शाह मेमोरियल अवार्ड सेशन के अध्यक्ष सेंट्रल युनिवर्सिटी अमरकंटक के प्रो. शेलेन्द्र सिंह और सेंट्रल युनिवर्सिटी मणिपुर के प्रो. केण्टी.सिंह ने बताया कि वित्तीय साक्षरता का अर्थ है कि व्यक्ति को अपने रूपयों के प्रबंधन, निवेश, बचतए ऋण और वित्तीय निर्णयों के बारे में सही जानकारी प्राप्त हो। जब ग्रामीण क्षेत्रों में लोग वित्तीय रूप से साक्षर होंगे तो वे अपनी आय को बेहतर ढंग से प्रबंधित कर सकते हैं, अपनी धनराशि का उपयोग उत्पादक गतिविधियों में कर सकते हैं, और बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थाओं की सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। (75th All India Commerce Conference in pacific university)
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