मानसून स्कोर 2024 : उदयपुर संभाग में हुई औसत से अधिक बारिश
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज) । मेवाड़ सहित पूरे राजस्थान से मानसून विदा हो चुका है। शुरूआत में भले ही मानसून ने मेवाड़ सहित प्रदेश के कई भागों को निराश किया, लेकिन विदा होने से पहले ऐसे बरसा कि कई प्रमुख झीलें, तालाब लबालब हो गए और उन पर चादर भी चल गई। हालांकि उदयपुर संभाग में कुछ जलाशयों के कैचमेंट में अच्छी बारिश नहीं होने से उम्मीद अनुरूप आवक नहीं हुई है। (Udaipur Monsoon Final Update)
उदयपुर जिले में जलसंसाधन विभाग के अधीन कुल 36 झील-तालाब आते है। इनमें से 17 पर चादर चली या अभी भी चादर चलने का क्रम बना हुआ है, 6 जलाशय लबालब है। सलूंबर में विभाग के अधीन 15 जलाशय आते है इनमें से 12 पर चादर चलने का क्रम बना हुआ है। राजसमंद में 25 में से 3 पर चादर चलने का क्रम बना हुआ है जबकि 9 जलाशय लबालब है। राजसमंद झील सहित कई जलाशयों में अभी भी आवक बनी हुई है।
जलाशयों में पानी की उपलब्धता की स्थिति
उदयपुर संभाग में विभाग के अधीन 180 जलाशय आते है। इनमें से 3 बड़े, 21 मध्यम और 156 छोटे बांध-तालाब शामिल है। इन जलाशयों में भराव क्षमता के मुकाबले 72 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। बड़े बांधों के मुकाबले इस मानसून में मध्यम और छोटे बांध-तालाबों में पानी की आवक अच्छी हुई। इससे किसानों की जरूरत भी पूरी हो सकेगी।(Udaipur Monsoon Final Update)
उदयपुर संभाग में औसत से अधिक हुई बारिश
मानसून में उदयपुर संभाग में औसत से अधिक बारिश हुई है। संभाग की औसत बारिश 662 मिलीमीटर है उसके मुकाबले 749 मिलीमीटर बारिश हुई है। उदयपुर जिले की औसत बारिश 653 मिलीमीटर के मुकाबले 722.78 मिलीमीटर बारिश हुई है। यानी 111 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।
राजसमंद में औसत 529 मिलीमीटर के मुकाबले 610.50 मिलीमीटर, चित्तौड़ में औसत 744 के मुकाबले 690.90 मिलीमीटर, भीलवाड़ा में 680 मिलीमीटर के मुकाबले 823.94 मिलीमीटर और शाहपूरा में 680 मिलीमीटर के मुकाबले 867.50 बारिश हुई है।
उदयपुर में लोग उम्मीद छोड़ चुके थे
शहर की दो प्रमुख झीलों फतहसागर और पीछोला के भरने की लोग उम्मीद छोड़ चुके थे। बड़ी तालाब के भरने की आस भी बहुत कम थी, लेकिन सितंबर में कैचमेंट में दो दिन हुई जोरदार बारिश ने इनको लबालब भी कर दिया और कई दिनों तक चादर भी चली।

मानसी वाकल बांध भी भर गया
इन झीलों को भरने वाले आकोदड़ा बांध, मादड़ी बांध, अलसीगढ़ स्थित देवास प्रथम बांध के साथ ही मदार के दोनों तालाब भी खाली पड़े थे। इनके भरने की तो उम्मीद थी ही नहीं, लेकिन मानसून की मेहरबानी से ये भी लबालब होकर छलक गए। शहरी क्षेत्र की 100 कॉलोनियों और झाड़ोल क्षेत्र के 22 गांवों की प्यास बुझाने में अहम भूमिका निभाने वाला मानसी वाकल बांध भी भर गया।
जयसमंद के भरने की आस रह गई अधूरी
मानसून में जयसमंद झील के भरने की आस पूरी नहीं हो पायी। कैचमेंट में एक भी बार उम्मीद अनुरूप बारिश नहीं होने से 8.38 मीटर पूर्ण भराव स्तर वाली जयसमंद झील का जलस्तर 5.10 मीटर तक ही पहुंच पाया। यानी वर्तमान में जयसमंद झील में झमता के मुकाबले 64.07 प्रतिशत पानी ही उपलब्ध है। उदयपुर शहर की पेयजल व्यवस्था में जयसमंद झील का भी अपना अहम महत्व है।

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