नई दिल्ली,(एआर लाइव न्यूज)। ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ यानी एक देश, एक चुनाव के प्रस्ताव को मोदी कैबिनेट ने बुधवार को मंजूरी दे दी है। मोदी सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। उस समिति की रिपोर्ट के आधार पर मोदी कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है। अब आगामी शीतकालीन सत्र में सरकार इस पर बिल ला सकती है।(one nation, one election)
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि कमिटी की सिफारिशों पर देश के सभी मंचों पर चर्चा की जाएगी। नौजवानों, कारोबारियों, पत्रकारों सहित विभिन्न संगठनों से इस पर बात होगी। उसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर इसे लागू किया जाएगा। इधर कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है।
लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ : स्थानीय निकाय चुनाव एक साथ होंगे
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वन नेशन वन इलेक्शन पर समिति ने 191 दिन तक काम किया और 21558 लोगों से राय ली। 80 प्रतिशत लोगों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। जिसमें 47 में से 32 राजनीतिक दल भी शामिल हैं। समिति ने पूर्व मुख्य न्यायाधीशों, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों, चुनाव आयुक्तों और राज्य चुनाव आयुक्तों से भी बात की। पहले चरण में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे। दूसरे चरण में स्थानीय निकाय चुनाव (पंचायत और नगरपालिका) के चुनाव होंगे।(one nation, one election)
वन नेशन वन इलेक्शन के फायदे
देशभर में एक साथ चुनाव होने से करोड़ों रुपये की बचत होगी। चुनाव आयोग को बार-बार चुनाव कराने के नाम कई स्तर की प्रक्रिया पूरी करवाने काफी मेहनत करनी पड़ती है और इस पर खर्चा भी होता है। बार बार चुनाव से आए दिन आचार संहिता लग जाने से विकास कार्यां के साथ ही आमजन के कई काम भी अटके रहते है उस समस्या का भी समाधान हो सकेगा।
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