उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। हिंदुस्तान जिंक चंदेरिया लेड जिंक स्मेल्टर में द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर 16 हेक्टेयर जेरोफिक्स बंजर भूमि को पुनः हरितिमा में बदलेगा। इसके लिए हिंदुस्तान जिंक अनुपजाउ क्षेत्र को हरे भरे क्षेत्रों में बदलने के लिए अभिनव माइकोराइजा तकनीक का उपयोग कर करेगा। (Hindustan Zinc Collaborates with TERI to Transform Wasteyard into Green belt)
परियोजना के तहत माइकोराइजा तकनीक का उपयोग किया जाएगा, चंदेरिया लेड जिंक स्मेल्टर में 6.25 हेक्टेयर भूमि पर लगभग 11000 देशी प्रजातियां लगाई गईं हैं और उच्च घनत्व वाला हरित आवरण निर्मित कर किया गया है। इस उपलब्धि को पर्यावरण बेस्ट प्रेक्टिस 2021 के लिए सीआईआई राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वर्तमान चरण इस सफलता पर आधारित हैं। जिसका उद्देश्य डंप ढलानों को और अधिक स्थिर करना, कटाव को नियंत्रित करना और कार्बन पृथक्करण को बढ़ावा देना है।

कंपनी ने 2 मिलियन से अधिक पौधे लगाने की उपलब्धि हासिल की
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा विश्व की सबसे सस्टेनेबल धातु और खनन कंपनी के रूप में निरंतर कॉर्पोरेट पर्यावरणीय जिम्मेदारी में मानक स्थापित कर रहे हैं। माइकोराइजा तकनीक का उपयोग कर जारोफिक्स यार्ड को हरा भरा करना हमारी अभिनव भावना और सस्टेनेबल संचालन के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। हम उदाहरण प्रस्तुत कर औद्योगिक उप-उत्पादों को हरित परिसंपत्तियों में बदलने में अग्रणी उद्योग है।
कंपनी ने हाल ही राजस्थान और उत्तराखंड में अपनी परिचालन इकाइयों के आसपास 2 मिलियन से अधिक पौधे लगाने की उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने अपने परिचालन स्थलों पर मियावाकी वृक्षारोपण भी लागू किया है, जिससे कम समय में घने, विविध और तेजी से बढ़ने वाले जंगल स्थापित हो गए हैं।
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