दुकान के बाहर आया आरोपी तलवार से गर्दन पर किया वार
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। सलूंबर जिले के जावरमांइस थाना क्षेत्र के अदवास गांव में गुरूवार रात अध्यापक शंकरलाल मेघवाल(40) की हत्या करने वाले आरोपी फतह सिंह ने घटना के करीब 20-22 घंटे बाद आज शुक्रवार शाम उसी तलवार से खुद का गला काट कर आत्महत्या कर ली, जिससे उसने अध्यापक की हत्या की थी। (school teacher murder in zawar mines salumber) बताया जा रहा है कि यह सब कुछ जादू-टोने के वहम और अंधविश्वास के कारण हुआ। फतह सिंह और शंकरलाल पहले दोस्त थे। फतह सिंह को पिछले कुछ समय से यह लगने लगा कि उसके दोस्त शंकर ने उस पर जादू-टोना किया है, जिससे फतह सिंह की आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो गयी और शंकरलाल तरक्की करता चला जा रहा है।
पुलिस को देखकर काटा खुद का गला
अध्यापक शंकरलाल की हत्या के बाद आरोपी फतह सिंह को पकड़ने के लिए पुलिस चप्पे-चप्पे पर नजर रखे हुए थी। पुलिस की एक टीम ने जंगल क्षेत्र में छापा मारा। जहां पुलिस ने फतह सिंह को देखा तो उसे पकड़ने के लिए उसकी तरह बढ़ी। पुलिस को देखकर फतह सिंह ने उसी तलवार से खुद का गला काट लिया, जिससे उसने अध्यापक की हत्या की थी। पुलिस ने दूर से खड़े होकर उसे तलवार फेंकने के लिए काफी समझाया। पुलिस टीम फतह सिंह तक पहुंची, तब तक गले पर गहरा कट लगने से फतह सिंह लहूलुहान हो चुका था। पुलिस ने उसे गंभीर हालत में हॉस्पिटल पहुंचाया, जहां डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुराने दोस्त के पास आया और तलवार से गर्दन पर वार कर दिया
पुलिस ने बताया कि शंकरलाल का घर और दुकान अटैच है। गुरूवार शाम करीब 7 बजे शंकरलाल दुकान के बाहर खड़े थे, शंकरलाल के पिता डालचंद मेघवाल घर के अंदर थे। तभी फतह सिंह दुकान पर आया, शंकरलाल के पास आते ही उसने तलवार निकाली और शंकरलाल के गर्दन पर वार कर दिया। बेटे को खून से लथपथ देख डालचंद भागते हुए घर से बाहर आए और फतह सिंह को रोकने का प्रयास किया, तो आरोपी फतह सिंह ने उनका हाथ काट दिया और इसके बाद मौके से फरार हो गया। तलवार के वार से शंकरलाल की मौके पर ही मौत हो गयी, वहीं डालचंद (60) गंभीर घायल हैं, जिनका एमबी हॉस्पिटल में उपचार चल रहा है। शंकरलाल टीचर थे और उनके तीन बच्चे हैं।
दोस्त की परेशानी कम हो, यह सोच कर शंकर ने फतह सिंह को भोपे से मिलवाया था
बताया जा रहा है कि अध्यापक शंकरलाल और आरोपी फतह सिंह दोनों दोस्त हुआ करते थे। कोरोना काल के बाद फतह सिंह को धंधे में मंदी होने से काफी नुकसान हुआ। सबकुछ ठीक हो जाए यह सोचकर शंकरलाल ने फतहसिंह को एक भोपे से मिलवाया और कुछ टोटके बताए। लेकिन इसके बाद फतह सिंह की धंधा बिलकुल बंद हो गया और आर्थिक स्थिति खराब हो गयी, उसने अहमदाबाद में नौकरी करनी शुरू की, लेकिन वहां भी सफल नहीं हुआ।
फतह सिंह कोरोना काल के बाद से परेशान चल रहा था। इसी दौरान दोस्त शंकरलाल तरक्की करता चला गया और उसने दो दिन पहले ही किराने की दुकान शुरू की थी। यह देखकर फतह सिंह को लगा कि उसके दोस्त शंकरलाल ने ही उस पर कुछ टोने-टोटके किए, जिससे उसकी हालत खराब होती चली गयी और शंकरलाल खुद तरक्की कर गया। इसी वहन के चलते उसने शंकरलाल की दुकान के बाहर तलवार से वार कर हत्या कर दी।
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