- बुजुर्गों की जिंदादिली देख पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने भी सुरक्षा प्रोटोकॉल को छोड़ बुजुर्गों को गले लगाया
- तारा संस्थान के 12 वर्ष पूर्ण होने पर भव्य समारोह में शामिल हुए पूर्व राष्ट्रपति
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर आए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जब मां द्रोपदी देवी आनंद वृद्धाश्रम पहुंचे तो वहां रह रहे बुजुर्गों की जिंदादिली देख वे भावुक हो गए, पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने सुरक्षा प्रोटोकॉल को छोड़ बुजुर्गों को गले लगाया, उनके साथ खूब ठहाके लगाए और बुजुर्गों ने भी उनके साथ खूब सेल्फियां लीं। जीवन के इस पड़ाव में वृद्धाश्रम में रह रहे हर बुजुर्ग इस कार्यक्रम के जरिए खूब सारे सुनहरे पल कैमरे में कैद करना चाहते थे। मौका था तारा संस्थान उदयपुर के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मां द्रोपदी देवी आनंद वृद्धाश्रम में आयोजित हुए समारोह का। (tara sansthan 12th anniversary)
समारोह के मुख्यअतिथि देश के देश के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि बुजुर्ग बोझ नहीं, वे अनुभव का खजाना हैं, वे हमारी संपत्ति हैं। उन्होंने कहा यहां हर बुजुर्ग और उसके परिवार की अपनी अलग कहानी है। कोई कहानी छोटी है, तो कोई बड़ी। तारा संस्थान के संचालक जिक्र करते हुए रामनाथ कोविंद ने कहा इतने बड़े स्तर पर बुजुर्गों और पीडि़तों की सेवा करना सराहनीय है।

मेडिकल वार्ड में भर्ती बुजुर्ग ने पूर्व राष्ट्रपति को सुनाया गीत
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संस्थान के बुजुर्गों के मेडिकल वार्ड में पहुंचे, वहां सारी मेडिकल सुविधाओं की जानकारी ली और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के बारे में जाना। इसी वार्ड में भर्ती बुजुर्ग बृजकिशोर से जब रामनाथ कोविंद मिले तो पता चला कि वे गाना बहुत अच्छा गाते हैं। रामनाथ कोविंद के कहने पर बृजकिशोर ने पूरी जिंदादिली के साथ छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए ये मुनासिब नहीं आदमी के लिए गाया तो कोविंद भी वृद्ध बृजकिशोर के कायल हो गए।
पिता से मिली प्रेरणा
तारा संस्थान की संस्थापक अध्यक्ष कल्पना गोयल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि ऐसा पुनीत कार्य करने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता से मिली। पहले वह बुजुर्गों की ऐसी स्थितियां देख कर बहुत भावुक हो जाया करती थी, लेकिन धीरे-धीरे इनके साथ रह कर इनकी सेवा करने का अवसर मिला तो अब उनमें हिम्मत ओर हौंसला पैदा हो गया है और इन सभी की सेवा करने में उन्हें आनन्द आता है। समारोह में नारायण सेवा संस्थान के संस्थापक कैलाश मानव ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
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