चंडीगढ़,(एआर लाइव न्यूज)। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चंडीगढ़ मेयर चुनाव को लेकर फैसला सुना दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा रिटर्निंग ऑफिसर अनिल मसीह द्वारा खराब किए गए बैलट वैध माने जाएंगे। वोटों की गिनती दोबारा होगी और फिर मेयर चुनाव जाएगा। यह फैसला मामले की सुनवाई कर रहे सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बैंच ने दिया है।
सीजेआई की बैंच ने टेंपर किए बैलट पेपर्स कोर्टरूम में खुद देखे
मामले की सुनवाई करते हुए सीजेआई ने रिटर्निंग ऑफिसर अनिल मसीह द्वारा खराब किए गए वोट को प्रस्तुत करने को कहा। ज्यूडिशियल ऑफिसर ने बैलट पेपर्स कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा बैलट पेपर्स देखे और फिर चर्चा की।
जिन बैलट पेपर्स पर मसीह ने पेन से लाइन खींची थी, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें वैध माना
सीजेआई की बैंच ने बैलट पेपर्स देखे तो उन सभी 8 बैलेट पेपर्स पर कुलदीप कुमार का स्टैंप लगा था। सीजेआई ने पूछा कि यह कुलदीप कुमार कौन है, तो बताया गया कि वह इस मामले में याचिकाकर्ता हैं। कुलदीप कुमार चंडीगढ़ मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी कैंडीडेट हैं। सीजेआई ने कहा देखिए मिस्टर अनिल कुमार और मनोज कुमार यहां 8 बैलट पेपर को अवैध कर दिया गया। आठों पर कुलदीप कुमार का स्टैम्प लगा था। रिटर्निंग अफसर ने नीचे साइन किया और हर जगह सिंगल लाइन खींच दी। मिस्टर मसीह आपने कहा था कि आपने जहां-जहां लाइन खींची है, वो बैलट खराब कर दिए गए थे। ये कहां खराब किए हैं.?
याचिकाकर्ता कुलदीप कुमार ने पक्ष रखते हुए कहा : बैलट पेपर्स पर ये सिर्फ एक लाइन है। ये केवल पैन लगाया गया है। इससे बैलट इनवैलिड नहीं हो गए हैं। रिटर्निंग अफसर मसीह वीडियो पर बैलट पेपर खराब करते दिखे हैं। इसके बाद वो चुप रहे और अदालत में आए। उन्होंने सोचा कि वो बच जाएंगे और हम सबको गुमराह करते रहे।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कर रही सीजेआई की बैंच ने फैसला सुनाया और चंडीगढ़ मेयर चुनाव में डाले गए वोटों की दोबारा गिनती करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा निशान लगाए गए सभी 8 बैलट्स को वैध माना जाए और इनके आधार पर वोटों की गिनती हो।
हाईकोर्ट की निगरानी होगी पूरी प्रकिया
सीजेआई ने अनिल मसीह से कहा आप चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रहे थे। बैलट पेपर को खराब करने का काम आप क्यों कर रहे थे, आपको केवल कागजात पर हस्ताक्षर करने थे। नियमों में यह कहां प्रावधान है कि आप मतपत्रों में अन्य चिह्न लगा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा सॉलिसिटर साहब इन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। हम जिला उपायुक्त को निर्देश जारी करेंगे कि वह एक नया रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त करे और बैलट पेपर पर लगाए गए निशानों को नजरअंदाज कर दोबारा से उनकी गिनती कर नतीजे घोषित किए जाएं। ये पूरी प्रक्रिया हाईकोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए।
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